मंगलवार, 17 नवंबर 2009

कहां रे हिमालय ऐसा...खुशदीप

दिनेशराय द्विवेदी सर और बीएस पाबला जी ने आ़ज दिल्ली प्रवास के बाद मेरे से विदाई ली...ऐसा कहीं लगा ही नहीं कि हम सब पहली बार मिले ...सब कुछ वैसा ही जैसे घर से बाहर आने-जाने पर होता है...कोई कुछ कहे भी नहीं, और दूसरा पहले ही उस भाव को पकड़ ले...टेलीपैथी की तरह...लगे ही नहीं कि भौतिक तौर पर हम सैकड़ो-हज़ार किलोमीटर के फासले पर रहते हैं...मिलने के बाद विदा हो तो इसी वादे के साथ...फिर मिलेंगे...और दिल तो ब्लॉग के ज़रिेए हमेशा मिले रहते ही हैं...ज़मीनी दूरी होने के बावजूद आपस में कोई दूरी नहीं...

लेकिन दूसरी ओर बाल ठाकरे हैं...मराठी-गैर मराठी...मुंबईकर-परप्रांतवासी के नाम पर लोगों को बांटना चाहते हैं...मुंबई में रहने वालों के बीच इतनी दूरी बना देना चाहते हैं कि महानगर अलगाववाद की आग में जलने लगे...इस बार निशाना चुना सचिन तेंदुलकर को...सिर्फ इसलिए कि ये क्यों कह दिया कि मुंबई भारत की है...और सचिन खुद के महाराष्ट्रीय होने पर गर्व करते हैं लेकिन साथ ही अपने को भारतीय बताते हैं...बाल ठाकरे ये कहते हुए भूल गए कि सचिन भारत के हर घर के लाडले हैं...उन पर किसी भी प्रांत का उतना ही हक है जितना महाराष्ट्र का...बाला साहेब महाराष्ट्र और मुंबई भारत में ही हैं और वहां भारत का ही संविधान चलता है...उम्र के इस पड़ाव में विधानसभा चुनाव की करारी हार और भतीजे राज ठाकरे के भितरघात ने आपका संतुलन ज़रूर बिगाड़ दिया है...लेकिन सचिन का नाम लेकर अंगारों से मत खेलो...देश के और हिस्से तो क्या महाराष्ट्र में ही आपको ऐसा विरोध सहना पड़ेगा कि चार दशक से चल रही राजनीति की दुकान पर शटर गिराना पड़ जाएगा...

सचिन के लिए बस सब भारतवासियों की भावना सचिन देव बर्मन के गाए इस गीत से समझ लीजिए...

कहां रे हिमालय ऐसा,
कहां बहता पानी,
यही है वो ज़मीन,
जिसकी दुनिया दीवानी...

प्रेम के पुजारी,
हम है रस के भिखारी,
हम हैं प्रेम के पुजारी हो,
प्रेम के पुजारी...


स्लॉग ओवर

गुल्ली मैथ्स का पेपर देकर घर आया....मक्खन घर पर ही था...

मक्खन ने गुल्ली को बुला कर पूछा... गुल्ली पुतर, पेपर कैसा हुआ...

गुल्ली...डैडी जी एक सवाल गलत हो गया...

मक्खन...एक सवाल गलत हो गया...ओ...चलो पुतर जी...कोई बात नहीं...एक ही तो गलत हुआ है...बाक़ी..

गुल्ली...बाक़ी मैंने किए ही नहीं...

21 टिप्‍पणियां:

  1. दरअसल ...ठाकरे.... और ठाकरे परिवार.....दिमाग़ी रूप से दिवालिये हो गए हैं .... यह refined माफिया हैं....
    इन लोगों ने देश और प्रान्त को बाँट दिया है..... और अब इंसानियत को बाँट रहे हैं.....

    इश्वर इनको सदबुद्धि दे......

    और गुल्ली.... तो बहुत ही चालाक निकला....बताइए.... एक सवाल किया वो भी गलत.....हिहिहिहिहिहिही ..

    JAI HIND
    JAI HINDI
    JAI BHARAT....

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  2. भाई यह गुल्ली तो बडा सायाना है, छोडो इन राज नीतियो की बाते... बस मखन ओर गुल्ली के बारे लिख दिया करो

