रविवार, 29 नवंबर 2009

सनक का राजकुमार...खुशदीप

कल पूरा दिन ब्रॉडबैंड ठप रहने की वजह से दिमाग भन्नाया रहा...न पोस्ट डाल सका और न ही कमेंट कर सका.. आज बड़ी मिन्नत-खुशामद कर बीएसएनएल वाले भाईसाहबों को पकड़ कर लाया...बड़ी मुश्किल से ब्रॉडबैंड जी को मनाया जा सका और आप से मुखातिब होने की स्थिति में लौट सका हूं...

कल रात ब्लॉगिंग तो कर नहीं सकता था, इसलिए राजकुमार और दिलीप कुमार की पुरानी फिल्म पैगाम (1959) डीवीडी पर देखने बैठ गया...फिल्म देख कर ही सोचने को मजबूर हो गया कि राजकुमार में ऐसी क्या खासियत थी कि दिलीप कुमार जैसे दिग्गज कलाकार भी राजकुमार के सामने पानी भरते नज़र आते थे...राजकुमार बीते दौर में भी मल्टीस्टारर फिल्मों की जान हुआ करते थे...दूसरे टॉप स्टार राजकुमार के साथ आने से डरा करते थे...बरसों बाद सुभाष घई सौदागर (1991) में राजकुमार और दिलीप कुमार को साथ लाए तो भी पूरी फिल्म में राजकुमार दिलीप साहब के आगे कहीं दबे नहीं...उजाला में शम्मी कपूर हो या वक्त और हमराज में सुनील दत्त, काजल में धर्मेंद्र हो या दिल एक मंदिर में राजेंद्र कुमार, नील कमल में मनोज कुमार हो या मर्यादा में राजेश खन्ना, कर्मयोगी में जीतेंद्र हो या सूर्या में विनोद खन्ना....या फिर मरते दम तक में गोविंदा जैसे नई पीढ़ी के कलाकार...राजकुमार हमेशा इक्कीस ही साबित हुए...


बेमिसाल डॉयलॉग डिलीवरी...गले में मफलर, कंधे पर कोट, पाइप से कश लगाना...राजकुमार का अलग ही अंदाज़ था.. वैसे तो राजकुमार के कई डॉयलॉग बड़े हिट हुए हैं लेकिन वक्त (1965) फिल्म में साथी कलाकार रहमान के सामने राजकुमार की ये लाइन बेजोड़ थी...
चिनॉय सेठ, जिनके घर खुद शीशे के बने हों, वो दूसरों पर पत्थर नहीं उछाला करते...

कश्मीरी मूल के राजकुमार का असली नाम कुलभूषण पंडित था और फिल्मों में आने से पहले वो पुलिस में इंस्पेक्टर थे...अगर सनक की बात की जाए तो राजकुमार का बॉलीवुड में दूर-दूर तक कोई जोड़ नहीं था...अगर राजकुमार की सनक न होती तो आज अमिताभ बच्चन वो अमिताभ बच्चन न होते जिन्हें हम सब जानते हैं...दरअसल 1973 में निर्माता निर्देशक प्रकाश मेहरा की फिल्म ज़ंज़ीर ने अमिताभ को एंग्री यंग मैन के तौर पर फिल्म इंडस्ट्री में स्थापित किया था...लेकिन कम लोग ही जानते हैं कि अमिताभ को प्रकाश मेहरा ने और कोई विकल्प न होने की स्थिति में मजबूरी में ज़ंज़ीर के लिेए साइन किया था...ज़ंज़ीर के लिए प्रकाश मेहरा की पहली पसंद राजकुमार ही थे...लेकिन जब राजकुमार को प्रकाश मेहरा साइन करने के लिए पहुंचे तो राजकुमार से उन्हें जो जवाब मिला, उसे सुनकर प्रकाश मेहरा ने ज़िंदगी में फिर कभी राजकुमार से मिलने की हिम्मत नहीं दिखाई थी...राजकुमार का जवाब था...
जानी...तुम्हारे पास से बिजनौरी तेल की ऐसी बदबू आ रही है, हम फिल्म तो दूर तुम्हारे साथ एक मिनट और खड़ा होना बर्दाश्त नहीं कर सकते...

