सोमवार, 30 नवंबर 2009

जीते जी कंगाल, मर कर मालामाल...खुशदीप

आज बात करता हूं एम जे की...एम जे यानि माइकल जैक्सन की...माइकल जैक्सन को दुनिया को अलविदा कहे पांच महीने बीत चुके हैं...सब जानते हैं कि माइकल जैक्सन ने ड्रग्स ले लेकर जीते जी ही अपनी हालत कंकाल वाली बना ली थी...ऊपर से कर्ज इतना चढ़ गया था कि माइकल जैक्सन को वर्ल्ड टूर के लिए दिन-रात मेहनत करनी पड़ रही थी...काम के तनाव और कर्ज की फिक्र ने ही माइकल जैक्सन की जान ले ली...


29 अगस्त 1958-25 जून 2009

अब इसे विडम्बना ही कहेंगे कि माइकल जिंदा रहने पर जिस कर्ज को चुकाने के लिए फ़िक्र में घुले जा रहे थे, वो उनके मरने के बाद चुटकियों में ही उड़नछू हो गया...मौत के बाद देनदारों से पीछा छुड़ाने में माइकल जैक्सन को सिर्फ पांच महीने लगे... डेली स्टार अखबार के मुताबिक एम जे का जैक्सन इस्टेट जून से लेकर अब तक 50 करोड़ डॉलर से ज़्यादा की कमाई कर चुका है...बॉक्स आफिस पर माइकल जैक्सन पर बनी दिस इज़ हिट के रिकॉर्डतोड़ प्रदर्शन और म्यूजिक सीडी की बढ़ती मांग ने जैक्सन इस्टेट को मालामाल कर दिया है...

इसके अलावा माइकल जैक्सन की निजी वस्तुओं और स्मारिका की नीलामी से भी जैक्सन इस्टेट की तिजोरियां भरती जा रही हैं...माइकल जैक्सन के इस्टेट के पास बेशक कर्ज चुकाने से कहीं ज़्यादा पैसे इकट्ठे हो चुके हैं...लेकिन इसके प्रबंधक जॉन ब्रांका और जॉन मैक्कलेन अपने खिलाफ दर्ज छह मुकदमे नहीं निपटा सके हैं...इनमें न्यूजर्सी स्थित ऑलगुड एंटरटेन्मेंट कंपनी का केस भी शामिल है...इस कंपनी ने माइकल जैक्सन पर टेक्सस में अपने भाइयों से टीवी कंसर्ट का वादा तोड़ने का आरोप लगाया था...


माइकल जैक्सन को श्रद्धांजलि देते हुए उनकी बेटी पेरिस जैक्सन ने कहा था- मेरे डैडी दुनिया के सबसे अच्छे डैडी थे...

ज़ाहिर है माइकल जैक्सन के रिश्तेदार और इस्टेट के प्रबंधक ज़्यादा से ज़्यादा माल अपनी अंटी में करना चाहते हैं...इस लिए कानूनी दांव-पेंचों की लड़ाई लंबी खिंचे तो कोई बड़ी बात नहीं...लेकिन मेरे जेहन में यहां एक ही सवाल आ रहा है कि जीते जी किसी शख्स को मुसीबतों से छुटकारा दिलाने कोई नहीं आता...मरने के बाद ही उसकी (या कहिए घर वालों की)  किस्मत क्यों खुल जाती है...


स्लॉग ओवर

माइकल जैक्सन के जीवित होने पर एक किस्सा बड़ा मशहूर था...



बच्चों को दो चीज़ो से बचाना चाहिए...
 
प्लास्टिक और प्लास्टिक के बने माइकल जैक्सन से....

16 टिप्‍पणियां:

  1. खुशदीप जी ये(माईकल जैक्सन) तो हाथी हो गया.........
    स्लागओवर जोरदार

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  2. पुरानी कहावत हैः

    जीयत ब्रह्म को कोई न पूजै मुर्दा के मेहमानी!

