शुक्रवार, 19 फ़रवरी 2010

'चमत्कार' को नमस्कार ?...खुशदीप

जो दिखता है क्या वो हमेशा सच होता है...विश्वास या अंधविश्वास...इसे अलग करने के लिए कोई तो लकीर होती होगी...जो आप देखने जा रहे हैं, मैं नहीं जानता कि ये क्या है...आप ये फोटो-फीचर देखिए फिर खुद ही किसी नतीजे पर पहुंचिए...मेरे कुछ सवाल है, वो बाद में...पहले कुंभाकोणम की ये खबर...

तमिलनाडु के अखबार दिनाकरण में इस साल 16 जनवरी को खबर छपी थी...इससे एक दिन पहले सूर्य ग्रहण था...कुंभाकोणम के साथ ही थेप्पेरुमन्नालुर के अग्रहारम गांव में श्री विश्वनाथ का प्रसिद्ध मंदिर है...खबर के मुताबिक मंदिर के पुजारी ने  सूर्य ग्रहण वाले दिन मंदिर के गर्भगृह का दरवाज़ा सुबह साढ़े दस बजे खोला और पानी लेने के लिए बाहर गया...वहां उसने देखा कि मंदिर स्थित बेल के पेड़ से एक कोबरा मुंह में पत्ती लेकर नीचे उतर रहा है...फिर उस कोबरा ने गर्भगृह में जाकर शिवलिंग के ऊपर उस पत्ती को रख दिया...यही क्रम उसने कई बार और दोहराया...पुजारी के अनुसार कोबरा अपने पापों से मुक्ति पाने के लिए सूर्य ग्रहण के दौरान अर्चना कर रहा था....

पुजारी का ये दावा भी है कि पिछले तीन सूर्य ग्रहणों से हर बार ये कोबरा ऐसे ही मंदिर में आकर अर्चना करता है...15 जनवरी के सूर्य ग्रहण से पहले जो सूर्य ग्रहण पड़ा था उस दिन पुजारी और कुछ स्थानीय नागरिकों ने फोटोग्राफर का इंतज़ाम किया था...कोबरा के लिए दूध भी रखा गया था...लेकिन उस दिन कोबरा प्रकट नहीं हुआ था....

इस बार कोबरा पर नज़र पड़ते ही पुजारी ने गांव में रहने वाले फोटोग्राफर थेनेप्पन को बुलवा लिया...गांव के कुछ और लोगों ने भी ये नज़ारा अपनी आंखों से देखा...जिस अग्रहारम गांव की ये घटना है वहां पीढ़ियों से लड़कों के नाम नागलिंगम या नागराज रखने की परंपरा चली आ रही है...






























आपने फोटो देख लिए...

अब मेरे आप सबसे से चंद सवाल...



क्या ये वाकई चमत्कार है...


क्या ये फोटो वास्तविक हैं...यानि इनसे कोई छेड़छाड़ नहीं की गई है...



जब कोबरा पिछली बार फोटोग्राफर के वहां रहने पर प्रकट नहीं हुआ तो इस बार भी फोटोग्राफर के वहां पहुचने पर चला क्यों नहीं गया...



तमिलनाडु में कहीं ये खबर अंधविश्वास की अति की प्रवृत्ति के चलते अखबार ने अपना सर्कुलेशन बढ़ाने की गरज से तो नहीं छापी...

बहरहाल, जो भी है, मुझे ई-मेल से ये फोटो-फीचर मिला तो आप के साथ बांटने की इच्छा हुई...अब आप विश्वास रखते हों या इसे अंधविश्वास मानते हो, आप अपने मत के लिए स्वतंत्र हैं...मेरा अनुरोध बस यही है कि इस पोस्ट को बस दिलचस्प ख़बर की तरह लीजिएगा...


इस पोस्ट पर भाई शरद कोकास की राय विशेष तौर पर जानना चाहूंगा...

