बुधवार, 17 फ़रवरी 2010

दुनिया पर छा जाना है, इसे पढ़िए...खुशदीप

एक जर्मन नागरिक ऐसे मंदिर में गया जहां निर्माण कार्य अभी चल रहा था...वहां उसने देखा कि एक मूर्तिकार बड़ी तन्मयता से भगवान की मूर्ति को अंतिम रूप देने में लगा है...वहीं साथ में ही उसी भगवान की हू-ब-हू एक मूर्ति और रखी थी...जर्मन थोड़ा हैरान हुआ...आखिर उससे अपने को रोका नहीं गया और उसने मूर्तिकार से पूछ ही लिया...क्या मंदिर में एक ही भगवान की दो मूर्तियों की आवश्यकता है...


ये सुनकर मूर्तिकार काम में लगे लगे ही मुस्कुराया...बोला...नहीं बिल्कुल नहीं...एक मंदिर में एक भगवान की एक ही मूर्ति होती है...लेकिन पहले मैंने जो मूर्ति बनाई, वो मुझसे क्षतिग्रस्त हो गई...



जर्मन ने साथ रखी मूर्ति को बड़े गौर से देखा...कहीं क्षतिग्रस्त होने जैसी कोई बात नज़र नहीं आ रही थी...जर्मन ने कहा... मूर्ति तो बिल्कुल सही सलामत नज़र आ रही है...

मूर्तिकार ने काम में ही मगन रहते हुए कहा...मूर्ति की नाक गौर से देखोगे तो वहां बाल जैसी दरार नज़र आएगी...

बड़ी मुश्किल से जर्मन को वो दरार दिखी...

जर्मन ने फिर पूछा... इस मूर्ति को मंदिर में लगाया कहां जाएगा...

मूर्तिकार....बीस फीट ऊंचे स्तंभ पर...

जर्मन....अगर मूर्ति को इतनी ऊंचाई पर लगाना है तो किसे पता चलेगा कि मूर्ति की नाक पर बाल के बराबर छोटी सी दरार है...

मूर्तिकार ने पहली बार नज़र उठाकर जर्मन को देखा और बोला...सिर्फ़ दो को ये पता होगा...मुझे और मेरे भगवान को...


स्लॉग चिंतन

अगर आप अपने काम में माहिर बनने की ठान लें तो ये इस पर कतई निर्भर नहीं करता कि कोई आप की तारीफ़ करता है या नहीं...


किसी काम को साधने की कला आपको अपने अंदर से ही मिलेगी...किसी बाहर वाले की बातों से वो न बढ़ेगी, न घटेगी..


उत्तमता वो गुण नहीं जो दूसरों के नोटिस करने से निखरे...ये खुद पर भरोसे और तसल्ली की बात है...

इसलिए कड़ा परिश्रम करो और अपने-अपने कार्य-क्षेत्र में छा जाओ...

(ई-मेल से अनुवाद)

35 टिप्‍पणियां:

  1. क्या बात है खूशदीप भईया आज तो आपने दिल खुश कर दिया , सच में हम कुछ भी किसी से भी छिपा लें या चोरी कर लें परन्तु उपर वाला सब देखता है , स्लोग भी लाजवाब लगा ।

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  2. सफ़लता का मन्त्र
    "लगे रहो"
    याद दिलाने के लिए आभार

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  3. खुशदीप भाई आप का ये सन्देश और लिखने का ये अंदाज़ मुझे बहुत पसंद आया !
    सचमुच प्रेरणादायी !

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  4. उत्तमता वो गुण नहीं जो दूसरों के नोटिस करने से निखरे...ये खुद पर भरोसे और तसल्ली की बात है...

    सही कहा है ये खुद को भरोसा और तसल्ली देने की बात है......दूसरों की नजर वैसे भी कमियां ही ढ़ढती हैं ज्यादातर

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  5. दुःख की बात है के आज की पोस्ट में कोई भी छुपा सन्देश नहीं दे पाए आप... :(
    ..
    ..
    ये तो एक उजागर सन्देश है..
    बहुत ही स्पष्ट और आज के समय में निहायत ही जरूरी..
    आभार भईया
    जय हिंद... जय बुंदेलखंड...

