सोमवार, 19 अक्तूबर 2009

गंदा है पर धंधा है ये...खुशदीप

ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ जल्द ही शुरू होने वाली वन डे सीरीज के लिए भारतीय टीम चुन ली गई है...बताया जाता है कि कप्तान महेंद्र सिंह धोनी के कहने पर राहुल द्रविड़ को बाहर का रास्ता दिखाया गया...लेकिन लाख जोर लगाने पर भी धोनी अपने चहेते आर पी सिंह को टीम में जगह न दिला सके...यानि धोनी और सेलेक्टर्स के बीच टीम के चयन को लेकर मतभेद खुल कर सामने आ गए...

इस खींचतान से पहले क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड के चीफ ए़डमिनिस्ट्रेटिव आफिसर रत्नाकर शेट्टी नए खिलाड़ियों के व्यवहार को लेकर इतने क्षुब्ध नजर आए कि बोल ही पड़े...नए खिलाड़ी इतने बड़े हो गए हैं कि उन पर काबू रखना मुश्किल हो रहा है...ये खिला़ड़ी घरेलू क्रिकेट खेलना ही नहीं चाहते...

बस जहां पैसे, मीडिया, ग्लैमर की चमक दमक हो ये खिलाड़ी वहीं दिखना चाहते हैं...इनके लिए क्रिकेट की प्रैक्टिस से ज्यादा विज्ञापन फिल्मों की शूटिंग के लिए रिहर्सल अहम हो गई है...धोनी इस साल पचास करोड़ रुपये से ज़्यादा कमाने जा रहे हैं...इसमें क्रिकेट से होने वाली कमाई सिर्फ 20 फीसदी है...अस्सी फीसदी से ज़्यादा कमाई ब्रैंड एंडोर्समेंट (विज्ञापन) से ही होगी...धोनी दुनिया में सबसे ज़्यादा कमाई वाले क्रिकेटर तो है हीं देश में भी शाहरुख खान को छोड़कर बड़े से बड़ा फिल्म स्टार भी धोनी के मुकाबले विज्ञापन से होने वाली कमाई के मामले में कही नहीं टिकता...

अब हर युवा क्रिकेटर के लिए भी देश से खेलने से ज्यादा बड़ा सपना धोनी की तरह एड फिल्मों से कमाई हो गया है...लेकिन ये सपना देखने वाले भूलते जा रहे हैं कि क्रिकेट है तो इन खिलाड़ियों का वजूद है...अगर क्रिकेट ही नहीं होगा तो इन्हें कौन पूछने वाला होगा...आज क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड टीम के लिेए खिलाड़ियों के स्तर के हिसाब से चार ग्रेड के मुताबिक खिलाड़ियों को सालाना मेहनताना देता है...अब खिलाड़ी खेले या न खेले उसे ग्रेड के हिसाब से सवा लाख रूपये से पांच लाख रुपये हर महीने बोर्ड से मिलना तय है...यानी ग्रेड प्राप्त जूनियर से जूनियर खिलाड़ी को भी देश के वरिष्टतम नौकरशाह से भी ज्यादा वेतन मिलता है...

आखिर क्रिकेट मैच देखते हुए हमारे मन में वैसा रोमांच क्यों नहीं होता जैसा कि दो दशक पहले होता था...जसदेव सिंह, सुशील दोषी, मुरली मनोहर मंजुल की रेडियो पर कमेंट्री सुनते हुए दिल की धड़कने ऊपर-नीचे होती रहती थीं...खिलाड़ियों और क्रिकेट प्रेमियों में एक ही जज़्बा रहता था भारत की जीत का...सुनील गावस्कर, कपिल देव, विश्वनाथ, मोहिंदर अमरनाथ...एक से बढ़कर एक नाम...देश के लिए अपना सब कुछ झोंक देने को तैयार...

लेकिन अब क्रिकेट से भी ज्यादा अहम क्रिकेट का तामझाम हो गया है...रात के अंधेरे को चौंधियाती रोशनी में उजाला कर रंगीनी में डूबे स्टेडियम, टीवी प्रसारण अधिकार, एक से बढ़कर कैमरे...चीयर्स लीडर्स के मादक डांस...यानि वो सब कुछ जो क्रिकेट को खेल से ज़्यादा पैसा बनाने का जरिया बनाता है...

क्रिकेट का नया गणित भी यहीं से शुरू होता है...आज बेशक हम 15 दिन पहले हुई सीरीज को भूल जाएं, हमें ये भी याद न रहे भारत ने इस साल कितने मैच खेले हैं...लेकिन क्रिकेट से खेल जारी है...मैदान में चीयर्सलीडर तो है चीयर्स नहीं...दर्शकों में वो जुनून नहीं जो क्रिकेट को धर्म और खिलाड़ियों को भगवान का दर्जा दिला देता था...ऐसे में यही कहना पड़ेगा...दिस इज़ नॉट क्रिकेट...पर क्या करें...गंदा है पर धंधा है ये...
 
स्लॉग ओवर
नर्सिंग होम में स्वीपर का काम करने वाली कमला दनदनाती हुई चेयरमैन और प्रबंधक ड़ॉक्टर के केबिन में घुस गई...जाते ही दहाड़ते हुए बोली...डॉक्टर साहब ये तो कोई बात नहीं हुई...शीला को आपने प्रैग्नेंट किया...रेखा को आपने प्रैग्नेंट किया...सुनीता, विमला किस-किस का नाम गिनाऊं...आखिर मुझमें क्या कमी है...हमें भी काम करते साल से ज़्यादा हो गया...हमें तो किसी ने प्रैग्नेंट नहीं किया...आज तो मैं जवाब ले कर ही जाऊंगी कि आखिर कब करोगे प्रैग्नेंट....