46 टिप्‍पणियां:

  1. ऐसा हो भी सकता है खूशदीप भईया , वैसे आपका भी सवाल जायज है , वैसे कुछ भी हो आपको मेल बहुत अच्छे-अच्छे आते , सारा ठिकरा मेल के उपर ।

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  2. पहले खबर बनी। फिर प्राकृतिक रूप से उस के चित्र लेने का प्रयत्न असफल रहा। फिर जब ऐसा हुआ? तो फोटोग्राफर बुला कर चित्र लिए गए, तब तक कोबरा इंतजार करता रहा।
    वैसे टेबल न्यूज के बारे में क्या विचार है?
    आरंभ में शायद 77-78 में जब रिफाइंड खाद्य तेल आए तो जिस अखबार में में डेस्क पर था वहाँ मजाक में खबर बनाई गई कि यह नपुंसकता फैलाता है। खबर कई दिनों तक ऐजेंसियों के माध्यम से अखबारों पत्रिकाओं में छपती रही। निश्चित रूप से उन दिनों रिफाइंड के दाम गिराने में उस खबर का हाथ था। पर मैं उस के निर्माण का खुद गवाह था।

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  3. भारत चमत्कारों का देश है ...मानों या न मानों :)

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  4. मेल तो बड़ा रोचक आया आपको,
    अन्धविश्वासों ने ही तो धर्म के असली सन्देशों का सत्यानाश कर रखा है

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  5. लोगों के विश्‍वास का फायदा उठाने की भी कोशिश हो सकती है !!

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  6. तमिलनाडु में तो लोग वेसे भी पुजा पाठ बहुत ज्यादा करते है, मै तो इसे अंधविश्वास ही कहुंगा, बाकी बात दिनेश जी की टिपण्णी से साफ़ हो गई..... अरे कभी मुर्ति दुध पी रही है, तो कभी ज्योत जग रही है, सच कहुं तो भगवान को अपने आप को सिद्ध करने के लिये ऎसे तमाशे करने की जरुरत नही, भगवान कोई जादुगर नही जो मदारी की तरह से अपनए जलवे इस रुप मै दिखाये, जरुर यह फ़ोटो मकखन ने नशे मै खिंची होगी, तभी तो आज आया भी नही

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  7. maano to bhagvaan naa maano to patthar. lekin kuch chamatkar maine khud hote dekhe hai isliye kah sakta hu ki sab kuch andh vishvaas to nahi hota...kuch to hota hai, koi shakti hai jo ham sabko nacha rahi hai..

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  8. क्यूँ नहीं हो सकता है खुशदीप जी....
    ये दुनिया चमत्कारों से भरी पड़ी है....क्या सूरज का उगना चमत्कार नहीं है...क्या हमारा सांस लेना चमत्कार नहीं है...क्या हमारा शरीर ही चमत्कार नहीं है...
    फिर एक सांप ने फोटोग्राफ़र का इंतज़ार कर लिया और फोटो खिंचवा लिया, पोज़ मार कर उसे क्यूँ चमत्कार कहा जा रहा है....जितने चमत्कारों के साथ हम हर पल जीते हैं उन चमत्कारों के आगे यह चमत्कार कुछ भी नहीं है ...और हाँ मुझे विश्वास है...फिर भी किसी ने धोखा देने की कोशिश की है तो वो उसका विश्वास है....हाँ नहीं तो !!

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  9. आपके सवाल भी जायज है पर यह भी सत्य है कि दुनिया चमत्कारों से भरी पड़ी है.....

    इसलिये इसको सिरे से नकारा भी नहीं जा सकता....

    यह तो आसथा का प्रश्न है इसलिये बेहतर होगा इस बात को सब अपने अपने नजरिये से देखें उसी प्रकार जैसे कि......

    मानो तो मैं गंगा माँ हूँ ना मानो तो बहता पानी.......

    जय हिंद...

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  10. वैसे तो चम्तकार और भ्रम मे अज्ञान जितना ही फासला होता है ...लेकिन यह सार्वभोमीक सत्य है की प्रकृति चमत्कारों से भरी पडी है ! जब भारत देश में भगवान गणेश दूध पी सकते है तो साँप भी फोटो खिचवा सकता है ...अचरझ क्या है !!!
    http://kavyamanjusha.blogspot.com/

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  11. जय हो शंकर भोले.

    चमत्कार हो गया!

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  12. हो सकता है कि तस्वीर फोटोग्राफी का कमाल हो ...मगर ऐसे चमत्कार भी होते हैं .. !!

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  13. जय भोले बाबा .....चमत्कार को नमस्कार -
    जनता आ रही है .........

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  14. आखिर सांप भी तो पब्लिसिटी कान्शस है . वैसे चम्त्कार को नमस्कार . जब मुर्तिया दुध पी सकती है तो यह तो कुछ नही .

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  15. कुछ भी हो सकता है....आज से नही बहुत दिनों से ये सब चला आ रहा है....पक्का तो तब होगा जब सब आँखों से देख लें..

