मंगलवार, 10 नवंबर 2009

हिंदी किस खेत की मूली है...खुशदीप

हिंदी पिटी...बुरी तरह पिटी...अपने देश में ही पिटी...आखिर हिंदी है किस खेत की मूली...राष्ट्रीय भाषा कोई है हिंदी...जो महाराष्ट्र में चलेगी...जी हां, मैं भी इसी भ्रम में जी रहा था कि हिंदी राष्ट्रीय भाषा है...मैं क्या देश की आधी से ज़्यादा आबादी इसी मुगालते में होगी कि हिंदी राष्ट्रीय भाषा है...हिंदी में ब्लॉगिंग करने वाले भी वहम पाले हुए होंगे कि हम तो राष्ट्र की भाषा में लिखते हैं...

महाराष्ट्र विधानसभा में समाजवादी पार्टी के विधायक अबू असीम आजमी की राज ठाकरे के विधायकों ने ठुकाई कर दी...ठुकाई करने वाले चार विधायक चार साल के लिए सदन से निलंबित कर दिए गए...वैसे यहां ये बताना ज़रूरी है कि पिटने वाले अबू असीम आजमी के खाते में आपराधिक मुकदमों की लंबी फेहरिस्त है...और जिन्होंने ठुकाई की वो भी मुकदमों के मामले में अबू आजमी से कहीं से भी उन्नीस नहीं है...

आजमी साहब लोकसभा चुनाव भी लड़े थे लेकिन कामयाब नहीं हो सके थे...विधानसभा चुनाव में अबू आजमी की लाटरी लगी और दो सीटों से चुनाव लड़कर दोनों ही सीटों पर जीत का परचम लहरा दिया...अबू आज़मी की कुल संपत्ति उनके अपने हलफनामे के मुताबिक सिर्फ 126 करोड़ रुपये है...लेकिन मेरी पोस्ट का मुद्दा अबू आजमी या उनकी ठुकाई करने वाले एमएनएस विधायक नहीं है...मेरा मुद्दा ये है कि अबू आज़मी को हिंदी में शपथ लेने से रोकने के लिए पीटा गया...मेरे लिए अहम है हिंदी की वजह से ये सारा ड्रामा हुआ...

मैंने इस प्रकरण पर गौर से सोचा...और फिर सवाल किया कि महाराष्ट्र में आखिर क्यों ली जाए हिंदी में शपथ...आप कहेंगे कि संविधान अधिकार देता है कि हम देश के किसी भी कोने में जाकर बसें और चाहे कोई भी भाषा बोलें...और हिंदी तो हमारी राष्ट्रीय भाषा है...बस यहीं मात खा गया हिंदुस्तान...मैंने भी यही जानने की कोशिश की आखिर सांविधानिक दृष्टि से हिंदी का देश में दर्जा क्या है...और जो मैंने खंगाला वो मेरे लिए भी चौंकाने वाला रहा...पहली बात तो ये समझ लीजिए कि हिंदी केंद्र में सिर्फ राजभाषा है राष्ट्रीय भाषा नहीं...राजभाषा मतलब सरकारी भाषा...इस राजभाषा में भी अंग्रेज़ी का नप्पुझन्ना साथ लगा हुआ है...यानि व्यावहारिक तौर पर विधायिका हो या न्यायपालिका, सारा काम अंग्रेजी में ही होता है...कुछ विभागों में हिंदी पर अहसान करते हुए राजभाषा बताया ज़रूर जाता है लेकिन वो हिंदी इतनी क्लिष्ट होती है कि सुनने वाला एक ही बार में भाग खड़ा होता है...

आइए अब चलते हैं 26 जनवरी 1950 की तारीख में...इसी तारीख को भारत का संविधान लागू हुआ था...संविधान का अनुच्छेद 343 हिंदी को भारतीय संघ की राजभाषा (सरकारी भाषा) का तो दर्जा देता है लेकिन ये कहीं नहीं कहता कि हिंदी भारत की राष्ट्रीय भाषा है...ये अनुच्छेद अंग्रेज़ी को भी अतिरिक्त सरकारी भाषा का दर्जा देता है...लेकिन ये अतिरिक्त भाषा ही पिछले छह दशक में सब कुछ बनी हुई है...

