सोमवार, 5 अक्तूबर 2009

अब कोई जय हिंद क्यों नहीं कहता...

नन्हा मुन्ना राही हूं देश का सिपाही हूं...
बोलो मेरे साथ जय हिंद, जय हिंद, जय हिंद...
साठ के दशक के शुरू में निर्देशक महबूब खान की बनाई फिल्म सन ऑफ इंडिया का ये गीत एक वक्त देश के हर बच्चे की ज़ुबान पर था...कल ये जय हिंद का उद्घोष मेरी पोस्ट पर लखनऊ के महफूज़ अली भाई ने शिद्दत के साथ याद दिला दिया...दरअसल मैंने अपनी पोस्ट में हैलो शब्द के बारे में जिज्ञासा जताते हुए पूछा था कि क्या हम सवा अरब भारतीय हैलो की जगह फोन पर कोई ऐसा ठेठ देसी शब्द नहीं इस्तेमाल कर सकते जिसमें भारतीयता की झलक दिखाई दे...अगर हम सब उस शब्द को बोलने लगे तो वो कितनी जल्दी पूरी दुनिया पर छा जाएगा...इसी प्रश्न के जवाब में महफूज़ भाई ने ये प्रतिक्रिया भेजी...

हैलो बोलने की बजाय हम हिंदुस्तानी "हरि ओम" शब्द का इस्तेमाल कर सकते हैं...अगर मुस्लिम हैं हरि ओम बोलने में दिक्कत है तो "असल्लाम वालेकुम" का इस्तेमाल कर सकते हैं...अगर ईसाई हैं तो "हैलो" ही चलेगा...और अगर सिख हैं तो "सत श्री अकाल"...पर अगर धर्म से ऊपर उठना है तो "जय हिंद" से अच्छा कुछ नहीं है...ये सबके लिए यूनिवर्सल है...
महफूज़ भाई की टिप्पणी के बाद ही कनाडा की अदा ने और भी दिल खुश कर देने वाली टिप्पणी भेजी...

मुझे महफूज़ जी की 'जय हिंद' वाली बात बहुत ज्यादा भायी है... महफूज़ साहब बहुत बहुत शुक्रिया .....आज से ही जब भी भारत कॉल करुँगी पक्की बात है 'जय हिंद' ही कहूँगी...कनाडा में रहती हूँ इसलिए सबसे तो नहीं कह पाउंगी लेकिन अपनी इंडियन कम्युनिटी में यह बात बताने की ज़रूर कोशिश करुँगी....Italic

इन दोनों की बात पढ़ने के बाद एक प्रण मैंने भी अपने साथ किया...अब मैं अपनी हर टिप्पणी में "जय हिंद" का इस्तेमाल ज़रूर करूंगा...साथ ही अभिवादन के लिए, फोन पर हो या साक्षात, ज़्यादा से ज्यादा "जय हिंद" का प्रयोग करने की कोशिश करूंगा...इस हद तक कि ये मेरी आदत ही बन जाए... 
मुझे एक बात और याद आ रही है...दिवंगत प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी जब भी कहीं भाषण देती थीं, तो अंत तीन बार ज़ोर ज़ोर से "जय हिंद" के नारे से ही करती थीं...और सुनने वाले भी ये नारा लगाने में गले की पूरी ताकत के साथ देते थे...

क्या वजह है कि आज "जय हिंद" कहना बिल्कुल ही गायब हो गया है...पहले बच्चों से "जय हिंद" का गीत गवाने में माता-पिता अपनी शान समझते थे...उनकी ख्वाहिश भी ये होती थी कि ...नन्हा मुन्ना राही हूं, देश का सिपाही हूं... गीत गाने वाला बच्चा बड़ा होकर भी सेना में शामिल होकर देश की सेवा करेगा...लेकिन आज ऐसे अभिभावक बहुत कम ही होंगे जो अपने लाडलों को मातृभूमि की रक्षा के लिए सेना में भेजने की सोचते हैं...अगर ऐसा नहीं होता तो हमारी सेना को आज अफसरों की कमी का सामना नहीं करना पड़ता...एनडीए और आईएमए जैसी संस्थाओं में सीटें खाली पड़ी नहीं रह जातीं...दरअसल आर्थिक सुधारों ने देश को विकास की धार तो दी लेकिन साथ ही ज़्यादा से ज़्यादा पैसे कमाने को ही ब्रह्म-वाक्य बना दिया...सेना की जगह आईआईएम से एमबीए करना ज़्यादा बड़ा ख्वाब हो गया है...ठीक है आप जिस फील्ड को भी करियर बनाएं लेकिन "जय हिंद" कहना तो नहीं भूलें...
 
