गुरुवार, 4 फ़रवरी 2010

हम हिंदुस्तानी आतंकवादी क्यों नहीं बन सकते...खुशदीप

कल आतंक पर व्यंग्य पोस्ट किया था...लेकिन फिर एक सवाल भी जेहन में आया कि हिंदुस्तानी आला दर्ज़े के आतंकवादी क्यों नहीं बन सकते...ठीक वैसे ही जैसे अमेरिका आजकल अफगानिस्तान में बैड तालिबान और गुड तालिबान का फर्क दुनिया को बता रहा है...तो मैं कह रहा था कि हम हिंदुस्तानियों में ऐसी कौन सी जन्मजात कमियां या खूबियां हैं जिनके चलते हम कभी आतंकवादी बन ही नहीं सकते...इस पर अंग्रेज़ी में एक लेख हाथ लग गया...उसी का अनुवाद कर पोस्ट कर रहा हूं...

मान लीजिए आतंकवादियों के संगठन में भर्ती के लिए एक विमान हाईजैक करने का मिशन हमें सौंपा जाता है...वो मिशन क्यों फेल हो जाएगा, इसके भी दस बहाने (सॉरी वजह) हैं...

1. हिंदुस्तानी हमेशा लेट पहुंचते हैं...कम से कम चार फ्लाईट मिस करते और डेडलाइन निकल जाती...

2. हम धीरे बात कर ही नहीं सकते, इसलिए दूसरों का ध्यान हम पर रहना लाज़मी है...

3. फ्लाईट पर मुफ्त खाना और ड्रिंक्स ज़्यादा से ज़्यादा झटकने के चक्कर में यही भूल जाते कि हम किस मिशन के लिए विमान पर चढ़े हैं...


4. हमें हाथ नचा-नचा कर बात करने की आदत है, इसलिए हथियार नीचे रखने पड़ते...


5. हम कोई बात पेट में पचा नहीं सकते, इसलिए एक हफ्ता पहले ही मिशन के बारे में हर किसी को बता देते, इस हिदायत के साथ कि किसी को कानों-कान इसका पता नहीं चलना चाहिए...

6. मिशन को हम एक दिन के लिए टाल देंगे क्योंकि उस दिन क्रिकेट मैच होने वाला है...


7. विमान पर बंधकों के साथ फोटो खिंचवाने के चक्कर में हम एक-दूसरे पर गिरते पड़ते दिखेंगे...


8. हमारे बीच तर्क शुरू होगा और विमान के बीच में ही लड़ाई करना शुरू कर देंगे...


9. हम में से हर एक की ख्वाहिश विमान को खुद चलाने की होगी...


10. हम विमान के विंड-स्क्रीन पर देश का झंडा लगा देंगे...


इसलिए भाइयों, और कुछ भी करना आतंकवाद को करियर बनाने की कभी मत सोचना...


स्लॉग ओवर...

मक्खन की तमन्ना... जब वो मरे तो बिल्कुल अपने दादाजी की तरह..

मक्खन के दादा शांति के साथ सोते हुए इस दुनिया को अलविदा कह गए थे...

वो उस कार के यात्रियों की तरह चीख-चिल्ला नहीं रहे थे...

जिस कार को मरते वक्त मक्खन के दादा ड्राइव कर रहे थे...

(डिस्क्लेमर...इस पोस्ट को विशुद्ध हास्य की तरह लीजिए...कृपया इसके कोई गंभीर अर्थ मत ढूंढिएगा...)

28 टिप्‍पणियां:

  1. हम भारतीयों में कितनी खासियत है .. आज आपकी पोस्‍ट से मालूम हुआ .. पर गलत काम करने में सक्षम न होने पर भी चिंता क्‍या करनी .. हमें तो यह जानकर खुश होना चाहिए कि बिना भारतीयों के किसी दूसरे देश में तरक्‍की भी तो नहीं होती !!

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  2. भैया मैं तो कान पकड़ता हूँ इन खूबियों के साथ कभी इस प्रोफेशन में नहीं आऊंगा जी...
    जय हिंद... जय बुंदेलखंड...

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  3. और जमाना जले तो जले... कर भी ऐसेही चलाऊंगा जी... :)
    जय हिंद... जय बुंदेलखंड...

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  4. बडा अच्‍छा लगा कि कहीं तो अपनी खामियॉं काम आयीं । नाहक में लोग परेशान होते रहते हैं ।

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  5. अरे!...ये क्या?...हम भारतीयों के सभी गुणों को एक साथ यहाँ पर पा कर मैं तो धन्य हो गया ....

    हास्य का पुट लिए बढ़िया व्यंग्य

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  6. खुशदीप जी,
    सबसे पहले तो हम पता करेंगे कि कौन सा आतंकवादी बनने में ज्यादा फायदा है....
    और फिर 'रेट' compare करेंगे, फिर 'रेट' पर लम्बा negotiation होगा ....
    मसलन..मरते समय हमें क्या-क्या facility मिलेगी...
    मरने के बाद ....क्या-क्या आफर होगा...
    जाहिर सी बात है...वो इतनी आसानी से हमें कहाँ मंज़ूर होगा ?
    बाकी बातें तो बाद में आएँगी...:):)

    सही जा रहे हैं आप....:):)

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  7. एक कैरियर तो गया पूरे देश के हाथ से...