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  16. अपनी भावना अनुसार इसे देखिये और महसूस करें ....अगर यह ट्रिक नहीं है तो हमारे आम जीवन में बहुत सी घटती घटनाओं का हमें जवाब नहीं मिलता , और हम चुप रह जाते हैं ! श्रद्धा महत्वपूर्ण है और उसका सम्मान होना चाहिए !

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  17. इतने बुद्धिजीवियों के बीच मैं क्या बोलूँ एक हमारा देश ही तो ऐसा है जहाँ सब कुछ सम्भव है। फिर बिना देखे क्या कह सकते हैं मेल हम से बाँटने के लिये धन्यवाद रोचक है आशीर्वाद ----

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  18. .
    .
    .
    खुशदीप जी,

    साफ-साफ ट्रिक है यह,

    सीधा और सबसे बड़ा सवाल जो उठता है वह यह है कि जब पहले से पता था कि इतना महान चमत्कार होने वाला है तो अच्छे कैमरे से वीडियोग्राफी क्यों नहीं की गई?

    और हाँ सांप का टहनी या पत्ती मुंह में लेकर चलने में कुछ भी असामान्य नहीं है बिल को साफ करने या अंडे देने के लिये आरामदायक जगह बनाने के लिये कुछ प्रजातियां करती हैं यह सब, पेड़ पर चढ़ते या उतरते समय सहारे के लिये भी कभी-कभी वह मुँह का सहारा लेता है।

    एक बात और जो पूरा जोर देकर यहाँ पर कहूँगा कि जिसे स्थापित विज्ञान और जीव व्यवहार नियमों के द्वारा समझाया न जा सके तथा/या उस जैसी ही परिस्थितियों में किसी समर्थ व्यक्ति द्वारा दोहराया न जा सके, ऐसा चमत्कार पूरे ज्ञात इतिहास में न कोई कर सका है और न कोई कर सकेगा।

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  19. प्रचार के लिए किया गया चमत्कार.

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  20. कुछ भी हो सकता है जी, पंकज अवधिया जी या कोई
    पशु विज्ञानी ही उचित जवाब दे सकेंगें। पंडित, पुरोहित तो इसी तरह की घटना के इंतजार में रहते हैं और अखबारों की खबरों पर भी भरोसा नहीं।

    प्रणाम स्वीकार करें

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  21. Let me sum up this incidence with a single word..
    " RUBBISH !"
    क्षमा करना खुशदीप, मैं सच को सच ही कहूँगा, सच के अलावा कुछ और नहीं कहूँगा । केवल ध्यानाकर्षण के उद्देश्य से यह पोस्ट लिखी गयी हो तो, यह और बात है.. पर मुझे निराशा हुई !

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  22. डॉ अमर कुमार जी,
    मुझे अच्छा लगा कि आपने बिना लागलपेट दिल की बात मुझे बताई कि आपको ये पोस्ट अच्छी नहीं लगी...आगे भी ऐसे ही मेरी कमज़ोरियों की तरफ़ इशारा करेंगे, तो यकीन मानिए मुझे सबसे ज़्यादा खुशी होगी...

    आपकी बात सिर माथे पर...लेकिन बस एक चीज़ कहना चाहूंगा...पूरा भारत गणेश जी को दूध पिला रहा था...उस वक्त पत्रकारिता के पुरोधा दिवंगत एस पी सिंह जी ने एक मोची को बुला कर सरफेस टेंशन और कैपिलिएरी एक्शन के जरिए दूध के ऊपर चढ़ने के राज़ में दूध का दूध और पानी का पानी कर दिया था...मेरा ये कतई उद्देश्य नहीं कि एक पोस्ट मात्र के लिए मैं ये पोस्ट डालता...

    तमिलनाडु में जयललिता, रजनीकांत, करुणानिधि जैसी बड़ी हस्तियों समेत जानवरों तक के मंदिर बना दिए जाते हैं...अंधपूजा की जाती है...इस पोस्ट में शायद आखिरी पंक्तियों की तरफ डॉक्टर साहब आपका ध्यान नहीं गया...दिनाकरण अखबार ने सर्कुलेशन बढ़ाने की खातिर ये खबर मैनेज भी की हो तो बड़ी बात नहीं...क्या ये पोस्ट हमारी आंखे नहीं खोलती कि हमें जो दिख भी रहा हो उस पर आंख मूंद कर विश्वास नहीं कर लेना चाहिए...मैंने ट्रिक फोटोग्राफी समेत फोटोग्राफर के आने पर भी कोबरा के न जाने संबंधी सवाल उठाने के साथ आखिरी नोट शरद कोकास जी से राय की गुहार लगाने से किया है....उन्होंने अंधविश्वास के ख़िलाफ़ बड़े साइंटिफिक तरीके से अभियान शुरू कर रखा है...मुझे शिद्दत के साथ उनकी राय का इंतज़ार का है...