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  6. इसलिए कड़ा परिश्रम करो और अपने-अपने कार्य-क्षेत्र में छा जाओ...
    बहुत खूब !!

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  7. आज का चिंतन बहुत ही प्रेरणास्पद है ...
    मेरे लिए तो बहुत ही ...!!

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  8. बहुत प्रेरक प्रसंग और स्लॉग ओवर.

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  9. जिस बात के लिए दिल आज्ञा न दे वो कभी नहीं करना चाहिए...
    अंतरात्मा की आवाज़ सबसे सही आवाज़ होती है....इन्सान को हमेशा खुद के साथ ईमानदार होना चाहिए...
    क्या खुशदीप जी..अरे कभी तो बेकार पोस्ट लिखा कीजिये.....रोज़ -रोज़ फर्स्ट आकर आप थक नहीं गए हैं क्या ...???
    कहिये तो ..हाँ नहीं तो...

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  10. चिंतनीय और प्रेरणादायक स्लाँग ओवर

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  11. वाकई बहुत उपयोगी और प्रेरक. हार्दिक शुभकामनाएं.

    रामराम.

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  12. वाह आज तबियत प्रसन्न हो गई ...बड़ी अच्छी सीख है.

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  13. कलाकार की तन्मयता , एकाग्रता , मेहनत और लगन को सलाम।
    सब के लिए अच्छा सन्देश।
    चित्रकथा पर सही लिखा , खुशदीप भाई।

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  14. तब दोष सिर्फ एक ही व्यक्ति को पता होगा। जब कलाकार का बोध इस स्तर तक चला जाए तो मैं और मेरा भगवान दो कैसे रह सकते हैं?1
    स्लॉग ओवर पोस्ट पूरी होते हुए भी उस का पूरक बन गया है।

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  15. प्रेरक प्रसंग के साथ चिन्तन मनन योग्य स्लाग ओवर बहुत अच्छा लगा धन्यवाद और शुभकामनायें

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  16. उत्तमता वो गुण नहीं जो दूसरों के नोटिस करने से निखरे...क्या बात!

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  17. खुश किया खुशदीप सहगल जी।

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  18. सबसे ज़रूरी है खुद के प्रति ईमानदार रहना....बहुत प्रेरणादायक पोस्ट...

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  19. हम अक्‍सर बहुत सारे कार्य ऐसे ही करते हैं जब कहते हैं कि अरे कर लो कौन देखता है या सब चलता है। लेकिन आपकी आत्‍मा देखती ह‍ै और हमेशा ही धिक्‍कारती भी रहती है। बढिया प्रेरक प्रसंग।

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  20. कर्म किये जा फल की ईक्षा मत कर ऐ इंसान .
    प्रेरणा देती पोस्ट...

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  21. सचमुच यदि इन्सान इसे जीवन का मूल मन्त्र मान ले तो कैसी भी परिस्थितियाँ उसके सफलता के मार्ग को अवरोधित नहीं कर सकती....

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  22. सही कहा आपने हम खुद ही जानते हैं कि हम कहां गलत हैं और अपनी गलतियों को सुधार कर और कडे परिश्रम से ही हम सफलता पा सकते हैं।
    सुन्दर पोस्ट के लिये शुक्रिया

    प्रणाम स्वीकार करें

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  23. IT LOOKS VERY SIMPLE BUT VERY HARD TO FOLLOW BUT ITS REALITY AND FOR SUCCESSFUL LIFE WE ALL SHOULD FOLLOW IT....WE ALL KNOW BUT VERY FEW AMONG US FOLLOW..........ISN'T IT?????

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  24. भैया ...यह बात तो सही है...हम लाख गलती खुद से व दुनिया से छुपा लें..... लेकिन उस उपरवाले से नहीं छुपा सकते....

    बहुत अच्छी लगी यह पोस्ट...

    जय हिंद...

