शुक्रवार, 18 दिसंबर 2009

अपने तो अपने होते हैं...खुशदीप

ब्लॉगिंग का फीलगुड पोस्ट पाइपलाइन में पड़ी हैं...एक दिन पहले ब्रॉडबैंड महाराज की वजह से उस पोस्ट का बैंड बज गया था...सोच रहा हूं शनिवार को छुट्टी है...इसलिेए कल देर रात तक आराम से लिखूंगा...फिर आज क्या...तो वहीं अपना थ्री इन वन फॉर्मूला...यानि स्लॉग चिंतन भी है, स्लॉग गीत भी और स्लॉग ओवर भी...स्लॉग ओवर में आज अपने ललित शर्मा भाई भी आपसे मुलाकात करेंगे...


स्लॉग चिंतन

अपनी ज़िंदगी में जो अपने हैं उनके लिए किसी भी तरह कुछ वक्त निकालिए...


क्योंकि एक दिन ऐसा भी आएगा जब आपके पास वक्त होगा लेकिन शायद अपने साथ नहीं होंगे....






स्लॉग गीत

ब्लॉगर बिरादरी में सब अपने हैं...यहां ज़रा  कोई परेशानी ज़ाहिर करता है...हर तरफ़ से मदद के हाथ आगे आ जाते हैं...ठीक ही कहा है...अपने तो अपने होते हैं...सुनिए और देखिए अपने फिल्म का ही गीत...

बाकी सब सपने होते हैं
अपने तो अपने होते हैं
अपने तो अपने होते हैं

मुझसे तेरा मोह ना छूटे, दिल ने बनाये कितने बहाने
दूजा कोई क्या पहचाने, जो तन लागे सो तन जाने
बीते गुज़रे लम्हों की सारी बातें तड़पाती हैं
दिल की सुर्ख दीवारों पे बस यादें ही रह जाती हैं
बाकी सब सपने होते हैं
अपने तो अपने होते हैं
अपने तो अपने होते हैं
चना वे जा के जल्दी चले आना
जानेवाले तैनू बिनतिया, गलियां पुकारेंगी
जानेवाले तैनू बागां विच कलियां पुकारेंगी
तेरे संग लाड लडावां वे, तेरे संग लाड लडावां
तेरे संग प्यार निभावा वे, तेरे संग प्यार निभावा
तेरे संग लाड लडावां वे. तेरे संग लाड लडावां
तेरे संग प्यार निभावा वे. तेरे संग प्यार निभावा

तुझसे बयां चाहे मैने न किया है
पर एक लम्हा न तेरे बिन जिया है
जाना मैंने जाना ये दिल आजमाने से
कभी न छुपे रबा प्यार छिपाने से
तेरे संग लाड लडावां वे, तेरे संग लाड लडावां
तेरे संग प्यार निभावा वे, तेरे संग प्यार निभावा
तेरे संग लाड लडावां वे. तेरे संग लाड लडावां
तेरे संग प्यार निभावा वे. तेरे संग प्यार निभावा
बीते गुज़रे लम्हों की सारी बातें तड़पाती हैं
दिल की सुर्ख दीवारों पे बस यादें ही रह जाती हैं
बाकी सब सपने होते हैं
अपने तो अपने होते हैं
अपने तो अपने होते हैं


तेरी मेरी राहों में चाहे दूरिया हैं
इन फ़ासलों में भी नज़दीकियां हैं
सारी रंजिशों को तू पल में मिटा ले
आजा आ भी जा मुझको गले से लगा ले
तेरे संग लाड लडावां वे, तेरे संग लाड लडावां
तेरे संग प्यार निभावा वे, तेरे संग प्यार निभावा
तेरे संग लाड लडावां वे, तेरे संग लाड लडावां
तेरे संग प्यार निभावा वे, तेरे संग प्यार निभावा
बीते गुज़रे लम्हों की सारी बातें तड़पाती हैं
दिल की सुर्ख दीवारों पे बस यादें ही रह जाती हैं
बाकी सब सपने होते हैं
अपने तो अपने होते हैं
अपने तो अपने होते हैं
अपने तो अपने होते हैं
अपने तो अपने होते हैं

फिल्म- अपने (2007), गीतकार- समीर, गायक- सोनू निगम, जयेश गांधी, जसपिंदर नरूला, संगीतकार-हिमेश रेशमिया


स्लॉग ओवर

एक बार ललित शर्मा भाई मॉर्निंग वॉक पर निकले...किसी सिरफिरे ने सड़क पर केले का छिलका फेंक रखा था...ललित भाई को छिलका दिखा नहीं और जा फिसले...पार्क के पास ही एक गधे महाराज घास पर हाथ साफ कर रहे थे...ललित भाई का बैलेंस बना नहीं और वो गधे के पैरों के पास जा गिरे...वहीं एक सुंदर सी मैडम खड़ी थी...मैडम से हंसी रोकी नहीं गई और चुटकी लेते हुए ललित भाई से बोली...क्यों सुबह-सुबह बड़े भाई के पैर छू रहे हो क्या...ललित भाई भी ठहरे ललित भाई...कपड़े झाड़ते हुए उठ कर मैडम से बड़े अदब से बोले...जी भाभी जी...

