गुरुवार, 22 अक्तूबर 2009

सुख और दुख का फर्क...खुशदीप

हर आदमी सुख की तलाश में मारा-मारा फिरता है...यही चाहता है कि दुख का उस पर या उसके परिवार पर साया भी नहीं पड़े...लेकिन सुख और दुख में बड़ा महीन फर्क होता है...अगर उस फर्क को कोई समझ ले तो पूरी ज़िंदगी सुख के साथ बिता सकता है...

सुख को दुख से अलग करने वाला ये फर्क है सिर्फ एक रुपये का...जी हां...सिर्फ एक रुपये का...आप कहेंगे कि एक रुपये में आता ही क्या है...जो ये हमें सुखी बना देगा...मेरा कहना है बना सकता है ये आपको सुखी या दुखी...

बस इसका इतना सा फलसफा है कि मानिए अगर आपकी महीने की आमदनी 100 रुपए (सिर्फ मानिए) है और आपका खर्च 99 रुपए है तो आप ज़िंदगी भर सुखी रहेंगे...लेकिन अगर आपकी आमदनी 100 रुपए ही रहती है और आपका खर्च 101 रुपए होता है तो आप जीवन में हमेशा दुखी रहेंगे...है न सिर्फ एक रुपये का फर्क...अब ये हमारे हाथ में ही है अपने को सुखी या दुखी रखना...

स्लॉग ओवर
शहर के माचो लड़कों की क्या ख्वाहिश होती है...
220 सीसी पल्सर
या
225 सीसी करिज्मा
या
350 सीसी रायल एनफील्ड्स
या
1300 सीसी हायाबूसा ब्रैंड की सुपरबाइक खरीदना...

जानते हैं क्यों...
सिर्फ एक 80 सीसी की स्कूटी का पीछा करने के लिए...

22 टिप्‍पणियां:

  1. छोटी सी पोस्ट में बहुत बड़ी बात कह दी आपने और अपुन इती लम्बी-लम्बी पोस्ट में इत्ती ज़रा सी बात को खींच डालता है :-)

    स्लॉग ओवर बहुत ही मज़ेदार रहा

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  2. इसे कहते हैँ त्वरित टिप्पणी...पोस्ट पूरे एक बजे और टिप्पणी 1.04 बजे :-)

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  3. राजीव तनेजा दा जवाब नहीं...

    जय हिंद...

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  4. अरे भाई, अपुन भी ठीक पीछेइच है बोले तो टाइम पे क्या ?? सटीक बात बोला भाऊ ! एक दम बोले तो झकास ज्ञान दिया है !! १ रुपये का कीमत समझा दिया सब को !
    और स्लोग ओवर भी मस्त था !

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  5. वाकई एक रुपये में कितना कुछ बदल जाता है...

    स्लॉग ओवर-मस्त!

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  6. बहुत सुंदर, इसी लिये आज सभी दुखी है, आमदन १०० ओर खर्च २०० का करते है, लेकिन खुशहाल जी हम आप के हिसाब से ही चलते है अगर १०० कमाये तो ९० ही खर्च किये,
    धन्यवाद

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  7. सिर्फ एक रुपये में सुख और दुःख के बीच इतना अंतर हो जाता है ...इतनी गहराई से सोचा ही नहीं होगा किसीने ...
    स्लोग ओवर हमेशा की तरह शानदार ...!!

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  8. bahut hi saral shabdon me bahut badi philosophy sikha gaye Khushdeep bhai.... shukriya

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  9. महज एक रूपये से आपने इतना बडा सन्देश दे दिया. अब कही से सौ रूपये मिले तो मै तो पूरे सौ रूपये ही बचा लूँगा.

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  10. वाकई आपने एक रुपये का महिमा मंडन कर दिया।
    ८० सीसी तो वाकई मस्त!!

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  11. दोनो एपिसोड मस्त हैं जी, यानि एक रुपया और ८० सीसी.:)

    रामराम.

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  12. यह पोस्‍ट बडी शिक्षा दे रहा है .. पर ये गांव में अपने घर में रहनेवाले हर वर्ग के लोगों के लिए ही संभव था .. या फिर शहर में रहनेवाले उच्‍च मध्‍यम वर्ग के लोगों के लिए जिनकी तनख्‍वाह अधिक है .. वो इस नियम का पालन कर सकते हैं .. पर कम कमाई वाले क्‍या करें .. सरकार को न तो जनता के स्‍वास्‍थ्‍य से मतलब है और न शिक्षा से .. सारा काम आपको खुद से ही करना है .. यहां तक कि मकानों के किराए सुरसा के मुंह की तरह बढते जा रहे हैं .. 100 रू में 99 रू ही खर्च करने की सलाह देना आज के जमाने के लिए अव्‍यावहारिक है .. इसी लिए 'Cut your coat according to your cloth' की जगह 'Arrange for the cloth according to the size of coat' ने ले ली है !!

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  13. 99 वाला भी दुखी रहता है कि वह सौ क्यों नहीं खर्च कर सकता। नानक दुखिया सब संसार!

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  14. आमदनी अठन्नी खर्चा रुपैया भैया
    ना पूछो ना पूछो हाल
    नतीजा ठन ठन गोपाल ...

    सबको 99 के फेर में डाल रहे हो गुरू!

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  15. अच्छी सोच है...और स्लोग ओवर ने तो बड़ी सी smile ला दी चेहरे पर...शुक्रिया

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  16. स्लौग ओवर में गूगली मार दी आज आपने ..............
    बाखूबी समझाया है सुख दुःख का अंतर भी ..........

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  17. वाकई बहुत थोड़े शब्दों में बड़ी बात कह दी आपने

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  18. Filhaal main bahut dukhi hoon aajkal..... Khushdeep Sir.....


    meri nayi post dekhiyega....



    JAI HIND...

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  19. चलिये सुख -दुख पर एक कविता सुन लीजिये -
    बड़े लोगो ने अपने दुख
    बड़े करके देखे
    छोटे लोगो ने करके देखे छोटे
    इस तरह छोटे लोग बड़े हुए
    और बड़े लोग हुए छोटे
    ----- शरद कोकास ( सुख -दुख की कवितायें से )

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  20. सुख और दुःख में सिर्फ एक रुपये का फर्क होता है...!!!
    सीधी सरल भाषा में गहन से गहन बात कहने की कला आपको बखूबी आती है...
    आपके ब्लॉग पर कुछ न कुछ सीखने को ही मिलता है...
    आभारी हैं आपके...

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