गुरुवार, 11 फ़रवरी 2010

सरकार अब मौन है...खुशदीप

चलिए सरकार की दुकान...

क्या खरीदना है...पेट के लिए रोटी, हाथ के लिए रोज़गार, सिर के लिए छत...



सरकार की दुकान से जवाब मिलेगा....ये तो नहीं है...सपने हैं वो ले लो...सिनेमा है वो ले लो...माई नेम इज़ ख़ान है, वो ले लो, मल्टीप्लेक्स ले लो, ब्लू टूथ वाले एक से बढ़ कर एक मोबाइल ले लो...चमचमाती कारें ले लो...

आप कहेंगे कि न जी न इनकी भला हमारी औकात कहां...हमें रोटी न सही सिक्योरिटी दे दो...

सरकार कहेगी...मज़ाक करते हो, शर्म नहीं आती...तुम्हे सिक्योरिटी की क्या ज़रूरत...आम आदमी तो फैंटम होता है...निहत्था मैदान में खड़ा रहता है...ललकारता हुआ सरहद पार के कसाबों को, बोट से बैठ कर आओ बेरोकटोक...चलाओ जितनी चाहे गोलियां...आम आदमी फीनिक्स है...फिर खड़ा हो जाएगा अपनी राख़ से धूल झाड़ता हुआ...

लेकिन ये बेचारे मंत्री, नेता, अभिनेता...असली बकरी तो ये हैं...फाइव स्टार सुविधाओं वाले घरों में रहते हैं...बेचारे आसमान में उड़ते रहते हैं...ज़मीन पर तो कभी-कभार ही पैर धरते हैं...सिक्योरिटी इन्हें दें या अपने अंदर  सुपरमैन लिए आम आदमी तुझे....


ए रे आम आदमी...तू क्यों अपने से इतना मोह करता है...रोटी तुझे मिलेगी नहीं...तुझे तो मरना ही है...भूख से मर या कसाब की गोली से...फिर काहे ये नवाबों जैसे नखरे दिखाता है...सिक्योरिटी-सिक्योरिटी चिल्लाता है...खामख्वाह हमसे भी झूठ बुलवाता है...रावणराज में रामराज की बात कराता है...

जनता का स्पीकर ऑन है...


लेकिन सरकार अब मौन है...




स्लॉग ओवर

हमारे ख़िलाफ़ सक्रिय शक्तियां कभी भी हमारे अंदर की शक्ति से बड़ी नहीं हो सकतीं..


ऊपर वाले पर भरोसा रखिए...


वो ऐसी किसी शक्ति को हमारे सामने नहीं भेजेगा जिसका कि हम सामना न कर सकें...

लेकिन पत्नी के सामने ऊपर वाला भी मदद करने में हाथ खड़े कर देता है...


जय पत्नी शक्ति...

26 टिप्‍पणियां:

  1. आम आदमी का मरना भी
    कोई मरना होता है
    इन छोटे मोटे हादसाओं से
    कोई डरना होता है

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  2. खुशदीप जी

    पेट की भुख से जनता कहीं सड़क पर आ गई तो आसार ठीक नहीं होंगे.......

    पर सर मुझे आपके आसार भी ठीक नहीं लग रहे..लगता है घर का खाना अच्छा नहीं लग रहा आपको....भाभीजी भी ब्लाग से उत्तर देने लग गईं तो कैंटिन की फुड प्वाइजनिंग वाले खाने से काम चलाना पड़ेंगा....मैं सोच रहा हुं अगला वीकली ऑफ आपके घर ही बिताउं....

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  3. आम आदमी ...... आम तो मह्न्गा हो गया लेकिन सस्ता रह गया आदमी . और सपनो के सौदगरो से उम्मीद भी क्या करे .
    वैसे एक चमचमाती कार की दरकार है शायद सरकार सुन ले .

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  4. आम आदमी की व्यथा तो खैर...क्या कहें.

    मगर पत्नी शाक्ति..उसकी तो वाकई में जय!! :)

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  5. "ए रे आम आदमी...तू क्यों अपने से इतना मोह करता है...रोटी तुझे मिलेगी नहीं...तुझे तो मरना ही है...भूख से मर या कसाब की गोली से..."

    बहुत खूब!

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  6. लेकिन पत्नी के सामने ऊपर वाला भी मदद करने में हाथ खड़े कर देता है...

    ऐसे में सेल्फ हेल्प सर्विस ही काम आती है।

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  7. सरकार मौन है ...जनता का स्पीकर ऑन है ...
    Right ...

    इसीलिए ज्यादा समय पत्नियों का स्पीकर ऑन रहता है ..
    आखिर मान गए आप भी पत्नी शक्ति को ...:):)

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  8. एक छोटी पोस्ट, लेकिन बहुत असरदार!
    'आम आदमी फीनिक्स है...फिर खड़ा हो जाएगा अपनी राख़ से धूल झाड़ता हुआ...'
    यही तो एक आस है, वह खड़ा तो हर बार हो जाता है। इंतजार तो इस बात का है कि वह कब भस्म होने से इन्कार करता है।
    बधाई!

