शनिवार, 19 दिसंबर 2009

ब्लॉगिंग का फीलगुड...खुशदीप

मुझे महसूस हो रहा है...शायद आपको भी हो रहा हो...न जाने क्यों मुझे लग रहा आने वाला साल हिंदी ब्ल़ॉगिंग के लिए कई खुशियां लेकर आने वाला है...इसकी सुगबुगाहट शुरू भी हो चुकी है...मुझे ब्ल़़ॉगिंग में आए चार महीने हो चुके हैं...मैं नोट कर रहा हूं, चार महीने पहले जो स्थिति थी, उसमें और आज में काफ़ी फर्क आ चुका है...

ब्लॉगिंग से कमाई को लेकर बहुत कुछ लिखा जाता रहा है...बेशक हिंदी के लिए एडसेंस अब भी दूर की कौड़ी बना हुआ है...लेकिन जिस तरह गूगल बाबा हिंदी में स्तरीय लेखन को बढ़ावा देने के लिए प्रतियोगिता करा रहा है...'है बातों में दम?'...वो संकेत देता है कि आज नहीं तो कल हिंदी को भी एड मिलना शुरू हो जाएंगे...ज्यादा दिन तक हिंदी को नज़रअंदाज नहीं किया जा सकता...ऐसी भी खबर है कि गूगल अभी एड का स्टॉक जमा कर रहा है...जिससे हिंदी में एड शुरू करने पर निर्बाध रूप से उन्हें जारी किया जाता रहे...वैसे इस मुद्दे पर जी के अवधिया जी और बी एस पाबला जी की पैनी नज़र है...वो वक्त-वक्त पर एडसेंस की हर हलचल से हमें अवगत भी कराते रहते हैं...

जहां तक मेरा सवाल है मेरे ब्लॉग पर एड तो एक भी नहीं है लेकिन मैं पिछले चार दिन से ढाई मिनट एड देखकर बीस रुपये रोज कमा रहा हूं...अभी तक सौ रुपये जमा हो चुके हैं...और ये मुमकिन हुआ है कल्पतरू वाले विवेक रस्तौगी भाई की बदौलत...उन्होंने ही अपनी एक पोस्ट में लिंक दिया था...चलिए ऊंट के मुंह में जीरा ही सही...खाता तो खुला...बड़ा आसान काम है...आप सब भी इससे वंचित न रहे, इसके लिए यहां मैं भी एड देखकर कमाई करने वाला लिंक दे रहा हूं...

कल संजीव तिवारी भाई ने भी एक अच्छी खबर दी थी कि रायपुर में एक सरकारी संस्थान ने नियमित रूप से ब्लॉग लिखवाने के लिए हिंदी ब्लॉगर की सेवाएं लेना शुरू कर दिया है...ये बड़ी अच्छी खबर है...ये सब आने वाले दिनों में हिंदी ब्लॉगिंग को स्वावलंबन की दिशा में ले जाने की उम्मीद जगाता है...खैर उम्मीद पर ही दुनिया कायम है...

ये तो रही ब्लॉगिंग के अर्थशास्त्र की बातें...आपने नोट किया हो इससे भी ज़्यादा सुखद और अच्छा पिछले कुछ महीनों में ब्लॉगिंग के साथ हुआ है...मैंने जब ब्लॉग लिखना शुरू किया था तो देखता था-सबसे ज़्यादा पसंद वाले कॉलम में ऊपर की पांच छह पोस्ट सिर्फ धर्म को लेकर एक-दूसरे पर निशाना साधने वाली ही होती थीं...या फिर किसी पोस्ट में किसी ब्ल़ॉगर का नाम लेकर ही उसे ललकारा जाता रहता था...ये सब बिल्कुल बंद तो नहीं हुआ है, पहले से कम ज़रूर हो गया है...अब अलग-अलग मुद्दों पर जमकर लिखा जा रहा है...ये बड़ा सकारात्मक बदलाव है...हमें अपने ब्लॉग्स के लिए पाठक तभी ज़्यादा मिलेंगे जब उन्हें हमारे लिखे में विभिन्नता और गुणवत्ता मिलेगी...