राजकुमार की एक और अदा थी...वो किसी साथी कलाकार को उसके सही नाम से नहीं बुलाते थे...राजकुमार के दौर में ही राजेंद्र कुमार, धर्मेंद्र और जीतेंद्र भी फिल्मों में अच्छा मुकाम हासिल कर चुके थे...लेकिन राजकुमार धर्मेंद्र को जीतेंद्र और जीतेंद्र को धर्मेंद्र नाम से संबोधित कर देते थे...इस पर धर्मेंद्र को एक बार ज़बरदस्त गुस्सा भी आ गया था...लेकिन राजकुमार ठहरे राजकुमार...किसी शुभचिंतक ने इस आदत पर राजकुमार को एक बार टोका तो उनका जवाब था...राजेंद्र हो या धर्मेंद्र या जीतेंद्र या बंदर...क्या फर्क पड़ता है...राजकुमार के लिए सब बराबर हैं....

एक और किस्सा जीनत अमान को लेकर है...ज़़ीनत इंसाफ का तराजू आते आते फिल्म इंडस्ट्री की टॉप हीरोइन में शुमार की जाने लगी थीं...एक समारोह में किसी ने जीनत की मुलाकात राजकुमार से कराई तो उनका कहना था...जानी शक्ल-सूरत से तो माशाअल्लाह लगती हो, फिल्मों में ट्राई क्यों नहीं करती...ज़ीनत अमान ने ये सुना तो काटो तो खून नहीं...

लेकिन राजकुमार का सबसे बेहतरीन मास्टरस्ट्रोक मशहूर संगीतकार भप्पी लाहिरी के लिए था...सब जानते हैं भप्पी लाहिरी को जेवरों से लदे रहने का बहुत शौक है...किसी ने भप्पी लाहिरी का राजकुमार से इंट्रोडक्शन कराया तो उन्होंने इन शब्दों से भप्पी लाहिरी का स्वागत किया....जानी और तो सब ठीक है लेकिन तुम्हारा मंगलसूत्र कहां है...

3 जुलाई 1996 को मुंबई में राजकुमार ने 69 साल की उम्र में दुनिया को हमेशा के लिए अलविदा कहा... अगर पाठकों को भी राजकुमार के ऐसे ही कुछ किस्से पता हो तो ज़रूर बताएं...

स्लॉग ओवर

मक्खन का पुतर गुल्ली सरकारी प्राइमरी स्कूल में गिरते-पड़ते पांचवीं पास कर गया...वो स्कूल पांचवी तक ही था...अब प्राइवेट स्कूल में छठी क्लास में दाखिला कराने के लिए मक्खन पंहुचा तो प्रिसिंपल ने कहा कि हम टेस्ट लिए बगैर दाखिला नहीं देते...मक्खन ने कहा...ले लो जी टेस्ट....टेस्ट हो गया...प्रिसिंपल ने टेस्ट का नतीजा देखकर कहा कि हमारे हिसाब से इसे चौथी क्लास में ही एडमिशन दिया जा सकता है...मरता क्या न करता...गुल्ली का चौथी में एडमिशन हो गया...लेकिन महीने बाद ही स्कूल से मक्खन को बुलावा आ गया...प्रिंसिपल ने कहा कि गुल्ली चौथी लायक भी नहीं है...इसे तीसरी में डाल रहे हैं...अब पढ़ाना तो था ही मक्खन ने कहा.. डाल दो जी तीसरी में...लेकिन ये सिलसिला यहीं नहीं थमा...हर हफ्ते-दो हफ्ते बाद मक्खन को बुलावा आता और गुल्ली को एक क्लास और पीछे कर दिया जाता...दूसरी, पहली, केजी...अब जब गुल्ली जी केजी में वापस आ गए तो मक्खन बड़ी तेज़ी से स्कूटर चलाता हुआ घर लौटा...घर के नीचे से ही पत्नी मक्खनी को आवाज दी....नी मक्खनिए...नी मक्खनिए...छेती तैयार हो जा...मुंडा जित्थो आया सी ओथे ही जाण लई बड़ी तेज़ी नाल वापस आ रेया ई....( ओ मक्खनी...ओ मक्खनी...जल्दी से तैयार हो जा...लड़का जहां से आया था, वहीं लौटने के लिए बड़ी तेज़ी से वापस आ रहा है...)

25 टिप्‍पणियां:

  1. मक्खन का चिंता करना जायज है.

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  2. इसी लिए शायद ब्लॉग जगत कुछ सूना सूना लग रहा था , चिट्ठाजगत तो अभी भी पहुँच के बाहर है

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  3. सुप्रसिद्ध कलाकार राजकुमार के विषय में जानकारी देता सुन्दर लेख!