संविधान लागू करते वक्त ये भी साफ किया गया था कि हिंदी और अंग्रेजी सिर्फ 15 साल यानि 26 जनवरी 1965 तक ही केंद्र की सरकारी भाषा रहेगी...उसके बाद जो भी सरकारी भाषा चुनी जाएगी उसे ही राष्ट्रीय भाषा का दर्जा दे दिया जाएगा...यानि संविधान बनाने वालों को पूरी उम्मीद थी कि 1965 के बाद हिंदी ही देश की सरकारी और राष्ट्रीय भाषा बन जाएगी... लेकिन 1965 से पहले ही दक्षिणी राज्यों में हिंदी को राष्ट्रीय भाषा बनाने के खिलाफ आंदोलन शुरू हो गया था...1965 आते-आते दक्षिण में हिंदी विरोधी आंदोलन इतना उग्र हो गया कि तत्कालीन प्रधानमंत्री और हिंदी के प्रबल समर्थक लाल बहादुर शास्त्री को भी हिंदी के मुद्दे को ठंडे बस्ते में डालना पड़ा...उसके बाद भी केंद्र में किसी सरकार की हिम्मत नहीं हुई कि हिंदी को वो सम्मान दिलाए जिसकी कि वो हकदार है...

ये हालत तब है जबकि संविधान के अनुच्छेद 351 में साफ़ उल्लेख है कि ये संघ (केंद्र) का कर्तव्य है कि वो हिंदी भाषा के प्रचार को बढ़ावा दे, हिंदी को इस तरह विकसित करे कि ये भारतीय संस्कृति के समूचे तत्वों को दर्शाने के लिए माध्यम का काम कर सके...लेकिन संविधान के इस अनुच्छेद पर केंद्र में हमारी कितनी सरकारें ईमानदारी से काम करती दिखीं...हालत ये है कि संविधान लागू होने के 59 साल बाद भी हिंदी अपने हाल पर ही रो रही है...पिट रही है...आखिर पिटे क्यों नहीं...हिंदी के लिए आवाज़ उठाने वाला कौन है...हिंदी भी अनुसूची में शामिल देश की 18 अधिकृत भाषाओं की तरह ही सिर्फ अधिकृत भाषा है...इसके आगे कुछ नहीं....

19 टिप्‍पणियां:

  1. सब से पहले तो देखे कि हमारा संविधान किस भाषा मै लिखा है, क्योकि हमारा संविधान भी तो हमारा लिखा नही, इसे भी तो हम युरोप के अलग अलग देशो से ले कर आये है, रही बात हिन्दी की जिने मान सम्मान की चिंता नही वो ही हिन्दी का विरोध करते है, हर राज्य की अलग अलग भाषा हो कोई दिक्कत नही, दिक्कत है जब हम उन फ़िरंगियो की भाषा को मान सम्मन देते है, जो हमारे बुजुर्गो को कुता कह कर गये है, हमे बर्वाद कर के गये है

    आप ने लेख बहुत सुंदर लिखा,धन्यवाद

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  2. सार्थक चिन्तन.....हम बदलेंगे, युग बदलेगा...

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  3. विचारणीय मुद्दा और बेहतरीन विश्लेषण.

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  4. हा हिन्दी, तेरी दुर्दशा देखि नहि जाई !

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  5. खुशदीप भाई ..
    इसमें चिंता के कोई बात नहीं है ये अपने जितने भी राष्ट्रीय ......खेल, गान,गीत,पिता,ध्वज,भाषा,पशु,पक्षी,...जितने भी हैं ...टोटल के साथ एक दम वही फ़ीलींग है..सबको बराबर इज्जत-बेइज्जत किया जाता रहा है । दिस इस परंपरा भाई मियां ...और आप तो जानते हैं ..परंपरा हमारे लिए कितनी इंपोर्टेंट है जी ॥

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  6. Aakhir hum jayen to jayen kahan nyay maangne ke liye, khushdeep Bhai.....
    Jai Hind...

