बुधवार, 23 सितंबर 2009

चाणक्य की राजनीति का पहला पाठ...

राजनीति के आदिगुरु चाणक्य ने करीब दो हजार साल पहले अपने शिष्य चंद्रगुप्त को राजनीति का पहला पाठ पढाया था तो खीर भरी थाली का सहारा लिया...पाठ ये था कि थाली के बीचोंबीच मुंह मारने की जगह पहले किनारों से खाना रणनीतिक दृष्टि से श्रेयस्कर होता है...यानी पहले अपनी बाहरी किलेबंदी को मज़बूत करो, फिर केंद्र में आओ...

2000 साल बाद...

आज की राजनीति का पहला पाठ...

देश की राजनीति का आज सबसे बड़ा सच क्या है...हर नेता को चिंता है कि जीते-जी खुद सत्ता-सुख उसकी चेरी बना रहे..और रिटायरमेंट लेने से पहले ही अपने वारिसों को राजनीति की विरासत के साथ स्थापित होते देख लिया जाए...लेकिन एक नेता जी ने अपनी राजनीतिक पारी कुछ लंबी ही खेल ली... 70 पार जाने के बाद भी उनका रिटायरमेंट जैसा कोई इरादा नहीं बन रहा था...ये देख-देख कर नेताजी का बेटा व्याकुल होने लगा...एक दिन उसने पिता को घेर ही लिया...अब आप बस भी करिए...बहुत कर ली आपने राजनीति...अब तो आराम से घर बैठिए और राजनीति करने के लिए...मैं हूं ना...बस अब आपके पास जो भी गुर हैं, वो मुझे सिखा दीजिए...नेताजी ने बेटे की अधीरता देखी... कहा...चलो घर की छत पर चलते हैं...छत पर जाकर नेताजी ने बेटे से कहा... अब यहां से नीचे छलांग लगा दो...बेटा अचकचाया...पिता ने दोहराया...जैसा मैं कह रहा हूं, वैसा ही करो... मरता क्या न करता, राजनीति में जो आना था, सो बेटे ने छलांग लगा दी..नीचे गिरने पर बेटे की टांग टूट गई...फ्रैक्चर हो गया...थोड़ा होश आया तो बेटे ने नेताजी से कहा...ये कौन सा बदला लिया...मैंने आपसे राजनीति सिखाने को कहा और आपने मेरा ये हाल कर दिया...इस पर नेताजी का जवाब था...यही राजनीति का पहला पाठ है...अपने बाप की भी बात पर भरोसा न करो...

स्लॉग ओवर
मक्खन एक पार्टी में यार-दोस्तों के साथ ज़्यादा ही टल्ली हो गया...झूमता...लड़खड़ाता घर आया...मक्खनी ने दरवाजा खोला...मक्खन ने आधी बंद आंखों से ही देखा और बोला...सॉरी मैडम...लगता है गलत कॉल बेल बजा दी...
मक्खनी पहले से ही भरी बैठी थी...फट पड़ी...बस यही नौबत आनी रह गई थी...नशे में इतनी अक्ल मारी गई कि पत्नी को भी भूल गए...
मक्खन...माफ़ करना बहन, नशा आदमी को बड़े से बड़ा गम भुला देता है...

14 टिप्‍पणियां:

  1. नेताजी का बेटे को सबक सही था, आज की राजनीति के लिए। और मक्खन ने कितने पैग लगाए थे? मक्खनी की पहली बात में ही नशा हवा हो गया।

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  2. काश कि चाणक्य महोदय का सामना औरँगज़ेब से न हुआ, वरना... ऽ ऽआ, वरना क्या ?
    वरना वह टूटी टाँग का बादशाह कहलाता और क्या !

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  3. भई वाह!!!!

    अभी पहला पाठ ही है.........

    आशा है की आप आगे भी इसी तरह लिखते रहेंगे ...

    स्लॉग ओवर बढ़िया ही है :)

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  4. महाराष्ट्र मे यही कहानी शिवाजी के नाम से चलती है जहाँ एक व्रद्धा ने उन्हे गर्म खिचड़ी किनारे से खाने की सलाह दी जिस पर अमल कर उन्होने औरंगजेब के खिलाफ छापामार युद्धनीति अपनाई । यह इतिहास का स्लॉग ओवर है ।

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  5. यही राजनीति का पहला पाठ है...अपने बाप की भी बात पर भरोसा न करो...जी प्रभु!! आगे से ध्यान रखेंगे. :)

    स्लॉग ओवर तो टनाटन टेण टण्ण टेण्ण्णा हमेशा की तरह!

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  6. बहुत बढ़िया लिखा है आपने!
    आपसे कुछ गुर हम भी जान लेंगे।
    बधाई!

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  7. बहुते अच्छा प्पाठ है जी और स्लाग ओवर के तो क्या कहने.

    रामराम.

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  8. ऐसे पाठ मत पढ़ाओ भाई, अगर इस पाठ को पढ़ कर लोग अपने बाप की बात पर भरोसा करना छोड़ देंगे तो हम जैसे बुजुर्ग (खूँसट बुड्ढे) की बात कौन सुनेगा?

    वैसे छाते जा रहे हो गुरू!

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  9. भैया, राजनीति, सीख रहे हो या सिखा रहे हो ?
    दोनों ही किस्से बढ़िया हैं.

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  10. पहला पाठ तो आपने सिखा दिया...अब बाकी की कक्षाएँ कब लेंगे?...

    वैसे अन्दर की बात बता दूँ कि पहले सबक में जो सीखा है...उसी पे अमल करने वाला हूँ मैँ...


    आपका आलेख बढिया लगा लेकिन इस बार का स्लॉग ओवर ज़्यादा.....

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  11. hehehehehe.......khushdeep ji........ sahi kaha aapne.........raajniti mein apne baap pe bhi bharosa mat karo..........

    Dr. Amar Kumar ji se poori tarah sahmat hoon.......... hehehehehe.........

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  12. chaanakya neeti desh ko ekjut kar akhand bhaarat ke nirmaan ki neeti thi, aaj ki neeti desh ko bechkar kha jaane ki neeti hai.. nice post..

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