एक और खुशगवार हवा का झोंका छत्तीसगढ़ से आया है...ये सच है कि ब्लॉगिंग को लेकर जितनी जागरूकता छत्तीसगढ़ में है, उतनी शायद किसी और राज्य में नहीं है...छत्तीसगढ़ के ब्लॉगर भाइयों ने एक मंच बनाकर अच्छी शुरुआत की है...कंट्रोल्ड डिमॉलिशन के तहत लोकाचार और ब्लॉगिंग के हित में एक के बाद एक सीरियल ब्लॉस्ट किए जा रहे हैं...इस ब्रिगेड से भी यही खबरें मिल रही है कि हिंदी ब्लॉगिंग को एक साथ बहुत कुछ अच्छा सुनने को मिलने वाला है....मेरा छत्तीसगढ़ के ब्लॉगर भाइयों से एक ही अनुरोध है कि सबको साथ लेकर चलें..

एक और निवेदन करना चाहता हूं कि ब्लॉगिंग में ऐसी मौज से किसी को परहेज नहीं होना चाहिए जो किसी दूसरे का दिल न दुखाती हो...सेंस ऑफ ह्यूमर सबसे बड़ी नेमत है...वरना गम और जद्दोजहद तो वैसे ही ज़िंदगी में भरे रहते हैं...किसी को रूलाना बहुत आसान होता है और किसी के चेहरे पर छोटी सी मुस्कान लाना बहुत मुश्किल...इसलिए अगर किसी पर आप चुटकी लो तो आपमें इतना माद्दा भी होना चाहिए कि दूसरों की अपने पर चुटकी को भी स्पोर्ट्समैनशिप की तरह ही लें...ब्लॉगिंग में भी गुटबाज़ी होने लगी तो फिर इसमें और राजनीति में फर्क ही क्या रह जाएगा...मन में विद्वेष या बदले की भावना क्या कहर ढहा सकती है, ये तो हम राजनीति में देखते ही रहते हैं...हम सब ब्लॉगर्स को इस गाने को अपना सूत्रवाक्य बना लेना चाहिए...साथी हाथ बढ़ाना, एक अकेला थक जाएगा, मिलकर हाथ बढ़ाना...

ब्लॉगिंग के फीलगुड पर पोस्ट है, इसलिए आज स्लॉग ओवर नहीं ब्लॉग ओवर-


ब्लॉग ओवर

एक सयाने की जिन्न से दोस्ती थी...एक बार जिन्न कुछ दिन तक सयाने से मिलने नहीं आया...सयाने को फिक्र हो गई...उसने किसी तरह जतन कर जिन्न को बुलाया...जिन्न आया तो लेकिन बदहवास हालत में...चेहरे से हवाइयां उड़ रही थीं...इस तरह जिस तरह किसी टार्चर रूम से बड़ी मुश्किल से निकल कर आया हो...सयाने ने पूछा...क्या हुआ जिन्न भाई, तुम दुनिया के होश उड़ाते हो तुम्हारी ये हालत किसने बना दी...जिन्न बोला....क्या बताऊं सयाने भाई...इस बार मुझे खुद ही मुझसे भी बड़ा जिन्न चिमड़ गया था...बड़ी मुश्किल से उसकी सौ-डेढ़ सौ पोस्ट पढ़ने के बाद जान छुड़ाकर आया हूं...बस डर यही है कि वो ब्लॉगर जिन्न और ताजा पोस्ट लेकर पीछे-पीछे यहां भी न आ धमके...

27 टिप्‍पणियां:

  1. "न जाने क्यों मुझे लग रहा आने वाला साल हिंदी ब्ल़ॉगिंग के लिए कई खुशियां लेकर आने वाला है"

    आप को बिल्कुल सही लग रहा है खुशदीप जी! गूगल आखिर व्यवसायी है और उसे भारत से भारी बिजनेस की उम्मीद है। इसीलिये वह हिन्दी को आगे बढ़ाने के लिये सतत् प्रयास कर रहा है।

    'है बातों में दम?' भी हिन्दी में अच्छे कंटैंट लानी की ही एक कड़ी है। नई हो या पुरानी, अच्छी जानकारी चाहिये पाठकों को। हिन्दी में अच्छे कंटैंट लाना ही उद्देश्य है गूगल की इस प्रतियोगिता का। यदि हिन्दी को नेट में आगे बढ़ाना है और हिन्दी से कमाई करनी है तो हम सभी को इस प्रतियोगिता में भाग लेकर गूगल को सहयोग करना ही चाहिये। मैंने तो अपने लेख डालने हफ्ता भर पहले से ही शुरू कर दिया है इस प्रतियोगिता में जिन्हें आप यहाँ क्लिक करके देख सकते हैं।

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  2. फल की चिंता किये बगैर सब अपना अपना कर्त्तव्य निभाते चले..

    इसी में सफलता और कल्याण निहित है.