25 टिप्‍पणियां:

  1. बिल्कुल ठीक कहा आपने......

    बाकी सब सपने होते हैं, अपने तो अपने होते हैं!

    "अपनी ज़िंदगी में जो अपने हैं उनके लिए किसी भी तरह कुछ वक्त निकालिए..."

    क्यों कि जिन्दगी के सफ़र में गुजर जाते हैं जो मुकाम वह फ़िर नहीं आते....

    और उसके बाद तो फ़िर......

    "क्योंकि एक दिन ऐसा भी आएगा जब आपके पास वक्त होगा लेकिन शायद अपने साथ नहीं होंगे...."

    आभार!

    जय हिंद!

    उत्तर देंहटाएं
  2. ललित भाई से कोई ऐसे ही पंगा नहीं ले सकता..बहुत हाजिर जबाब हैं.. :)


    ज्ञान और गीत दोनों मस्त!!

    उत्तर देंहटाएं
  3. गजब का स्लाग ओवर .खुशी मनाएं या सहानुभूति ...भाभी के भाई साहब के साथ ? बताएगें ?

    उत्तर देंहटाएं
  4. बेहतरीन
    बाकी सब सपने होते हैं
    अपने तो अपने होते हैं
    --
    सपने भी तो अपने होते हैं
    --
    भाभी जी को प्रणाम

    उत्तर देंहटाएं
  5. स्लॉग चिंतन, स्लॉग गीत औत स्लॉग फोटो --तीनो शानदार।
    और ललित जी का तो ज़वाब नहीं।

    उत्तर देंहटाएं
  6. स्लाग चिंतन और गीत जोरदार रहा.

    अब स्लाग ओवर वाला काम तो ललित भाई रोज शाम को मुरारी पारीक के साथ खेलते हैं जिनका प्रिय पात्र ही गधा है.:)

    वैसे ललित भाई हरयाणवी है और हरयाणवियों का हाजिर जवाबी का गुण तो आप जानते ही हो.

    रामराम.

    उत्तर देंहटाएं
  7. "क्योंकि एक दिन ऐसा भी आएगा जब आपके पास वक्त होगा लेकिन शायद अपने साथ नहीं होंगे...."

    जीवन के सफर में राही
    मिलते हैं बिछड़ जाने को ...

    उत्तर देंहटाएं
  8. वाह बडी चिंतनमय पोस्ट है ...गीत तो हिमेश भाई की आवाज में चला कर सुना है ....और बोलों की प्रैक्टिस आपके नोट्स के साथ कर ली ...। मैडम को सही मजा मिल गया ....केला खाके छिलका फ़ेंका था ...इतना ईनाम तो मिलना ही चाहिये था ...गधे की वाईफ़ होने का ...गर्दभांग्नी....स्लौग ओवर सुपर हिट रहा .....और फ़िर उसे तो बुरा लगना ही था ..आखिर अपने तो अपने होते हैं ...ललित जी को कितनी बार कहा है ..कभी कभी छिलकों को भी देख लिया करें ...हमेशा गधों की मैडम ......?????

    उत्तर देंहटाएं
  9. .
    .
    .
    "अपनी ज़िंदगी में जो अपने हैं उनके लिए किसी भी तरह कुछ वक्त निकालिए...
    क्योंकि एक दिन ऐसा भी आएगा जब आपके पास वक्त होगा लेकिन शायद अपने साथ नहीं होंगे...."

    सत्य है बंधुवर...

    स्लॉग ओवर में तो किल्ली उड़ गई 'सुंदर सी मैडम' की...

    उत्तर देंहटाएं
  10. अपनी ज़िंदगी में जो अपने हैं उनके लिए किसी भी तरह कुछ वक्त निकालिए...


    क्योंकि एक दिन ऐसा भी आएगा जब आपके पास वक्त होगा लेकिन शायद अपने साथ नहीं होंगे....

    भैया... यह बात दिल को छू गई.... बहुत गहरी बात कही आपने....



    गीत बहुत सुंदर लगा.... और स्लोग ओवर के तो कहने ही क्या.....

    बेचारा गधा... बहुत भोला प्राणी है.... कभी देखिएगा ध्यान से कितना भोला लगता है..... ही ही ही ही ...