    मख्खन के दादाजी ने भी गजब कर डाला. :)

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  8. क्या आप दाऊद इब्राहिम को आतंकवादी नही मानते या हिन्दुस्तानी
    वैसे हम चूल्हे पर ही तल्वार चला पाते है .

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  9. वाह खुशदीप जी! मान गये!! मिशन फेल होने के आपने चुन चुन कर वजह बताया है!!!

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  10. इसमें से एक भी गुण नहीं है हममे ...मतलब हम आतंकवादी बन सकते हैं ...एक ट्रेनिंग सेंटर खोल ले ...क्या इरादा है ....? हा हा हा हा

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  11. वैसे मुद्दा काफ़ी गंभीर है, आपने मना किया है कि इसमें कोई गंभीरता न खोजी जाये और विशुद्ध हास्य के जैसा लिया जाये। पर इतनी सारी तारीफ़ें हमारी एक साथ पेट खराब हो गया।

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  12. KYA MAJEDAR LEKH MILA HAI PADNE KO, KARNE KO NAHI DHYAN RAHE.
    LEKING HINDUSTANIYON KI EK KHUBI AUR HAI, VIMAN MAIN CHADTE LADKIO SE DOSTI KARNE KI HOD LAG JAYEGI.

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  13. "हिंदुस्तानी आला दर्ज़े के आतंकवादी क्यों नहीं बन सकते.."

    क्योंकि हमारी ... दम नहीं है !:)

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  14. गोदियाल जी की बात से सहमति, बात आगे बढ़ाते हुए - आतंकवादी इसलिये नहीं बन सकते क्योंकि "मैकाले" ने हमारी दो-दो पीढ़ियों को मानसिक रूप से "खराब" कर दिया है, और तीसरी पीढ़ी को खराब करने की जरूरत ही नहीं बची है, क्योंकि उसे मीडिया खराब कर रहा है… :)

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  15. क्युंकी जब हिंदू अतन्क्वादि होता है तो मीडिया से सेक्यूलर हर कोई जिने नाही देते लेकिन दुसरा कोई होता है तो उसकी जान को कोई खतरा नही होता जैसे कसाब सरकार का दामाद बान जाता है उस्की रक्षा के लिये सरकार टॅक्स भरने वालो पर टॅक्स और बाढाते है नही तो कसब जसो को चिकन नही मिल पाएगा लेकिन जनता की रक्षा करना सरकारका काम नही होता
    शरद पवार जैसे लोगोन को तो हिंदू अतन्कवादि भी आच्छे नही लागते

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  16. .. on a serious note.. our blood is not like that.. we are still human..

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  17. खुश दीप जी यहाँ आप ने कौन सा व्यंग लिखा है मेरी समझ से परे है,,,,,, खुद भारतीय होते हुए भी भारतीयों की इस हद तक बुराई मुझे तो ना गबार गुजरी
    सादर
    प्रवीण पथिक
    9971969084

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  18. (डिस्क्लेमर...इस पोस्ट को विशुद्ध हास्य की तरह लीजिए...कृपया इसके कोई गंभीर अर्थ मत ढूंढिएगा...)
    बिलकुल आपकी बात मान गये । हम तो जो सीरीयस हो कर भी चर्चा करते हुये गाली दे जाता है उसे भी हास्य ही मानते हैं मगर आतंकवादी हम नही हो सकते

    वयंग अच्छा लगा धन्यवाद और स्लाग ओवर तो होता ही है आशीर्वाद

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  19. साहब, कारण और भी हैं -
    हम आधे-पेट खा लेंगे, गुलाम बन कर जी लेंगे पर किसी की मोनोपोली खत्म करके उनकी रोजी-रोटी नहीं छीन सकते। ये धंधा तो उन्हें ही मुबारक जो पहले से ही इस लाईन में है।

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  20. काफी खूबियां बता दी हैं हिदुस्तानियों की...कम से कम आतंकवादी तो नहीं बनेंगे इन खूबियों के साथ ....व्यंग बढ़िया है..:):)

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  21. अहिंसा परमो धर्म:
    बापू भी तो सीख दे गये थे कि जब कोई एक गाल पर चाँटा मारे तो दूसरा गाल आगे कर देना चाहिए तो फिर ऎसे विचार..राम...राम...राम:)

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  22. सही कहा आपने हिन्दुस्तानी यहाँ भी फिट नही हो रहे हैं...पता नही क्या करेंगे..

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  23. हम लोग पैदाईशी फेलियर हैं...

    जय हिंद...

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  24. हमने तो बिलकुल भी गम्भीरता से नही लिया !!

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  25. मेरे मिज़ाज की पोस्ट तैयार की आपने ।
    बेटा सदा खुश रहो ।

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