    वैसे जानकारी के लिये यह बता दूँ कि हमारे देश के प्रसिद्ध उपन्यासकार तथा कथासम्राट प्रेमचंद (धनपतराय) जीवनपर्यन्त दीनता से ग्रसित रहे किन्तु उनके मरणोपरान्त उनकी सन्तान उनकी रचनाओं का प्रकाशन करके धनकुबेर बन गये।

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  3. सच कह रहे हैं आप...... मरने के बाद आदमी कि वैलैऊ बढ़ जाती है......


    जय हिंद....

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  4. इतिहास गवाह है कि मरने के बाद सब कुछ सवया हो जाता है.:) यहां तक कि गाली देने वाले भी श्र्द्धांजली देते हैं. उसी परिपेक्ष मे धन को भी आंका जाना चाहिये.

    रामराम.

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  5. जिंदा हाथी एक लाख का... मारा हाथी सवा लाख का!!!!!



    लेकिन यह कहावत बस अचानक याद आई... उसने बड़े दुःख के दिन भी देखते थे... आहा ! जिंदगी का एक विशेषांक माइकल पर आया था... बहुत कुछ देखा था उसने... इतने पैसे में दिमाग ख़राब हो जाये तो आश्चर्य नहीं ...

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  6. जिन्दा हाथी लाख का तो मरने के बाद सवा लाख का.

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  7. चलिए...कुछ तसल्ली हुई....हम बड़े परेशान थे ....जीते जी हमारी चर्चा एकाध पोस्ट पर हुई है....अब जब भी कूच करेंगे.... guranteed कई जगह होगी....
    हा हा हा हा

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  8. जिन्दे रहदियाँ न बण सके यारा तेरे हंजू
    मेरी मौत ते दो हंजू बहा जावीं ....!!

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  9. बिलकुल सही कहा ये दुनिया है जहाँ जीते जी कोई नहीं पूछता स्लाग ओवर से अच्छी सीख दी है शुभकामनायें

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  10. आजकल तो सब जगह यही हो रहा है।
    जीते जी धक्के, मरने के बाद पूजा।
    वाह रे कलयुग।

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  11. भाई लेकिन आप को मालूम ना हो इस स्थिति के लिये भी माईकल खुद जिम्मेदार था, ओर जो यह चित्रआप ने बच्चे के संग दिया यह चित्र जर्मन के एक होटल की खिडकी से लिया गया था, ओर इस हरकत का खमियाना भी इसे भुगतना पडा था.
    आप ने लेख बहुत अच्छा लिखा.लेकिन फ़िर भी कंगाल नही था यह
    धन्यवाद

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  12. राज जी,
    ये जो बच्चा माइकल जैक्सन ने लटकाया हुआ था, ये और कोई नहीं उसका अपना ही बेटा है...

    कभी दुनिया के पॉप बादशाह रह चुके माइकल जैक्सन के सामने एक वक्त ऐसा भी आ गया था कि उसे शो के लिए प्रमोटर भी ढूंढने से नहीं मिल रहे थे...ये ठीक है जैक्सन ने पैसा खूब कमाया...लेकिन उसने
    प्लास्टिक सर्जरी, ऐशो-आराम पर पैसा फूंका भी जमकर...इसी बेवकूफी ने माइकल जैक्सन को कर्ज के भंवर में फंसा दिया था...और माइकल ड्रग्स में ही सुकून ढ़ूंढने लगा था...बाद में ऐसी हालत आ गई वो कुछ खा ही नहीं सकता था...सिर्फ टेबलेट्स...इंजेक्शन और कुछ नहीं...

    जय हिंद...

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  13. यह तो विडम्बना है कि आदमी जीते जी कीमती नहीं होता।

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  14. लेकिन अब भी माइकेल के नक्शे कदम पर चलना बन्द कहाँ हो रहा है .. बुराइयाँ भी आदर्श बन जाती है इस समय में ।

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  15. किसी पोस्ट पे देर से पहुँचने से नुकसान ये होता है कि जो बात आप कहना चाहते हैँ...उसे कोई दूसरा पहले ही कह के जा चुका होता है ...:-(

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