    और रही बात श्रद्धा और विश्वास की तो एक पत्थर को क्यों इनसान भगवान मानने लगता है...इसलिए नहीं कि वो वाकई दैवीय शक्ति से चमत्कृत है...बल्कि वो अपने स्वार्थ की पूर्ति के लिए ऐसा करता है...अगर कोई पाप किया है तो वो समझता है कि भगवान को फूल और प्रसाद चढ़ाकर अपने लिए साधुवाद खरीद लेगा...अगर वाकई अच्छा इनसान है तो वो भी स्वार्थवश ऐसा करता है...उसका स्वार्थ सुखद प्रकृति वाला होते हुए भी ये चाहता है कि उसे भगवान से वो शक्ति मिलती रहे जिससे कि वो बुरे कामों से बचा रहे...

    एक बात और इनसान को अपने लिए पुरस्कार या सम्मान नहीं लेना चाहिए, ये मैंने आपसे ही सीखा है...जय हिंद...

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  23. हमारा तो विचार है की दुनिया में चमत्कार नाम की कोई चीज़ नहीं होती।
    जो भी इस तरह का होता है , वो आदमी की चलाकी और ट्रिक ही होती है।
    जब तक ये समझ नहीं आती , तब तक चमत्कार लगती है।
    जब समझ आ जाती है , तो फ्रौड़ कहलाती है।

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  24. विश्वास से ही अविश्वास शुरू होता है....और अंधविशवास भी ....सबसे बड़ा चमत्कार ईश्वर है ..और ये ईश्वर इंसान का विश्वास ही है....ना किसी ने उसे देखा है पर बस विश्वास है कि कोई शक्ति है जो ये ब्रह्माण्ड चला रही है....और हर इंसान हर धर्म ईश्वर पर विश्वास करता है...तो ये चमत्कार से ज्यादा विश्वास की बात है.

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  25. कभी-कभी कु्छ विलक्षण घटनाएं भी घट जाती हैं,
    जि्नका जवाब हमारे पास नही होता।

    इसे सहज घटना के रुप मे लिया जाना चाहिए।
    ऐसा भी हो सकता है।

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  26. dr amar kumar ji ko yh post rubbish lagi .to kya unhone koi iske bare me parkash dala..link dene ki kirpa karen....sunder prayas honi anhoni ko samne lane ka ..dhnywad

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  27. इतनी सारी टिप्पणीयां पढ़ने के बाद... ऐसा भी हो सकता है..मान कर भी ...... कहना पड़ रहा है सभी की बातों से सहमत:))

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  28. अब भैया...चमत्कार तो होते ही रहते हैं.... बनारस के अस्सी घाट पर एक कुत्ता था...पता नहीं अब है कि नहीं.... आज से ७ साल पहले की घटना है.... मैं अस्सी घाट पर सुबह सुबह गया था... वहां यह सुना था कि एक काले रंग का कुत्ता...रोज़ अस्सी घाट पर गंगा में नहा कर ....बगल के शिव मंदिर में जा कर पूजा करता है.... और वो मंज़र मैंने अपनी आँखों से देखा.... तब यकीन भी हुआ.... कि चमत्कार भी होते हैं.... अब यहाँ भी क्या पता ऐसा ही हो....

    जय हिंद...

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  29. क्या कहा जाए ...मैं इतना तो मानता हूं कि कोई न कोई सर्वशक्तिमान शक्ति तो है ही ऊपर ..इसके अलावा ..ये आखों देखी वाले ही जाने ..क्योंकि जिसपे ...जिसके साथ गुजरती है ये बस वही जानता है ..
    अजय कुमार झा

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  30. bhaia samajh nahin padta kya likhoon.. lagta to andhvishwas hi hai... jaroori nahin saanp asli hi ho
    Jai Hind...