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  25. कड़ा परिश्रम करो और अपने-अपने कार्य-क्षेत्र में छा जाओ...सफलता का मूल मंत्र है यहि तो....मन तो दर्पण है, हम अपने अच्छे बुरे कर्मो कि छ्वी खूद अपने मन मे ही तो देख पाते है !
    आभार

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  26. खुशदीप जी,
    प्रतिक्रया के लिए शुक्रिया /
    आगे आपकी प्रतिक्रया के फलस्वरूप कुछ बाते कहना चाहता हूँ , पूरी उम्मीद है की आप तसल्ली से पढेंगे जो यूं है -

    अपने सुसंयत भाव और खुशमिजाजी के लिए खूब जाने जानेवाले खुशदीप सहगल जी ने जो सलाहियत भरी बाते बतौर टिपण्णी मुझे लिखी उसे मै अपने सर-माथे लगाता हूँ /
    सहगल साब ने जो बाते महफूज जी के बाबत कही उसे सोलह आन्ना सच्च मै भी कबूलता हूँ , इसकी मुझे दरकार नहीं कि मै तस्दीक करता फिरू बल्कि पक्के तौर पर जानता हूँ महफूज एक साहसी और रंधीर शख्सियत है , मगर मै इस हक में नहीं कि नवाबो की तहजीब वाली मशहूर शहर ब्लोगिंग के नाम पर दुनिया में रुसवा होती होतो गमखार बना बैठा रहू क्यों की समूची दुनिया जानती है कि लखनऊ का मतलब है जुबान की मिठास से दिल पर बादशाहत कायम करना और हमारे महफूज भाई वो ही भूल गए , मेरी समझ से ये एक हाहाकारी वाकिया है /
    खुशदीप जी ने आखिरी जुमले तक सच्च लिखा कि हमारे इर्दगिर्द लिखने समझने के लिए हजारो हौलनाक मसले मचलते मिल जायेंगे जो देश और समाज की जान खाए जा रहे है मगर मुझ आफत के पुतले ने फिर भी जहमत ये उठाई की किशोर-महफूज की जुगलबंदी पर ही लिखना गंवारा किया तो फक्त इस लिए कि जिस बिंदास अदा से महफूज भाई बेबाक होकर लिख गए उसकी रोकथाम तो होनी ही चाहिए थी और जिस किस्म की रोकथाम किशोर आजवानी कर रहे थे वो किसी भी नजरिये को मुनासिब इन्साफ दर्ज नहीं करती थी लिहाजा मैंने अपना रूख तल्ख़ किया ना की गैर मुनासिब किया / मैंने ये तोहमत नहीं महफूज भाई पर आयद नहीं की कि महफूज जी ने किशोर जी को अपशब्द कहे बल्कि अपना विरोध ये कहकर दर्ज करवाया कि कान उखाडू टिपण्णी जहर बूझे लफ्जो की मुहताज नहीं /
    बांकी रह गयी बात ब्लोगिंग की तो खुलासा करना बेहतर होगा कि दूसरे हजारो ब्लोगरो की तरह ब्लोगिंग मेरा भी सगल ही है ना की रोजीरोटी का जरिया / पिछले दो दशक भी ज्यादा वक्त से बतौर ज्योतिषी के पुरजोर सलाहियत और ईमानदारी से एक ही मुकाम पर टिक कर दो वक्त की रोटी प्रभु का नाम लेकर खा रहा हूँ / ना तो मै इस मुगालते में हूँ की महफूज जी का नाम भज कर ब्लॉग बैतरनी पार कर कारू का खजाना पा जाउंगा , ना ही ये खामख्याली में हूँ कि आज मै किशोर आजवानी की तरफदारी करूंगा तो कल बा-जरिया किशोर आजवानी स्टार न्यूज़ में तिन देवियों वाले प्रोग्राम में अक्ल को बीमार करने वाली मगर दुनिया को अपने हुसन से हैरान परेशान कर देने वाली उन तिन महिला नजूमियो की जगह मुझे मिल जाए गी / मैंने तो सवाल महज तमीज और तहजीब के बाबत उठाया था जो की मेरे हिसाब से असुबिधा वाली बात जरूर थी /
    अंत में , फिर से महफूज जी वाले शिरे पर आता हूँ की मेरी उनकी कोइ जाती अदावत तो है नहीं / मै इतना भी गाफिल नहीं की उनकी उरमा को ना समझू लेकिन ये वाही ताजूब की बात है की उनके जैसा अच्छी तालीम रखने वाला बन्दा क्यों कर भूल करे गा /
    थैंक्स/