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  9. बेचारा आम आदमी

    घरवाली वाकई.... भगवान भी बचते हैं, बनाने के लिये।

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  10. मुझे लगता है कि आप अपनी पत्‍नी से जरा भी नहीं डरते। यदि डरते होते तो यहाँ लिखने की हिम्‍मत नहीं करते। आपका व्‍यंग्‍य बड़ा अच्‍छा था। कार्टून भी बेहद सटीक था।

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  11. आम आदमी की व्यथा को रोचक ढंग से प्रस्तुत किया है....

    और पत्नी नामक प्राणी पर तब तक ही लतीफे सुना सकते हैं जब तक वो मौन है....:):)

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  12. रोटी, लिबास और मकानों का मामला हल नहीं हो रहा, चीजों की कीमतें आसमान छू रहीं, जमाखोरी-कालाबाजारी की धूम है तो क्या! पॉजीटिव सोच रखें भाई, मोबाइल-सिम फ्री उपलब्ध हैं, आम आदमी पर ये उपकार कम है क्या?

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  13. असरदार और सत्य को उजागर करता आलेख

    ये सभी लोग बीबियों से इतना क्यॊं डरते है
    अरे बीबी ही तो है कोई आग का गोला थोडे ही है
    वैसे मुझे अनुभव नहीं है, बस जब तक आजादी कायम है
    ये विचार रखूंगा, उसके बाद बीबी जो कहेगी वही करुंगा

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  14. बहुत सुन्दर पोस्ट...

    ए रे आम आदमी...तू क्यों अपने से इतना मोह करता है...रोटी तुझे मिलेगी नहीं...तुझे तो मरना ही है...भूख से मर या कसाब की गोली से...फिर काहे ये नवाबों जैसे नखरे दिखाता है...सिक्योरिटी-सिक्योरिटी चिल्लाता है...खामख्वाह हमसे भी झूठ बुलवाता है...रावणराज में रामराज की बात कराता है...

    खास कर यह तो कविता लगी सुरेंदर वर्मा का, इसे अगर एहसान कुरैशी के मीटर पर पढ़ा जाये तो क्या बात हो ?
    वैसे यह नजरिया भी अच्छा है दिल बहलाने के लिए...

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  15. khushdeep ji

    aam aadmi hai na to aam hi rahega ........roj marega aur roj phir zinda hona uski fitrat hai........jo apne halaton se lad sakta hai wo phir kisi ki bhi parwaah nhi karta phir chahe kasaab ho ya afzal guru.......bahut hi badhiya vyangya.

    ab aap patniyon se jyada panga mat lijiye ........na jaane kiska dimaag phire aur phir hamein world war 3 yahin dekhne ko mil jayee .........hahahahaha

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  16. आप के ब्लॉग को की चर्चा तेताला पर की है देखे
    सादर
    प्रवीण पथिक
    9971969084
    http://tetalaa.blogspot.com/2010/02/blog-post_7641.html

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  17. स्पीकर ऑन है सरकार मौन है....
    सही कहा.
    पत्नी मायेके गईं हैं क्या? तभी आपका स्पीकर भी ऑन है. हा हा

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  18. खुशदीप जी, आपको सूचित करते हुए अत्यंत प्रसन्नता हो रही है कि आपको संवाद सम्मान-नामित श्रेणी के लिए चुना गया है। आपका मेल आई डी उपलब्ध न होने के कारण अभी तक आपको ई प्रमाण पत्र वगैरह नहीं भेजा जा सका है। कृपया मुझे zakirlko@gmail.com पर मेल करने का कष्ट करें, जिससे अग्रेतर कार्यवाही की जा सकें।

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  19. खुशदीप जी आज नाईस चलेगा? चला लो जरा जल्दी मे हूँ आशीर्वाद्

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  20. आम आदमी के दर्द को उभरता हुआ बहुत बढ़िया व्यंग...

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  21. sehgal sahab....wah kya baat likhi..
    janta ka speekar on hai...lekin sarkar ab bhi maun hai...kya chot maari hai...aam aadmi par..

    aur ant me istri k liye jo likha...pure likhe ko twist de diya...

    bahut khoob.

    http://Anamika7577.blogspot.com

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  22. हाय हाय ये महंगाई..
    कांग्रेस है हडजाई.....
    पेट की आग की आंच लगी तो
    उफ़ उफ़ जनता चिल्लाई..
    ६० बरस ना समझे इसको
    अब औकात समझ में आई...
    जय हिंद... जय बुंदेलखंड...

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  23. हम तो फिनिक्स होते हुये भी पत्नी शक्ति के आगे नतमस्तक हैं जी:)
    इस बेहतरीन व्यंग्य के लिये धन्यवाद

    आज nice आपको नहीं मिला क्या?
    एक nice मुझे मिला था, तुरंत उसी गाडी से वापिस भेज दिया है। मेरा मन कर रहा है कि उनको दो-तीन ट्र्क भरकर nice भेज दूं।

    प्रणाम स्वीकार करें

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  24. आपने सही कहा ...आम आदमी तो वसीयत में अपने तथा नेताओं के पुरखों से लिखवा के आया है की...उसे हर हालत में मरना है...चाहे हो भूख से बिलबिला के मरे या फिर कसाब जैसों की गोली से तिलमिला के मरे

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