मंगलवार, 22 सितंबर 2009

ब्लॉगिंग को महेश नहीं, ब्रह्मा-विष्णु चाहिएं

देवा रे देवा...यहां भी राजनीति...ब्लॉगिंग के शैशव-काल में ही कदम-कदम पर उखाड़-पछाड़ की शतरंज...मोहरे चलाने वाले परदे के पीछे...और मोहरे हैं कि कारतूस की तरह दगे जा रहे हैं...ठीक वैसे ही जैसे कस्बे-गांवों के मेलों में बंदूकों से गुड़िया, मोमबत्ती, सिक्का पर निशाना लगाया जाता है...100 में 99 शाट्स या तो खाली जाते हैं या पीछे चादर की दीवार पर लगे गुब्बारों को शहीद कर आते हैं...

अभी कांग्रेस के सर्वज्ञानी पंडित जयराम रमेश को दिव्यज्ञान हुआ था कि वो गांधी में ब्रह्मा, नेहरू में विष्णु और जिन्ना में महेश को देखते हैं...जयराम रमेश के मुंह से ये निकला ही था कि हर कोई लठ्ठ लेकर उनके पीछे पड़ गया...आखिर ये कहा कैसे...जयराम की सोच थी कि गांधी ने देश का निर्माण किया, इसलिए सृष्टि के रचयिता की तरह वो ब्रह्मा हुए...नेहरू आधुनिक भारत के निर्माता यानि पालनहार तो उन्हें विष्णु का दर्जा दिया...और जिन्ना ने देश का विभाजन कराया, इसलिए संहारक की तरह वो महेश हुए...

ये जयराम रमेश का विज़न था...उन्हें नागरिक की हैसियत से अपना विज़न रखने का उतना ही अधिकार है जितना कि हमें और आपको...खैर ये तो राजनीति की बातें हैं...जिसमें कोई नीति न हो, वो राजनीति...

लेकिन ब्लॉगिंग में राजनीति क्यों...हिंदी ब्लॉगिंग ने तो अभी चलना ही सीखा है...दौड़ने के लिए रफ्तार पकड़ने से पहले ही एक-दूसरे की टांग खिंचाई क्यों...क्यों कुछ को महेश बनना पसंद आ रहा है...वो ब्रह्मा-विष्णु बनकर हिंदी ब्लॉगिंग को उस मुकाम तक क्यों नहीं ले जाते, जिसकी वो हकदार है...ताकि फिर कोई विदेशी एडसेंस वेंस अंग्रेजी से लाडली और हिंदी से सौतेली जैसा व्यवहार करने की जुर्रत न कर सके...

बड़ों को जैसा करते देखते हैं, बच्चे भी वैसा सीखते हैं...ब्लॉगिंग के हम रंगरूट भी अपनी ऊर्जा को रचनात्मक दिशा देने की जगह विध्वंस में ही मौज ढूंढने लगेंगे...छोटा मुंह बड़ी बात होगी...ज़्यादा कुछ नहीं कहूंगा, लेकिन फरियाद पर गौर ज़रूर किया जाए मी-लॉर्ड...

स्लॉग ओवर
विदेश में किसी जगह तमाम देशों से क्रैब (केकड़े) मंगाकर प्रोसेस किए जा रहे थे...सभी देशों के क्रैब डब्बों में बंद होकर आए थे...लेकिन जो क्रैब भारत से आए थे उनके डब्बों के ढक्कन ही नहीं थे...ये देखकर सुपरवाइजर बड़ा हैरान हुआ...शिकायत करने यूनिट इंचार्ज के पास पहुंचा...कहा, ये भारत की कंपनी ने क्रैब के डब्बे खुले ही क्यों भेज दिए...अगर ये निकल कर भाग जाते तो...यूनिट इंचार्ज ने पूछा...क्या कोई क्रैब भागा...सुपरवाइजर ने कहा...नहीं, सर...
यूनिट इंचार्ज ने कहा... तो फिर तू क्यों हलकान हुए जा रहा है...अरे बेवकूफ ये भारत के केकड़े हैं...ये बाहर नहीं निकल सकते...एक निकलने की कोशिश करेगा...तो बाकी के दस इसकी टांग खींचकर फिर नीचे ले जाएंगे...