    उत्तर देंहटाएं
  27. खुशदीप भैया.... यह टिप्पणी मैंने.... ताम्ड़े जी के ब्लॉग पर दी है.... पर उन्होंने छापा नहीं है.... इसलिए यहाँ छाप रहा हूँ.... माफ़ी चाहता हूँ... इसके लिए...


    भाई.... आप शायद भूल रहे हैं.... मेरे पर्सनालिटी के अलावा मैं एक आम इंसान भी हूँ.... मैंने ऐसा कुछ नहीं कहा है.... आप नाहक ही नाराज़ हो रहे हैं.... आपने कभी मुझसे ...बात नहीं की....कभी मिले भी नहीं.... कभी देखा भी नहीं.... फिर आप कैसे मेरे बारे में एनालिसिस कर सकते हैं? किशोर जी को मुझसे कोई प्रॉब्लम नहीं है.... फिर यह सब क्यूँ? आपने इतना कुछ लिख दिया..... मैंने कहा कुछ? मुझे ज़रूरत भी नहीं है.... लेकिन अब ज्यादा हो रहा है.... और मेरी ज़बान अगर आपको सुन्नी है तो पॉडकास्ट लगा है.... इस ब्लॉग जगत में तकरीबन सबसे मेरी बात होती है....अगर कोई यह कह देगा कि मैं बदतमीज़ हूँ ,...... तो ब्लॉग्गिंग छोड़ दूंगा... आपसे गुज़ारिश है .... बेईज्ज़ती करने की कोशिश मत करिए.... मैंने बहुत मुश्किल से गुस्सा कंट्रोल करना सीखा है.... आपको मेरे बारे में जानना है तो मेरा प्रोफाइल पढ़िए...ब्लॉग देखिये.... उस पर भी आप पूरे लखनऊ में जान सकते हैं मेरे बारे में.... हाँ! जो मुझे नहीं जानता होगा लखनऊ में तो यह समझ जाईयेगा कि उसका स्टेटस नहीं है कि वो मुझे जाने....

    रही बात खूबसूरती की...तो भाई... तो यह मुझे मेरे माता-पिता से मिली है.... मैं ऊपरवाले का शुक्रगुज़ार हूँ.... की मुझे खूबसूरत बनाया.... और इस खूबसूरती को मैंने मेनटेन किया.... खूबसूरत हूँ ....यह तो देख के ही लगता है.... पर क्या यह ऐसा है कि इसे शीर्षक बनाया जाये....? कातिलाना तो हूँ ही .... इसमें भी कोई शक नहीं है... पर आप यह सब क्यूँ कर रहे हैं....? मैंने ऐसा क्या कर दिया है.... यह बताइए... यहाँ तो लोग ऐसी ऐसी गालियाँ देते हैं ... कि वो मैं सोच भी नहीं सकता.... उनको बोलिए.... साला...कुत्ता... बहुत कॉमन है.... और जो लड़का ....गाली नहीं देता ...तो वो डाउटफुल कैरेक्टर है.... तो भाई आप मुझे लड़का ही रहने दें.... आप मेरे बोलने पर अंकुश नहीं लगा सकते.... हाँ! अगर मैं बदतमीजी कर रहा हूँ ..... तो मेरे बड़े हैं यहाँ हैं मुझे समझाने वाले.... आपको पहले मुझसे बात करनी चाहिए थी... फिर कुछ लिखना चाहिए था... लखनऊ की पूरी तहजीब है मेरे पास.... यह जो मुझसे बात करते हैं...वो जानते हैं.... और मेरी बात यहाँ तकरीबन सबसे होती है....