    जय हिंद..

    उत्तर देंहटाएं
  11. Sundar prastuti ke liye dhanyavaad.
    nisendeh apne to apne hi hote hai.... aur Slog bhi bahut achha hai ....
    Shubhmanayen.

    उत्तर देंहटाएं
  12. बाकी सब सपने होते हैं, अपने तो अपने होते हैं!
    बहुत खूब !

    उत्तर देंहटाएं
  13. बिलकुल सच कहा आपने।ापने तो अपने होते हैं ।ागर समय रहते हम एक दूसरे का दुख सुख नहीं बाँट सकते तो बाद मे कई बार पछताना भी पडता है
    बीते गुज़रे लम्हों की सारी बातें तड़पाती हैं
    दिल की सुर्ख दीवारों पे बस यादें ही रह जाती हैं
    और एक पंजबी कविता से
    माँ दे कोल ताँ बहुत समा सी दुख ते सुख फरोलन दा
    पर मेरे पास ही समा नहीं सी उस दी गल नूँ गौलण दा
    कई बार हम देखते हैं कि हम किसी से बहुत बातें कर सकते थे दुख सुख कह सुन सकते थे मगर अपनी व्यस्तताओं का नकाब ओढ लेने से कुछ अच्छी पलों को खो बैठते हैं फिर उन के जाने के बाद पता चलता है क्8इ हम ने क्या खो दिया।
    आज की पोस्ट और गीत दिल को छू गये। ललित भाई भी बडे हज़िर जवाब हैं। शुभकामनायें

    उत्तर देंहटाएं
  14. बहुत सही बात कही है आपने....
    "अपनी ज़िंदगी में जो अपने हैं उनके लिए किसी भी तरह कुछ वक्त निकालिए.."
    अच्छी पोस्ट है बधाई।

    उत्तर देंहटाएं
  15. सुबह सुबह ये सुविचार बहुत ही अच्छा लगा....अपनों के लिए वक़्त नहीं होता...और जब वक़्त होता है तब अपने कहीं दूर होते हैं...फिर भी अपने अपने ही होते हैं....ख़ूबसूरत गीत और मजेदार स्लोग ओवर... 3 in 1 :)

    उत्तर देंहटाएं
  16. गर्दभांग्नी !!??

    शर्मा जी को सलाह मेरी भी है कि कभी कभी छिलकों को भी देख लिया करें ...हमेशा गधों की मैडम को ......

    उत्तर देंहटाएं
  17. अपने कभी सपने भी हो जाते हैं जब वो हम से दूर रहते हैं :(

    उत्तर देंहटाएं
  18. Bhabhi ji! HA HA HA HA HA HA HA HA HA HA HA HA HA HA HA HA HA HA HA HA HA HA HA HA HA HA HA HA HA HA HA HA HA HA HA HA HA HA HA HA HA HAHA HA HA HA HA HA HA JORDAR

    उत्तर देंहटाएं
  19. आपने बहुत ही सही कहा कि हमें किसी भी तरह से अपनों के लिए वक्त निकालना चाहिए क्योंकि कुछ समय बाद हो सकता है कि हमारे पास काफी समय हो लेकिन तब शायद अपने साथ नहीं होंगे...

    स्लॉग ओवर तो आपका बढिया होता ही है..

    उत्तर देंहटाएं
  20. आपको नए साल (हिजरी 1431) की मुबारकबाद !!!

    सलीम ख़ान

    उत्तर देंहटाएं
  21. खुश दीप जी नमस्कार, आप का चिंतन आज बहुत अच्छा लगा, ओर ललित भाई भी तो कम नही, मजा आ गया, आप का धन्यवाद

    उत्तर देंहटाएं
  22. खुशदीप जी,
    देखिये न...मुझे पता था आप ऐसा ही कुछ लिखने वाले हैं...तभी तो मैंने भी ये कुछ दिन अपने घर को सौंप दिया है...बस बच्चे और मैं खूब मस्ती कर रहे हैं....कल USA निकल जाउंगी....और शाम तक वापिस....आप बुरा मत मानियेगा...थोड़ी सी irregular हूँ कमेन्ट करने में....
    आपका आलेख 'मन को छू गया' ..वैसे इस वाक्य पर महफूज़ मियाँ का right है मगर मैं use कर रही हूँ....हे हे हे हे हे ...
    और ये ललित जी ने पहचाना नहीं उस प्राणी को....मैं हैरान हूँ...चौपाया है तो क्या हुआ...नामतो मक्खन ही है न.....हा हा हा हा ..
    बुरा न मनो स्लोग ओवर है.....हा हा हा हा ..

    उत्तर देंहटाएं