    राजकुमार बात बात में जॉनी कहा करते थे। उनके कुत्ते का नाम भी जॉनी था।

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  4. भई, आज संडे के दिन आपकी ये पोस्ट पढ़कर तो मज़ा आ गया.
    राज कुमार के तो क्या कहने, जैसा नाम वैसा उनका रुआब था.
    इतनी मज़ेदार पोस्ट के बाद स्लॉग ओवर की तो ज़रूरत ही नही थी.
    वैसे समीर जी, दिल्ली आने वाले है, क्या ख्याल है.

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  5. खुशदीप भाई राजकुमार की शख्सियत के तो यही लटके-झटके हैं, एक बार मायापुरी मे इनके जुते टेबल पर रखे हुए फ़ोटो छपी थी।

    मक्खन की पत्नी की चिंता जायज है कहीं................हा हा हा
    मजा आ गया।

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  6. राजकुमार जी के बारे में अनजानी बातें जानकर अच्छा लगा, मक्खन को तो स्कूटर की जगह राकेट पर आना चाहिये था, बेचारी गुल्ली... :)

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  7. लोगों को राजकुमार की सनक ही तो पसंद थी पर तब तक ही जब तक खुद उस के शिकार न हो जाएँ।
    स्लॉग ओवर से अधिक सनक ने हँसाया। हमारे यहाँ तो अक्सर एक नेता जी अपने प्रतिद्वंदियों को ऐसे ही धमकाया करते थे। स्साले को जहाँ से आया है वहीं वापस पहुँचा दिया जाएगा।

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  8. मैं सोच रहा हूं कि जब राजकुमार नाम से उनका ये हाल था तो कहीं पिताजी ने उनका नाम बाद्शाह या राजाधिराज रख दिया होता तो ....?
    अजय कुमार झा

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  9. राजकुमार का विग तो सराहनीय है जी... किसी ने उन्हें कभी गंजा नहीं ही देखा:)

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  10. सनकी राजकुमार के बारे में बहुत कुछ जाना .....

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  11. kखुशदीप जी सच मे कल ब्लागजगत सूना था । हमने सोचा मक्खन के साथ कहीं चले गये हों। राजकुमार के बारे मे बहुत रोचक जानकारी है। धन्यवाद अब सभी ब्लागऱ को बी एस नेन एल वालों को अऱ्ज़ी देनी पडेगी कि खुशदीप जी का ब्राड बैड अगर कभी ठप हुया तो हम उनका बैंड बजा देंगे । शुभकामनायें

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  12. तुम्हारा मंगलसूत्र कहां है... वाला किस्सा तो खूब चला था।

    सच में वह सनकी राजकुमार थे।

    ब्रॉडबैण्ड जी की रोज आरती उतारिए। कभी खफ़ा नहीं होंगे।
    अब तो वही दुनिया का झरोखा बनते जा रहे।

    बी एस पाबला

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  13. एक बात हम साफ़ कह देते हैं....
    जानी...हमारे राजकुमार जी को कोई सनकी न कहे....उनके जैसा stylish अभिनेता अभी तक कोई नहीं हुआ है.....बस....
    .
    .
    .
    .

    और.....
    आप तो ऐसे न थे ..!!!

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  14. मदर इंडिया हिट होने से भी पहले सुनील दत्त कई फ़िल्मों में काम कर चुके थे, एक पार्टी में जब भीड़ ने सुनील दत्त को घेर लिया तब राजकुमार ने सबके सामने उन्हें कहा था कि "जानी अब तुम भी थोड़ी एक्टिंग सीख गये हो…" :) ऐसा भी एक सुना हुआ किस्सा है।

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  15. भैया..... राजकुमार के सन्दर्भ म्विन यह पोस्ट बहुत बहुत शानदार रही......



    हेहेहेहेहेह ..... अब मखनी को तैयार रहना चाहीये.... आपका स्लोग ओवर बहुत मजेदार रहा .....



    जय हिंद

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  16. मैं उस डायलॉग का भी इंतज़ार कर रही थी..जो 'वक़्त' फिल्म का ही था..."ये बच्चों के खेलने की चीज़ नहीं,हाथ लग जाए तो खून निकल आता है'
    इन सब वाकयों के बारे में पढ़ा तो हमने भी था पर कई बार सोचती थी कि कहीं ऐसा तो नहीं,पत्रकार 'राजकुमार'के सनकी इमेज का फायदा उठा,ये कहानियाँ बुन डालते हैं...कितनी सच्चाई थी, इन बातों में क्या पता?पर मनोरंजन तो खूब हुआ सबका...याद दिलाने का शुक्रिया.