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  3. खुशदीप जी,
    आप भी न घुमा कर कान पकड़ते हैं....
    अब बताइए....आपने ब्लॉग मीट से बाल ठाकरे और बाल ठाकरे से सचिन तेंदुलकर और सचिन तेंदुल कर से सचिन देव बर्मन.....बाप रे.......इतना घुमावदार.....!!
    वैसे इ बात एकदम सही है कि सचिन तेंदुलकर पूरे देश के हैं.....किसी प्रान्त विशेष के नहीं (क्रिकेट बोर्ड तो नॅशनल है न.....स्टेट गोरमेंट का तो नहीं है न ???.....हम जानते नहीं हैं )
    एक ठो बात बताइए ...इ राज ठाकरे को कोई फिल्म-उलिम में बिल्लेन का रोल कोई काहे नहीं दे देता हैं......अरे बीजी भी रहेगा और धुर्फंद्रई भी नहीं करेगा......सारा टाइम सीसा के सामने बीत जाएगा उसका और लोग चैन से रहेगा......हमरा इ आइडिया पर सोचियेगा तनी....मिल्लियन डालर का है इ......लेकिन हम फ्री में दे रहे हैं.....
    बाकि आपका आलेख हमेशा के सामान सम-सामयिक....कहने का माने कि दुखती राग पर हाथ है आपका.....और इसके लिए बधाई दे रहे हैं हम आपको....

    और इ गुल्ली लगता है आप पर गया है.....सही टाइम पर सही बात बोलता है.....हा हा हा हा

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  4. बाल ठाकरे मराठी अस्मिता की सुदृढ़ता के बहाने पूरे भारत को दांव पर लगाना चाहते हैं ....दुसरे देशों पर इलज़ाम लगाने से पहले हम अपने दामन के इन काँटों को भी देखे ....गुल्ली की गुल्ली का तो जवाब ही नहीं है ...!!

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  5. सही कहा...अब तो सचिन वाला विवाद हदें ही पार कर गया.

    -स्लॉगओवर मस्त रहा!!

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  6. अदा जी,
    सचिन देव बर्मन का जुड़ाव सचिन तेंदुलकर से कैसे है, इसकी भी एक कहानी है...सचिन के पिता और प्रख्यात मराठी साहित्यकार रमेश तेंदुलकर सचिन देव बर्मन के गीत-संगीत के बड़े मुरीद थे...इसलिए जब सचिन का जन्म हुआ तो उनके पिता ने सचिन देव बर्मन पर ही उनका नाम रखा...

    जय हिंद...

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  7. खुशदीप जी,
    कल शाम आप के साथ बिताया समय और उस के पहले इरफान जी के घर, ऐसा लगा जैसे पूरा भारत एक इकाई हो। फिर ठाकरे का बयान टीवी पर पढ़ना ऐसा लगा जैसे खुशनुमा माहौल में किसी ने हाइड्रोजन सल्फाइड का सिलेण्डर खोल दिया हो।
    वाकई मित्रों के बीच बिताए गए दिल्ली में दो दिन हमेशा याद रहेंगे। ठाकरे जैसे लोगों को इतिहास कूड़ेदान में डालने वाला है।

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  8. द्विवेदी सर,
    अगर आप मुझे हक के साथ सिर्फ खुशदीप कहा करेंगे, तो मुझे अच्छा लगेगा...

    जय हिंद...

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  9. दिनेश राय दिवेदी जी और पाबला जी के साथ दो-दो बार मुक्का-लात...ऊप्स!...सॉरी मुलाकात...आपके तो मज़े हैँ...

    सब मराठा वोट हथियाने की राजनीति है...बाल ठाकरे और राज ठाकरे उस कुँए के मेंढक की तरह हैँ जिनके लिए महाराष्ट्र ही संपूर्ण विश्व है और मुम्बई ही उसका राजनैतिक मक्का है..लेकिन जल्द ही उनकी हरकतों से खुद मुम्बईकर ही आज़िज़ आ उन्हें किनारा करने से गुरेज़ नहीं करेंगे

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  10. खुशदीप भाई ये तो देखने पर है कि वो क्या देखता है।आपको,द्विवेदी जी,पाब्ला जी,राजीव तनेजा,अजय झा और इरफ़ान भाई को प्यार देखना है इसलिये प्यार दिखता है।हमको भी दिखता है और आपके हमारे जैसो को भी दिखता हैम लेकिन ठाकरे जैसो को नही दिखता और दिखता भी है तो राजनिती का पर्दा उन्हे देखने नही देता।बाल ठाकरे का ये राग नया नही है सालो पुराना है मगर अब उसकी टी आर पी बढ गई है इसलिये वो ज्यादा ज़ल्दी और ज्यादा दूर तक़ सुनाई देता है।इससे पहले भी वे ऐसी वाहियात बातें चिल्ला चिल्ला कर कहते रहते थे जिसे तब प्रिंट मीडिया तवज्जो नही देता था और वो बातें फ़ुसफ़ुसा कर दम तोड़ देती थी लेकिन आज वो कुछ फ़ुसफ़ुसाते भी हैं तो मीडिया उसे इतनी बार दिखा देता है कि वो गरज़ सुनाई देती है।एक बात ज़रूर है कि सिर्फ़ ठाकरे को दोष देने से पहले ये भी देखना होगा कि उन्हे इस स्तर पर पंहुचाने वाले लोग शायद हम ही हैं।मीडिया उन्हे तवज्जो देना बंद कर दे तो उनका देश भर मे फ़ैलने का सिलसिला थम कर धीरे-धीरे सीमटता चला जायेगा।खैर अकेले नही है वे उनके कैसे और भी हैं मगर उनका टी आर पी शायद आज ज्यादा नही है।लालू,मुलायम और मायावती को किस कैटेगरी मे रखेंगे आप्। बाम्हण,बनिया,ठाकुर,अगड़ा-पिछड़ा,बहुसंख्यक-अल्प्संख्यक ये सब टर्मिनोलाजी किनकी देन है क्या इसके लिये भी ठाकरे ही दोषी हैं?इस देश को बनाते समय ही जब जात और भाषा के आधार पर प्रांत बनाये गये तो ये हाल तो होना ही है।दरअसल हम लोगों की बहुत गंदी आदत है कि हम इतिहास से सीखते नही और पिछली गलतियों को भूलते चले जाते हैं।अलगाव वाद क्या इससे पहले इस देश मे नज़र नही आया था।इस देश मे तो अलग देश तक़ की मांग हो चुकी है,पूर्वोत्तर की हालत किसी से छिपी नही है,वंहा बिहारियों और हिंदी के साथ क्या हो रहा है?क्या उस पर कोई कुछ कह रहा है?