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  7. खुशदीप जी, बहुत चर्चा हो चुकी है हिन्दी की दशा-दिशा पर। हिन्दी खुद ही पनप रही है एक दिन सब को जवाब भी देगी।

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  8. ये तो यहाँ की रीत है बन्धु...चिस चीज़ को ठिकाने लगाना होता है हमारे देश में..उसे ही सम्मान सहित'राष्ट्रीय' का दर्जा दे दिया जाता है

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  9. हमारे देश में राष्ट्रगीत है, राष्ट्रगान है , राष्ट्रीय खेल है, राष्ट्रीय पक्षी है, राष्ट्रीय...

    याने कि सब कुछ राष्ट्र से सम्बन्धित है क्योंकि भारत एक राष्ट्र है, एक राज नहीं। पर विडंबना यह है कि इस राष्ट्र की कोई राष्ट्रभाषा नहीं है। भाषा के मामले में भारत राष्ट्र नहीं नहीं राज है।

    हिन्दी को राष्ट्रभाषा बनाने के लिये आत्मशक्ति की आवश्यकता है जो कि शासन में न तो था और न ही है। शासन में शक्ति नही है विरोधियों को दबाने की, वह तो सिर्फ तुष्टिकरण के सहारे ही चलती है।

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  10. शर्मासार कर दिया इस घटना ने उन्हे जो हिन्दी प्रचार प्रसार के लिए लगे है। आखिर हम देश से बाहर विदेशो में लोगो से कैसे कहें कि आप लोग हिन्दी बोलें और इसके विकास में अपना योगदान दें। उस भाषा का क्या हो सकता जहाँ उसे उसी के देश में प्रतिरोध का सामना करना पड़े और साथ ही गालियाँ भी खानी पड़े। ये बेअक्ल शायद ये भूल जाते है कि हिन्दी हमारी मातृ भाषा है, और उसकी इज्जत करनी चाहिए।

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  11. खुशदीप जी,
    महाराष्ट्र मे हिन्दी को लेकर आम जनता को कोई समस्या नही है| आप महाराष्ट्र मे कही भी जायेँ, हिन्दी मे बात करे, जिसे हिन्दी बोलते नही आती वह आपको मराठी मे जवाब देगा लेकिन आप क्या कह रहे है वह समझ जायेगा| किसी को शीकायत है तो वह है राज ठाकरे नामका गुण्डा|
    ऐसे भी कल जो कुछ हुआ वह राज ठाकरे और अबू आजमी की व्यक्तिगत खुन्नस ज्यादा है| अबू आजमी के बाद २ विधायको ने हिन्दी मे, एक विधायक ने अँग्रेजी मे, २ विधायको ने सन्स्कृत म शपथ ली| उन्हे कोई कुछ नही बोला|
    राज ठाकरे जैसे गुण्डे को शायद यह मालूम नही कि महाराष्ट्र मे गोण्दिया नाम का एक शहर है जिसकी नगर पालिका पुर्णत: हिन्दी मे काम करती है| विदर्भ के अधिकतर जिलो/नगरो मे मराठी कम हिन्दी ज्यादा बोली जाती है|

    मै कर्नाटक, केरल और तमिळनाडू मे भी रहा हूँ| तमिळनाडू मे पूरे ५ साल| चेन्नई/मदूरै जैसी जगहो पर मैने खुलकर हिन्दी प्रयोग की, मुझे टूटी फूटी हिन्दी मे ही सही लेकिन जवाब मिला| आज वहाँ भी लोग हिन्दी सीख रहे है, स्कूलो मे नही तो प्रायवेट सस्थानो मे| हिन्दी फिल्मे अच्छा व्यबसाय कर रही है|

    कुल मिला कर यही कि हिन्दी थोपे नही, लोगो को हिन्दी परिवार मे सम्मिलित करे तभी हिन्दी का भला होगा|

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  12. dear brother
    i want to share some of my observation regarding national things.

    1- national animal - TIGER :- EXTINCT IN INDIA, only few tigers are striving hard for there life.

    2- national bird :- peacock :- evrybody know about the status of peacocks in india. u can see people saling its feathers in deepawali how can it be possible to sale huge amount of peacock feather without killing them . so they are also on verge of extinct

    3-national river- Ya hamari apni Ganga jo ki maili ho gayi kharabo rupaye spend ke baad bhi maili ki maili rah gayi.