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  17. रश्मि बहना,
    जो राजकुमार का डॉयलॉग आपने लिखा है, वो राजकुमार एक गुंडे के उन्हें चाकू दिखाने के बाद बोलते हैं...

    वैसे उनके हिट डॉयलाग्स का ज़िक्र किया जाए तो पूरी पोस्ट ही लिखनी पड़ जाएगी...फिर भी कुछ जो याद आ
    रहे हैं वो पेशे-खिदमत हैं...

    हमको ज़माना मिटा सके, ज़माने में दम नहीं, ज़माना हमसे है, हम ज़माने से नहीं...( बुलंदी)

    आपके पांव देखे, बहुत हसीन हैं, इन्हें ज़मीन पर मत उतारिएगा, मैले हो जाएंगे...(पाकीज़ा)

    जय हिंद...

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  18. निर्मला कपिला जी और डॉ महेश सिन्हा जी,

    ये आपका प्यार है मेरे लिए, वरना इस नाचीज की बिसात ही क्या...

    जय हिंद...

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  19. जानी हम भी राजकुमार से कम नही है।हमारे भी डायलाग बहुत हिट है लेकिन वो लोकल हैं।हा हा हा हा हा,शानदार क्लाकार को शानदार सलामी दी है आपने।

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  20. राजकुमार जी की तुनकमिज़ाज़ी के कई किस्से मशहूर हैँ..उनमें से दो किस्से मुझे अभी याद आ रहे हैँ...

    एक बार की बात है जब राजकुमार अमिताभ बच्चन जी से एक पार्टी में मिले और उन्होंने उनके विदेशी सूट की प्रशंसा कर दी...तब अमिताभ जी ने खुश होकर उन्हें उस जगह का पता बताना चाहा तो राजकुमार जी ने जवाब दिया कि उन्हें कुछ पर्दे सिलवाने थे

    दूसरे किस्से में उस समय की बात है जब 'प्यार झुकता नहीं' के बाद मिथुन चक्रवर्ती स्टार बन चुके थे...तब एक पार्टी में वो राजकुमार से मिले और अपना परिचय देते हुए उन्हें बताया कि वो भी हिन्दी फिल्मों के सितारे हैँ और उनकी कई फिल्में रिलीज़ हो चुकी हैँ...तो राजकुमार का जवाब था कि.... शायद बम्बई से बाहर रिलीज़ होती होंगी

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  21. राजकुमार विषयक पोस्त बहुत रोचक और जानकारीपूर्ण रही, आभार!!


    मख्खनी को अस्पताल में फिर भरती??? :)

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  22. सुनते हैं कि फिल्म नीलकमल के पहले शॉट में ही राजकुमार अड़ गए कि वे नकली आभूषण पहनकर काम नहीं करेंगे. निर्माता मरता क्या न करता, आननफानन में कहीं से किलो भर वजनी असली ज़ेवर मंगाए गए और तभी राजकुमार शॉट के लिए तैयार हुए.

    कहते हैं कि उन्होंने नौकरी के दौरान किसी गुंडे को इतना पीटा कि वो मर गया. तभी उन्हें नौकरी छोड़नी पड़ी थी.

    फिल्म तिरंगा मेरी पसंदीदा फिल्म है और मैं अक्सर सोचता हूं कि राजकुमार और नाना पाटेकर को इस फिल्म में नहीं लेते तो फिल्म कितनी घटिया बन जाती.

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  23. खुशदीप जी
    आपका ईमेल पता नहीं मिला . आप सादर आमंत्रित हैं इस मंच में अपना योगदान करने के लिए .
    अपनी ईमेल पता मुझे भेजें ya समस करें .
    पांचवा खम्बा आपका अपना मंच है . सभी सादर आमंत्रित हैं
    Dr Mahesh Sinha
    sinhamahesh@gmail.com
    09893098332

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  24. सम्वाद ही राजकुमार के अभिनय की जान थे
    फ़िल्म धर्मका़टा मे उनके २ सम्वाद -
    ठाकुर भवानी सिह को बुज़दिल कोई कह नही सकता
    और
    चन्दन ये जीना भी कोइ जीना है सोऔ तो बन्दूक का तकिया लगाकर - -
    उनका बेटा उनके जीते कभी ये नही जान पाया कि उनका पिता एक अभिनेता है.
    लेकिन एक बात है इस सनक की सराहना करने का मन नही होता और जिसने भी निजी जीवन मे ऐसी सनक को अपनाया है उनका नुकसान ही हुआ है.

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