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  31. और अब 35 वीं टिप्पणी - प्रकाश ही प्रकाश @ कमलेश वर्मा

    मुझसे डिप्लोमैटिक चुप्पी नहीं साधी जाती,
    मुझे निराशा हुई, और मैंने व्यक्त कर दिया.. बस !
    इसके अनेक कारणों में एक यह कि मैं खुशदीप को एक होनहार-प्रतिभासम्पन्न ब्लॉगर के रूप में लेता हूँ..
    अतएव उनका सुनी सुनायी भ्राँतियों को सत्यापन के बिना इस प्रकार लपक लेना मुझे नहीं भाया.. हम मीडिया के सनसनी मोहित रिपोर्टिंग से पहले ही त्रस्त हैं, ऎसा ही ब्लॉगर पर हो तो होता रहे, पर खुशदीप को इससे ग्रस्त होते देख पीड़ा हुई, केवल इतना ही तो ?
    दूसरे यह कि इस प्रकार के चतुर आयोजन एक सुनियोजित फ़ेथ-मारकेटिंग से अधिक कुछ और नहीं । चमत्कार को नमस्कार के साथ पत्रम-पुष्पम समर्यापयामि तो अलग वहाँ ठेलों खोमचों को रखने के इज़ाज़त देने के शुल्क की बात यहाँ न की जाये तो भी इनकी सत्यता परखने को मैंनें बाँदा-टीकमगढ़ के बीहड़ों से लेकर रोहताँग तक की यात्रायें की हैं । उस निष्फ़ल प्रयोजन की क्लाँति को कम से कम शब्दों में Rubbish कहूँगा ।

    तीसरे यह कि हमारे विद्वान मित्र मुझसे लिंक न माँग कर स्वयँ ही टटोलें, हिन्दी ब्लॉगिंग के सँदर्भों में तो ऎसे लिंक अनुपलब्ध हैं ।
    चौथा तथ्य यह कि अवचेतन की गुत्थियों और पराभौतिक शक्तियों को मैंनें कभी से भी नहीं ललकारा.. क्योंकि उन्हें प्रमाणित होना शेष है ।
    लिंक की अनुपलब्धता के एवज़ में मैं अपने युवा मित्र को श्री लँकाई अनुसँधानी डा. अब्राह्म टी. कुवूर ( Dr. Abraham T. Kovoor - The Militant Econoclast ) के अनुभवों से दो-चार होने का आग्रह करूँगा । इसके लिये उनकी अँतिम पुस्तक Begone Godmen - Encounters with spiritual frauds का अवलोकन ही पर्याप्त है ।

    यद्यपि मैंने अपनी कोई भी टिप्पणी आजतक वापस नहीं ली, पर यदि मालिकान-ए-ब्लॉग श्री खुशदीप चाहेंगे तो स्नेह-प्रतीक स्वरूप इससे हटा लूँगा । फिर भी मुझे अपनी उपरोक्त टिप्पणी का खेद कभी नहीं रहेगा, क्योंकि मैं तथ्यहीनता से सदैव परहेज़ करता आया हूँ ।
    बिना किसी दुराग्रह के - अमर

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  32. डॉक्टर अमर कुमार जी,
    ये कैसा इम्तिहान ले रहे सर मेरा, हज़ार जन्म भी ले लूं तो भी आपके पैर का नाखून भी नहीं बन सकता...आप वो शख्सीयत हैं जिनका हर बोल, हर शब्द मेरे लिए पत्थर की लकीर के समान है...खेद जताना तो दूर आपके इस शब्द के इस्तेमाल से ही मैं अपने आप को बहुत छोटा महसूस कर रहा हूं...

    आपकी टिप्पणी छोटी हो या बड़ी, मेरे लिए गीता, कुरान, बाइबल से कम नहीं होती...और इसमें कोई डिप्लोमेसी नहीं है...अगर इसका आप यकीन कर सकें तो कर लीजिएगा...

    आज ये सीख मिली है कि अंधविश्वास दूर करने के लिए अंधविश्वास का ज़िक्र करना भी पॉलिटिकली करेक्ट नहीं है...

    जय हिंद...

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  33. Dear Khushdeep, please don't feel in other way. I have never been so great as you discovered me.
    It was an answer addressed only to Kamlesh Verma Ji .
    Just Leave it here, I have no grudges whatsoever on any point, it is a discussion only.
    In the meanwhile, I would request Kamlesh Ji to find this book and read the incidence of unveiling the mystery of Mind reading Horse !
    Love as always.

    Sorry the Baraha IME is unavailable this time.