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  3. ब्‍लागिंग का भविष्‍य उज्‍जवल हो इन्‍हीं उम्‍मीदों के साथ, शुभकामनायें ।

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  4. आज हिन्दी न्यूज वेबसाईटों से ज्यादा ब्लॉग पढ़े जा रहे हैं। हर तरफ चर्चा है ब्लॉगिंग की। हर समाचार ब्लॉग को जगह दे रहा है। कुछ तो दम ब्लॉगिंग में। बस जो लिखें सार्थक लिखें, मेरी तरह बक्वास न लिखें।
    कैमरॉन की हसीं दुनिया 'अवतार'

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  5. ........"No matter how great our words may be but we will always be judged by our actions only."........
    ..... very rightly said by a scholar.

    Someone else has said......

    "When you want someone to understand your feelings,
    Remember a person can`t know something you have not expressed!
    Unsaid words become unheard"

    So, Khushdeep ji keep up the good work and I pray to God to bless you with more positive energy and thinking power so that we can read your posts for many more years to come.

    Pesh hai Aapki BLOGGING MAIN SLOGGING........

    3 Men are arguing about "When life begins.."
    1st: At the time of conception
    2nd: At the time of birth
    3rd: When wife and children go for vacation!

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  6. blogging ko ham aap mil kar hi to sahi rah le jayenge...

    jai hind..

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  7. Khusdeep bhai- ham sbke sath-sath hi chal rahe hain, aur hame to blog rajniti se koson door hain, bas sabhi mitron ka sahayog aur sneh milta rahe, feel good hota rahega, aane vala sal avshy hi blogging ke itihas me apna sthan banayega. happy blogging. post ke liye aabhar

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  8. khusdeep bhai-Agar kahin jinn bikte hon to mujhe kharidana hai, kahin mile to batayen, usse blog likhvaye karunga,ha ha ha,

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  9. ब्लॉग जगत के लिए पहली बार कोई उम्मीद भरी किरण दिखाई आपने ...
    ये भी ठीक ही है कि चुटकियाँ लेने वाले को खुद का मजाक बनाये जाने के लिए भी तैयार रहना चाहिए ...
    भागो ...जिन्न आया ...भागो ....!!

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  10. लो ये तो पुरानी खबर है खुशदीप भाई ,
    ताजी सुनो , कल ही मेरा नेट कनेक्शन वाला मुझे पचास रुपए देकर गया है ..कारण पूछा तो कहने लगा ....सर आपको दिखा दिखा के और झूठ ्मूठ ये कह के कि झाजी तो नेट से खूब नोट कमा रहे हैं मैंने और भी कई क्लाएंट फ़ंसा लिए हैं ...इसलिए आपको भी उसका क्रेडिट जाता है ..लिजीये पचास रुपए

    सोच रहा हूं इस पैसे से नए साल के मौके पर एक ग्रांड पार्टी हो जाए ..सभी ब्लोग्गर्स के साथ ...सबके लिए मिठाई कपडे ...और एक एक लैपटौप ...क्या कहते हैं । यदि गूगल बाबा ने सुन लिया तो मारे इन्फ़िरियौरिटी कंप्लेक्स के मर ही न जाएं ॥

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  11. यह फीलगुड पोस्ट तो काफी गुड फील करा गयी....आपसे बस एक महीने ही पीछे हूँ...मुझे ३ महीने हो गए,ब्लोगिंग शुरू किये हुए....अभी तो पैसे कमाने की तरफ ध्यान ही नहीं गया...इतना पढने लिखने का अवसर मिल रहा है...मैं तो उसी में मुदित हूँ.....हाँ कालान्तर में शायद पैसे कमाने की भी सोचूं....(विवेक जी की लिंक सेव कर ली है)...संजीव तिवारी की सूचना भी बहुत अच्छी है

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  12. हिंदी ब्लोगिंग का भविष्य उज्जवल है , खुशदीप भाई। इसमें कोई शक नहीं। रही बात कमाने की तो ब्लोगिंग तो अपनी क्रियेटिव अर्ज़ को संतुष्ट करने के लिए की जानी चाहिए। हाँ साथ में कमाई भी होने लगे तो कई लोगों को अच्छा लगेगा।

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  13. बहुत सुंदर समाचार जी, लगता है अब जल्दी ही भारत् से गरीबी हट जायेगी :)

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  14. फीलिंग तो गुड की होने लगी...निश्चित ही आना वाला समय बेहतर होगा, तय है.