    4- national song:- Vandematram : do i require to say something everybody knows about bawal behind it

    5- national game- hocky u know how this classical game is on the verge of its end.

    6- last but not least hindi so everybody has seen this incidence. mujhe kahabharat ki dropadi ki yaad aa gayi shayad isi tarah wo bhi roi hogi par fortunatly wahan mahan purush (MARD) krishn they per yahan to saare shikhandi hai.

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  13. दिवेदी जी ने सही कहा है। अपकी आभारी हूँ कि मेरी अनुपस्थिति मे भी आपने मुझे उत्साहित किया और नतीज़ा आपके सामने है अब फिर से लौट आयी हूँ धन्यवाद और शुभकामनायें

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  14. ख़ुशदीप भाई, जो राज ठाकरे के गुंडों ने किया वो वाकई शर्मनाक़ है, लेकिन उसके बाद जो ख़बरिया चैनलों ने किया वो भी कोई ताली पीटने लायक़ नहीं था। कल इसी राष्ट्रभाषा के मुद्दे पर अपने ब्ल़ॉग पर लिखा है।
    http://isibahane.blogspot.com

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  15. कौंग्रेस ने पंजाब को बर्बाद किया था भिंडरावाला पैदा करके , कई निर्दोषों को अपनी जान से इसकी कीमत चुकानी पडी थी ! एपी कौंग्रेस और एनसीपी( दोनों ही एक ही थाली के चट्टे बट्टे है) महराष्ट्र में राज ठाकरे को पैदा कर पता नहीं इस देश को कौन सी कीमत अदा करने को तैयार रहने का इशारा दे रहे है ! जैसा कि मैं कई बार कह चुका कि यह कौंग्रेस देश को बर्बाद करके ही छोडेगी ! गौर से देखो तो १९४७ का देश का बँटवारा भी इसी कौंग्रेस की ही दें थी ! सत्ता में बैठे इन लोगो ने शर्म तो बेच खाई है ! जब राज ठाकरे इतने दिनों से कह रहा था कि वह विधानसभा में अपनी नीचता दिखायेगा ही, तो इस कौंग्रेस ने पहले से प्रबंध क्यों नहीं किये थे ? सब मिली भगत है ! और एक बात और समाज वादी पार्टी का वह एम् एल अ भी अपनी पार्टी की संस्कृति के हिसाब से फिट निकला क्योंकि पैर से चप्पल पहले उसी ने निकाली थी ! देखने वाली बात यह है कि इतनी बड़ी घटना के बाद भी कौंग्रेस ने क्या किया ? राज ठाकरे एक आतंकवादी है और आतंकवादी के लिए देश में अलग कानून है ! लेकिन क्या करे ;
    MOST INEPT AND SHAMELESS GOVERNMENT COUNTRY EVER HAD SEEN.

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  17. Main aajkal bahut tension mein hoon ......man kar raha hai...ki ek revolution leke aaun...... jismein sirf hindi hi ho..... udhaar ki bhaashaayen nahin..... aur yeh jitne bhi log jo gandi politix kar rahe hain...... inko khatm kar doon..... aur ek naya bharat banaun..... jismein sirf ek dharm hoga ...wo hai insaniyat ka....sirf ek bhasha hogi....wo hindi.... sirf ek zaat hogi...wo hai..dayaa ki... samprabhuta ki....

    jo bhi aadmi anti-nation activity mein lipt paya jayega sirf ek sazaa hogi...wo hai instant maut ki....na koi sunwai....na koi court.... na koi judge ...na koi waqeel..... tabhi yeh desh sudhrega......

    JAI HIND,
    JAI HINDI,
    JAI BHARAT....


    VANDE MAATRAM.....

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  18. बहुत बढ़िया लिखा है।
    इस देश में जो हिन्दी न समझने की बात कहता है, समझो ढोंग कर रहा है।

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  19. हिंदी सिर्फ राजभाषा है, राष्ट्रीय भाषा नहीं, ये अच्छी जानकारी मिली.
    आभार.
    ये वोट की राजनीति है.

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