स्लॉग ओवर
"राखी के स्वयंवर"
के बाद नया रियल्टी शो आने वाला है "राखी का हनीमून"...शो के निर्माताओं ने इसके प्रचार के लिए प्रोमो बनाया...जो कोई इस शो में हिस्सा लेने के इच्छुक हैं...जल्दी आवेदन करें...क्योंकि बेड्स सीमित संख्या में ही उपलब्ध हैं...

15 टिप्‍पणियां:

  1. अपनी कुछ पोस्टस के अंत में मैने 'जय हिन्द' का प्रयोग अवश्य किया था लेकिन इसे आदत नहीं बना पाया...जिसका मुझे अफसोस है...आईन्दा मेरी पूरी कोशिश रहेगी कि मैँ अपनी दैनिक ज़िन्दगी में 'जय हिन्द' का प्रयोग ज़्यादा से ज़्यादा करूँ...


    आपका स्लॉग ओवर हर बार चेहरे पे मुस्कुराहट दे जाता है...

    आपसे एक बात जानना चाहता था कि आपका राखी से कोई पिछले जन्म का वैर तो नहीं है?...वो आप उसका कूंडा करवाने की सोच रहे थे ना...इसलिए......
    :-)

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  2. जय हिन्द कहना तो सचमुच गर्व की बात है। मुझे याद है कि जब मैं स्कूल में पढ़ता था तो हम आपस में अधिकतर जयहिन्द ही कहा करते थे।

    किन्तु हमारे बुजुर्ग हमें बताया करते थे कि 'जयहिन्द' से भी पहले 'वन्दे मातरम' कहने में ही लोग गर्व किया करते थे क्योंकि उनके समय में बंकिमचन्द्र जी के वन्दे मातरम् गीत को ही राष्ट्रगीत माना जाता था।

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  3. हमारे यहाँ तो आम संबोधन 'जैराम जी की" या 'जै सियाराम' है।

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  4. मयूर विहार इलाके स्थित बैंक ऑफ़ इंडिया के ब्रांच मेनेजर जय हिंद बोलते हैं... कुछ स्वयं सेवक संघ के कार्यकर्ता भी जय हिंद बोलते हैं... सुझाव अच्छा है लेकिन मनोहर श्याम जोशी के शब्दों में 'सम हाउ इम्प्रोपेर...."

    स्लोग ओवर मस्त है...
    एक ठो बेड का जुगार होगा क्या? :) आपके बादे सही :):) :)

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  5. जय हिंद कहने में कोई प्रॉब्लम नहीं हाँ इससे आगे मत बढ़ना कि वन्दे मातरम क्यूँ नहीं कहते.

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  6. खुशदीप जी, आपने निशाने पर चोट की है. अब से सिर्फ जय हिंद

    सलीम मियां आपसे किसी ने "वन्दे मातरम" के लिए कहा भी नहीं है, आप "नारा ए तकबीर......" में मगन रहो.
    वन्दे मातरम. जय हिंद

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  7. आपको जान ख़ुशी होगी, मैं और मेरे कुछ मित्र आपस में 'जय हिंद' का ही प्रयोग करते है अभिवादन के लिए |
    कोशिश यही रहेती है कि सब के साथ यही लागू किया जाए पर जब सामने से जवाब में कुछ सुनता हूँ या कोई जवाब नहीं पता हूँ, तो दोबारा 'जय हिंद' का अपमान नहीं करवाता |
    हाँ, समझा तो जरूर देता हूँ कि 'जय हिंद' का जवाब सिर्फ़ और सिर्फ़ 'जय हिंद' ही होता है!

    बढ़िया पोस्ट !

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  8. Sarkar ke sare radio channels aaj bhi 0pening-closing 'Jai Hind' se hi karte hain...

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  9. आइडिया तो अच्छा है, लेकिन इम्प्लीमेंट करने के लिए बहुत शुभकामनाओं की ज़रुरत पड़ेगी.
    वैसे हैलो की जगह नमस्कार कैसा रहेगा.

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  10. आवेदन किया था..... लेकिन सारे सिमित बेड पहले से ही बुक हो चुके थे.... My hard luck.......:(

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  11. गर्व से कहो हम हिंदुस्तानी !

    आज से अपुन भी आप ही की राह पर......

    'जय हिंद'

    स्लोग ओवर:):)

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  12. आप सभी ब्लागर बन्धु कृपया डा.सुरेश अवस्थी के द्वारा लिखित यह लेख - "इंग्लैंड में बही हिंदी की नदी" जरूर पढ़ें !

    यहां पर - http://in.jagran.yahoo.com/sahitya/?page=article&articleid=2254&category=5

    'जय हिंद'

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