    जाने दो खुशदीप भाई जाकी रही भावना जैसी।मीडिया को अपना रोल और अपना इंपोर्टेंस समझना ही होगा वरना कंही न कंही दोषी हमे भी ठहराया जायेगा।

    हटाओ सुबह सुबह सीरियस हो गया और आपको भी सीरियस कर दिया।वैसे द्विवेदी जी जब रायपुर आए थे तो उनको विदा करते समय हम लोगो का भी अनुभव आपके जैसा ही था।एक बार कह रहा हूं कि शायद मेरे नसीब मे आप जैसे अच्छे लोगो से मिलना नही था वरना पाब्ला जी ने मुझे चलने के लिये पूछा था ज़रूर्।इसका मतलब ये नही है मिलूंगा ज़रूर आपसे।

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  11. जब नाश मनुष्य पर छाता है
    पहले विवेक मर जाता है.

    ---- बाला साहेब ठाकरे पर यह फिट है... खिसयानी बिल्ली खम्भा नोचे...

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  12. हा हा हा खुशदीप जी-आपके ब्लाग पर हर तरह का सामान है जिसको जो चाहिए ले ले, पक्के सुलझे हुए व्यावसायी हो भाई, मुझे तो गुल्ली ने खुश कर दिय कभी हम भी ऐसे ही सवाल हल करके आते थे, हा हा हा वाह गुल्ली! हमारा इस जमाने का नया-संस्करण है-बधाई

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  13. क्या कहे ...........इन का बस चले तो देश का बंटाधार हो जाये !

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  14. महफूज भाई ने बिल्कुल सही कहा, ठाकरे परिवार को सदबुद्धि की जरुरत है । और अन्त में स्लोग ओवर आपका हमेशा की तरह लाजवाब रहा।

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  15. ठाकरे जैसों को सिर्फ बकने दो। उन पर ध्यान देना बंद कर दो। वे अपने आप मर जाएंगे। मीडिया उनकी और उनके जैसे मूर्खों की हर बात को उछालता है। अच्छी बातों, अच्छे लोगों की चर्चा नहीं होगी तब ठाकरे जैसे ही पनपेंगे न?

    सचिन, अमिताभ और तमाम दूसरे आईकंस ही कौन से पाक साफ हैं। अपने सामाजिक धर्म का सही निर्वाह तो ये लोग भी नहीं कर रहे हैं। जितना इन्होंने किया उससे सौ गुना समाज ने दिया है। इन्होंने कितना वापस लौटाया? चंद बयान या बहुत थोड़ी सी, दिखाने भर के लिए किसी की व्यक्तिगत मदद। उसके बदले भी प्रचार मिल जाता है।

    वाह रे हमारी भावुकता....

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  16. Aaj bhi bada achchha lekh likha aapne bhai ji, Gulli puttar ko meri or se shabashi... aur kahna gulli-danda khel ke aaye.........:)
    Jai Hind..

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  17. "दिनेशराय द्विवेदी सर और बीएस पाबला जी ने आ़ज दिल्ली प्रवास के बाद मेरे से विदाई ली."

    चलो, अब द्विवेदी से एलेक्शन का आंखों देखा हाल सुनेंगे और पाबलाजी से लेटेस्ट समाचार पत्र में ब्लाग का ज़िक्र :)

    स्लाग ओवर का गुल्ली आखिर बेवकूफ़ ही निकला ना..... अगर वो प्रश्न का उत्तर भी नहीं लिखता तो नीटनेस के पांच नम्बर तो मिल ही जाते :)

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  18. ब्लॉगर परिवार भी अब वृहत्तर भारत की झलक देने लगा है। जय हो।

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