    क्यूँ यह सब करना... आप अगर सही होते... तो पहले मुझे जानने की कोशिश करते... फिर यह सब लिखते.... मेरी आपसे गुज़ारिश है कि बिना जाने समझे.... अब आप नहीं लिखेंगे... मुझे आपकी उम्र नहीं पता है... फिर भी आपकी इज्ज़त करता हूँ.... प्लीज़ यह सब बंद करिए... मैंने ऐसा भाई.... आप शायद भूल रहे हैं.... मेरे पर्सनालिटी के अलावा मैं एक आम इंसान भी हूँ.... मैंने ऐसा कुछ नहीं कहा है.... आप नाहक ही नाराज़ हो रहे हैं.... आपने कभी मुझसे ...बात नहीं की....कभी मिले भी नहीं.... कभी देखा भी नहीं.... फिर आप कैसे मेरे बारे में एनालिसिस कर सकते हैं? किशोर जी को मुझसे कोई प्रॉब्लम नहीं है.... फिर यह सब क्यूँ? आपने इतना कुछ लिख दिया..... मैंने कहा कुछ? मुझे ज़रूरत भी नहीं है.... लेकिन अब ज्यादा हो रहा है.... और मेरी ज़बान अगर आपको सुन्नी है तो पॉडकास्ट लगा है.... इस ब्लॉग जगत में तकरीबन सबसे मेरी बात होती है....अगर कोई यह कह देगा कि मैं बदतमीज़ हूँ ,...... तो ब्लॉग्गिंग छोड़ दूंगा... आपसे गुज़ारिश है .... बेईज्ज़ती करने की कोशिश मत करिए.... मैंने बहुत मुश्किल से गुस्सा कंट्रोल करना सीखा है.... आपको मेरे बारे में जानना है तो मेरा प्रोफाइल पढ़िए...ब्लॉग देखिये.... उस पर भी आप पूरे लखनऊ में जान सकते हैं मेरे बारे में.... हाँ! जो मुझे नहीं जानता होगा लखनऊ में तो यह समझ जाईयेगा कि उसका स्टेटस नहीं है कि वो मुझे जाने....

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  28. रही बात खूबसूरती की...तो भाई... तो यह मुझे मेरे माता-पिता से मिली है.... मैं ऊपरवाले का शुक्रगुज़ार हूँ.... की मुझे खूबसूरत बनाया.... और इस खूबसूरती को मैंने मेनटेन किया.... खूबसूरत हूँ ....यह तो देख के ही लगता है.... पर क्या यह ऐसा है कि इसे शीर्षक बनाया जाये....? कातिलाना तो हूँ ही .... इसमें भी कोई शक नहीं है... पर आप यह सब क्यूँ कर रहे हैं....? मैंने ऐसा क्या कर दिया है.... यह बताइए... यहाँ तो लोग ऐसी ऐसी गालियाँ देते हैं ... कि वो मैं सोच भी नहीं सकता.... उनको बोलिए.... साला...कुत्ता... बहुत कॉमन है.... और जो लड़का ....गाली नहीं देता ...तो वो डाउटफुल कैरेक्टर है.... तो भाई आप मुझे लड़का ही रहने दें.... आप मेरे बोलने पर अंकुश नहीं लगा सकते.... हाँ! अगर मैं बदतमीजी कर रहा हूँ ..... तो मेरे बड़े हैं यहाँ हैं मुझे समझाने वाले.... आपको पहले मुझसे बात करनी चाहिए थी... फिर कुछ लिखना चाहिए था... लखनऊ की पूरी तहजीब है मेरे पास.... यह जो मुझसे बात करते हैं...वो जानते हैं.... और मेरी बात यहाँ तकरीबन सबसे होती है....