(दरअसल कमला का कहने का मतलब था परमानेंट...अंग्रेजी बोलने के चक्कर में परमानेंट का प्रेग्नेंट हो गया था)

18 टिप्‍पणियां:

  1. गंदा है पर धंधा है ये...जान इसी लिये हम कभी भी इस क्रिकेट को नही देखते( सिर्फ़ भारत ओर पाकिस्तान के मेच को छोड कर) ओर यह बी बहुत कम, क्योकि हम बहुत पहले समझ गये थे कि...गंदा है पर धंधा है ये...
    ओर आप का यह स्लॉग ओवर तो सच मै बहुत अच्छा है बिलकुल चॊके छक्के की तरह से मजा आ गया:) कमला तो बेचारी कमली है जी...
    बहुत मजेदार , ओर लेख भी बहुत अच्छा.
    धन्यवाद

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  2. स्लॉग ओवर...हा हा हा हा!!


    बाकी तो खेल से ज्यादा राजनिति बन गई है क्रिकेट टीम चयन प्रक्रिया.

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  3. गन्दगी हर धन्धे मे पैठ बनाती जा रही है
    चलो ये तो पता चला क्रिकेट भी एक धन्धा है मै तो इसे खेल समझ रहा था.
    स्लाग ओवर
    हा हा हा हा

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  4. भई यह सब धन्धे की बात सुनने से पहले तक तो हम सेंस मे थे लेकिन सुनते ही नॉनसेंस हो गये ( दर असल कहने का मतलब सेंसलेस था अंग्रेजी बोलने के चक्कर मे नॉनसेंस हो गया ..क्रिकेट मे भी यही हुआ है )

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  5. "अनाड़ी का खेलना...खेल का सत्यानाश"...
    ये मैँने क्रिकेट के लिए नहीं कहा बल्कि आपकी स्लॉग ओवर वाली कमला के लिए कहा है।

    च्च...बेचारी!..अँग्रेज़ी बोलने चली थी...और उसी की टाँग तोड़ के रख दी।


    रही क्रिकेट की बात तो वो अब खेल कहाँ रह गया है?..अब तो उसे धन्धा कहें तो ज़्यादा बेहतर

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  6. आज के जमाने में सब कुछ धंधा ही तो हो गया है चाहे वह शिक्षा हो या चिकित्सा या फिर खेल। क्रिकेट यदि धंधा न होता, और सही अर्थों में गंदा धंधा न होता, तो आज भी क्रिकेट के स्थान पर हमारे देश में हमारे राष्ट्रीय खेल हॉकी की ही तूती बोलती होती़।

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  7. परमानेंट वाला किस्सा यंहा के बड़े नेता भी जुड़ा हुआ है और हम लोग सालो से उसे सुन रहे है,लेकिन जो मज़ा आज आया उसकी बात ही कुछ और है,और हां ये तो सच है गंदा है मगर धंदा है चाहे कोई भी हो…………………॥

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  8. हा हा हा बडिया है। खुशदीप जी 3-4 दिन से बीमार होने से आपके ब्लाग पर नहीं आ पाई क्षमा चाहती हूँ। वीरान्चल गाथा [ापने ब्लाग] पर आपका अगस्त माह का कमेन्ट आज देखा। अब उस ब्लाग पर भी जल्दी लिखूम्म्गी । धन्यवाद।

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  9. इसीलिए हमने तो अंग्रेजी बोलनी बहुत पहले छोड़ दी थी.
    वैसे क्रिकेट का ज़नून तो अभी तक है, लेकिन हर साल कोशिश करता हूँ, टिकेट खरीदने की. पर अभी तक कामयाब नहीं हो पाया. कोई पास वास का जुगाड़ हो तो ---.
    भैया, आपका इ-मेल बहुत तलाशा, लेकिन कहीं नजर नहीं आया, सो ब्लॉग पर ही बधाई देकर संतुष्टि पा ली.

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  10. क्या कहने आपके slog over के !!

    बाकी तो सही में गन्दा है पर धंधा है यह !

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  11. आखिर क्रिकेट मैच देखते हुए हमारे मन में वैसा रोमांच क्यों नहीं होता जैसा कि दो दशक पहले होता था...जसदेव सिंह, सुशील दोषी, मुरली मनोहर मंजुल की रेडियो पर कमेंट्री सुनते हुए दिल की धड़कने ऊपर-नीचे होती रहती थीं...खिलाड़ियों और क्रिकेट प्रेमियों में एक ही जज़्बा रहता था भारत की जीत का...सुनील गावस्कर, कपिल देव, विश्वनाथ, मोहिंदर अमरनाथ...एक से बढ़कर एक नाम...देश के लिए अपना सब कुछ झोंक देने को तैयार... haan! yeh bilkul sahi kah rahe hain aap........ ab waisa romanch nahin paida hota........

    ab slog over ke kya kahne........ ab yeh doctor bhi ajeeb hote hain.......

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  12. जोरदार लिखा है .......... क्रिकेट से ले कर परमानेंट तक .........

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  13. बहुत बेहत्रीन शाट खेला है.

    रामराम.

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  14. आखिर इन क्रिकेटर्स को सर पर भी तो हमें हमने ही चढाया है.....

    ... इनका तो प्रेग्नेंट सॉरी परमानेंट इलाज करना चाहिए :)

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  15. और ये बहुत ही बढ़िया शाट खेला खुशदीप जी आप ने........

    स्लॉग ओवर तो हमेशा की तरह् बढ़िया है :)

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