    ब्लॉग ओवर भी मस्त!! :)

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  15. खुशदीप भाई इन साईडो से बच कर रहे, यहां इन्होकि एक शर्त होती है कि आप का बिल कम से कम ५०० € या १०००० रुपये या कुछ ऎसा ही होता है तभी आप के एकांउट मे पेसे भेजे गे.... ओर जब आप उस शर्त के मुताबिक राशि बना लेते है तो आप को फ़िर भी कुछ नही मिलता, यानि यह एक फ़रेब है, इस लिये साबधान कर रहा हुं

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  16. यह सब हिन्दी ब्लोगिंग के बढते चरण का ही तो प्रतिफ़ल है. फिर भी राज जी के सलाह को ध्यान मे रखना होगा.

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  17. मैं तो समझता हूँ कि हम अपना रास्ता चुनें और उस पर चल पड़ें। ब्लागिंग हिन्दी के लिए नया माध्यम है। इसे अभी बहुत बहुत विस्तार पाना है। जमाना विज्ञापन का है। उन्हें आना पड़ेगा और भी कई रास्ते खुलेंगे।
    हम तो आप के ह्यूमर के कायल हैं।
    और आप का जिन्न तो खूब देखा है हमने।

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  18. नॉनसेंस सहित इतने सारे सेंस पहले से ही थे, यह एडसेंस क्या और कौन सी बला आन टपकी ?
    तुम तो खैर एप्रूवल क्लॉज़ लगाये पड़े हो पर यहाँ हम अच्छे खासे तो F5 दबा दबा कर टिप्पणी को ऊँगलियों पर गिनते गिनते सो जाया करते थे ।
    पोस्ट पर एक टिप्पणी के सवाली, एडसेंस की सोचते हों या नहीं, आप ख़्वामख़ाह याद दिला रहे हो ।

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  19. खुशदीप जीेद पर तो हम भी रोज चटका लगाते हैं साथ मे क्विज़ भी वहीं खेलते हैं और नियूज़ भी देखते हैंउसके भी पवाईँट होते हैं हमारे तो 20 से अधिक रुपये बन जाते हैं । मगर आगे देखो कई बार वो रोज़ आपके रुपये ऎड नहीं करते ये देखना पडेगा।ांअपकी पोस्ट आशाओं से भरपूर है । तब तो डटे रहें कभी तो अपने भी दिन फिरेंगे।

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  20. " जितनी जागरूकता छत्तीसगढ़ में है, उतनी शायद किसी और राज्य में नहीं है..."

    क्यों लपेटे में आते हो, जबलपुरी भाई देख रहे हैं :)

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  21. मेरे ख्याल से ब्लॉगिंग अपने विचारों को अभिव्यक्त करने का ज़रिया है...इसके जरिए हमें एक नई पहचान मिल रही है...नए दोस्त मिल रहे हैँ...नए लेखकों का उदय हो रहे हैँ लेकिन इसके साथ-साथ अगर कमाई भी होने लगे तो सोने पे सुहागा वाली बात हो जाएगी...पैसा तो हर किसी को चाहिए.. वैसे भी भूखे पेट ज़्यादा दिन तक भजन नहीं किया जा सकता

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  22. रोचक पोस्ट
    चलिए.. गूगल की यह अच्छी शुरूवात है मगर लगता है एक लैपटाप देकर अनगिनत अमूल्य लेख बटोर लेंगे! यहाँ प्रकाशित हो जाने के बाद इन लेखों का बाजार भाव एकदम से गिर नहीं जाएगा यदि पुरस्कृत नहीं हुई तो!!
    २० रूपए कमाने वाली बात भी गले नहीं उतर रही मन संशकित है विग्यापन देखने के २० रूपए कहीं मूरख तो नहीं बना रहा है! पहले आप पैसा कमा लो, नकद मिल जाए तो हम भी कमाएंगे।
    पुराने ब्लागर आगे-आगे चलें... हम तो अभी इस क्षेत्र में बच्चे हैं।
    धन्यवाद।

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  23. धन्‍यवाद खुशदीप भाई बहुत सुन्‍दर प्रस्‍तुति और टिप्‍पणियों में इस पर विमर्श भी हो गया.

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  24. बहुत खूब लिखा है आपने:

    "किसी को रूलाना बहुत आसान होता है और किसी के चेहरे पर छोटी सी मुस्कान लाना बहुत मुश्किल..."

    किसी के चेहरे पर छोटी सी मुस्कान दे कर बहुत आत्मसंतुषटी होती है।

    स्लॉग ओवर नहीं ब्लॉग ओवर का जिन्न भी खूब रहा......

    जय हिंद

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  25. मस्त ज़िंदादिल रहो प्यारे।
    आमीन

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