    क्यूँ यह सब करना... आप अगर सही होते... तो पहले मुझे जानने की कोशिश करते... फिर यह सब लिखते.... मेरी आपसे गुज़ारिश है कि बिना जाने समझे.... अब आप नहीं लिखेंगे... मुझे आपकी उम्र नहीं पता है... फिर भी आपकी इज्ज़त करता हूँ.... प्लीज़ यह सब बंद करिए... मैंने ऐसा कुछ नहीं किया है कि सबसे घूम घूम कर माफ़ी मांगू... और आप चूंकि मेरे बारे में नहीं जानते हैं...इसलिए आपने ऐसा कह दिया है.... मैं अगर किसी से माफ़ी मांग रहा हूँ...तो यह बहुत बड़ी बात है... पर कोई रीज़न तो हो....

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  29. बहुत बढ़िया लगा! कमाल का लिखा है आपने! शानदार!

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  30. खुश दीप भाई आप ने तो बहुत ही सुंदर बात लिख दी, ऎसी बाते तो मेरे पिता जी मुझे आज तक समझाते थे, आप का धन्यवाद, ओर छा जाने वाली बात भी बहुत अच्छी लगी फ़िर से धन्यवाद.
    नीचे आ रहा था तो तामरे सहब ओर महफ़ुज भाई की टिपण्णी पढी, ताम्रे साहब लगता है आप को कोई बात महफ़ुज की चुभ गई, अजी यह तो हम सब के लिये एक शरारती बच्चा है लेकिन बहुत स्याना भी, फ़िर हमे जब ब्लांगिग मै रहना है तो एक दुसरे की बाते सह लेनी चाहिये, प्यार का महोल बना रहता है, अगर किसी की कोई बात चुभ जाये तो ऎसा मामला मेल से सुलझ जाता है, सब को बताने से क्या लाभ, चलिये अब बात को यही खत्म करे ओर बाकी गलत फ़ेहमी मेल से ओर प्यार से सुलझा ले.

    उत्तर देंहटाएं
  31. तामड़े जी,
    पहले तो मेरी गुस्ताख़ी माफ़ कीजिएगा मैं आपको तामरे जी लिख गया था...आपने मेरी टिप्पणी को सही संदर्भ में लिया, उसके लिए आभार प्रकट करता हूं...मैं जानता हूं जब आप सामाजिक और देशहित के मुद्दों पर लिखेंगे तो कमाल लिखेंगे...सिर्फ इसलिए अपने विचार आप तक पहुंचाए...रही बात किशोर अजवाणी और महफूज़ अली की, दोनों बहुत ही सुलझे हुए इनसान हैं...मुझे यकीन है, इन दोनों ने आपस में संवाद कायम कर जो भी गलतफहमी हुई होगी उसे दूर कर लिया होगा...आप ने लखनऊ की तहज़ीब के बारे में जो भी लिखा सच लिखा...लेकिन लखनऊ भी अब पहले वाला लखनऊ नहीं रहा...पिछले दो दशक में जात-पात की राजनीति ने लखनऊ का क्या हाल किया है, सब जानते हैं, इसी लखनऊ कि सरजमीं पर विधानसभा में माइक उखाड़ कर एक दूसरे पर हाथ भांजते माननीय विधायकों को भी हम देख चुके हैं...ऐसे में सिर्फ़ महफूज़ को दोष देना कहां तक उचित है...वैसे एक बात आपको बताऊं महफूज़ की जन्मभूमि लखनऊ नहीं गोरखपुर है...लखनऊ तो महफूज़ की कर्मभूमि है...महफूज़ का ज़िक्र आते ही न जाने क्यों मुझे मदर इंडिया का बिरजू याद आ जाता है...वो बिरजू जो अपनों के लिए कुछ भी करने को तैयार हो जाता है...आपने भी महफूज़ को ठीक तरह समझना है तो एक बार मदर इंडिया में बिरजू के उस किरदार को ज़रूर देखिए जो बड़ा होकर सुनील दत्त बनता है...और हां, मैंने अगर कुछ ऐसा लिख दिया हो जिससे आपको कुछ असहजता महसूस हुई तो माफ़ी चाहता हूं...बस इस प्रकरण को यही खत्म कर दीजिएगा...और अब ऐसा कुछ सार्थक लिखिए, जैसा कि हम सब आपसे उम्मीद कर रहे हैं...आपकी पोस्ट के इंतज़ार में...

    जय हिंद...

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