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  34. खुशदीप जी ~ आधुनिक मानव के लिए पृथ्वी एक मिटटी-पानी-अग्नि आदि से बना एक गोला मात्र है, किन्तु इस पर आधारित सब 'प्राणी' इसी के परिवार के सदस्य माने या जाने गए...और यह खरबों वर्ष से जीवित है जबकि 'घमंडी इंसान' को केवल १०० वर्ष जीने का अवसर, या सौभाग्य कहलो, मिलता है...और शायद 'बुद्धि जीवी' भी प्राचीन ज्ञानियों समान यह मानेंगे कि इस एक तुच्छ जीवन काल में असंभव है 'परम सत्य' को जानना: क्षणिक 'सतही सत्य' ही भौतिक इन्द्रियों द्वारा प्राप्त करना संभव है...

    और इसी लिए ज्ञानी कह गए कि 'दृष्टा भाव' से आनंद लीजिये जैसे कोई स्टेज पर ड्रामे, या रजत पटल पर देखी एक फिल्म का लेते हैं...यद्यपि तुरंत बाद चर्चा करते हैं किन्तु कालांतर में केवल इतना याद रहता है कि फिल्म अच्छी थी या बुरी, आदि...:)

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  35. आमतौर पर मैं ऐसे चमत्कारों को अंधविश्वास से ज्यादा कुछ नहीं मानता लेकिन ये भी निर्विवाद सत्य है कि कोई ना कोई ऐसी अलौकिक शक्ति तो ज़रूर है जो हमें...आपको ...पूरे ब्रह्मांड को चला रही है

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  36. खुशदीप भाई, मै तो अब पहुंचा हूँ जब सभी लोग अपनी राय दे चुके हैं । अगर ऐसा था तो ब्लोग पोस्ट करते ही मुझे सूचित कर देते वैसे मैं आता ही हूँ लेकिन एक महत्वपूर्ण कार्य में व्यस्त रहएन के कारण उपस्थित नहीं हो पाया ।
    यहाँ उपस्थित सभी लोगों ने इसे चमत्कार नहीं माना है । यह बहुत सामान्य बात है । विभिन्न प्राणियों का इस तरह का व्यवहार होता है । हमारे यहाँ एक प्रसिद्ध नाटककार प्रेम साइमन थे उनके घर कई प्राणि, बैल , कुत्ता ,साँप, बिल्ली नियमित रूप से आया करते थे ।जिन्हे वे भोजन दिया करते थे । यहाँ तक कि उनकी अंत्येष्टि के दिन भी एक साँड मेरे ही सामने आया और सीधा घर के भीतर चला गया और घूमकर वापस आ गया । लेकिन इसे किसी ने खबर बनाने की ज़रूरत नहीं समझी ।( राजकुमार सोनी के ब्लॉग बिगुल पर इसका विस्तृत विवरण है )
    लेकिन इस तरह के अन्धविश्वासों के बहाने हमे समाज में फैल रहे बाज़ार वाद और धार्मिकता को उसका आलम्बन बनाये जाने के ष्ड़यंत्र की पड़ताल तो करना ही होगा इसलिये ऐसे समाचार और खबरें अधिक से अधिक ब्लॉग्स तक आना चाहिये । हाँ इसका आशय स्प्ष्ट होना चाहिये और अनावश्यक बहस नहीं होना चाहिये । । यह अच्छी बात है कि हमारे ब्लॉगर मित्र वैज्ञानिक दृष्टि के विकास के लिये प्रतिबद्ध हैं और अपने लेखन में इस बात का ध्यान रख रहे हैं ।

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  37. "जाकी रही भावना जैसी प्रभु मूरत देखी तिन तैसी" न तो आप लोगों की सोच बदल सकते हैं न अपनी. ये तो वैसे भी लोगों की भावनाओं का खेल है. इसमें क्या शिक्षा क्या अशिक्षा किसी का जोर नहीं चलता. खास कर वो लोग दुनिया में हर तरफ से निराश हो जाते हैं वो ऐसे किस्सों से बलि का बकरा बनते हैं.मैंने तो अच्छे खासे पढ़े लिखे लोगों को इस तरह के जंजाल में फंसते देखा है

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  38. aadhmi ke jeevan me sithare aur grah koi maayane rakhthe hain kya. science hi sach hain. andhvishwas ek kamjori hain.jo science ko jaantha hain woh andhvishwas ko nahi maantha. kya main sach kah raha hoon. muje mail kijiye. thank u. aapka prasad

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  39. i t seems to be manipulated but there r incidences which our mind can not conceive that does not mean they do not exist

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