21 टिप्‍पणियां:

  1. आज तो पोस्ट और स्लॉग ओवर में अच्छी जुगलबंदी हुई है।

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  2. आप तो हिंदी ब्लॉगिंग करो और शीर्ष पर पहुँचो........
    अरे बेवकूफ ये भारत के केकड़े हैं...ये बाहर नहीं निकल सकते...एक निकलने की कोशिश करेगा...तो बाकी के दस इसकी टांग खींचकर फिर नीचे ले जाएंगे...
    स्लॉग औवर हमेशा की तरह मस्तम मस्त!

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  3. बढ़िया पोस्ट में विश्लेषण और स्लॉग ओवर के तो आप मास्टर हो लिए हैं. वाह!

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  4. स्लाग ओवर भी पोस्ट की भाषा ही बोल रहा है!!

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  5. स्लाग ओवर नाम से एक नया ब्लॉग ही बना लीजिये !

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  6. वाह बहुत बढ़िया लिखा है आपने! क्या आप एक नया ब्लॉग स्लाग ओवर के नाम से बनाने के बारे में सोच रहे हैं? नवरात्री कि हार्दिक शुभकामनायें!

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  7. वाह!
    बढ़िया जुगलबंदी रही दोनों भागों की
    संदेश साफ है फरियाद का

    बी एस पाबला

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  8. बहुत लाजवाब, स्लाग ओवर मे तो कुछ ज्यादा ही आनंद आया.

    रामराम.

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  9. लिखते तो आप बढ़िया है ही...पर ये आपका स्लॉग ओवर वाला स्टाइल भाई भा गया मुझे.
    एक नया अंदाज और बेहतरीन...बधाई

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  10. भाई हमें तो इशारे समझ में नहीं आते, पहेली बूझने वाले ब्लॉगों पर भी कम ही जा पाते हैं… इसलिये खुलकर कहो कि आखिर किसे आप "महेश" (अर्थात औरों की भलाई के लिये खुद ज़हर का प्याला पीने वाला) कह रहे हैं…। ज़रा खुलकर बतायें…

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  11. सुरेश जी, आप विद्वान हैं..."महेश यानि शिव" के बारे में मुझसे कहीं ज़्यादा जानते हैं...लेकिन मेरी छोटी सी समझ जो कहती है, उसके अनुसार शिव नीलकंठ है...समुद्र मंथन में जब कोई विष पीने को तैयार नहीं हुआ था तो शिव ही विष कंठ में ले गए..सिर्फ इसलिए कि और किसी का अमंगल न हो...और शिव को ये भी माना जाता है कलियुग के बाद सृष्टि का संहार भी वहीं करेंगे जिससे कि फिर सतयुग आए...
    यहां जयराम रमेश का हवाला देते हुए मेरा तात्पर्य यह था कि हिंदी ब्लॉगिंग जगत अभी सृजन के दौर में है, जब पूरी तरह सृजित हो जाएगा तब पालनहारों की भूमिका शुरू होती है...इसलिए प्रतीक के तौर पर अभी "ब्रह्मा-विष्णु" की ही हिंदी ब्लॉगिंग को ज़रूरत है...जब कलियुग की तरह ब्लॉगिंग में बुराइयों की अति हो जाएगी तब "महेश" तांडव दिखाकर इसका संहार कर सकते हैं... इसलिए अभी "महेश" की भूमिका यहां नहीं होनी चाहिए...एक बात और कहना चाहूंगा कि ये सारी बात प्रतीकात्मक है, इसलिए इसे धर्म विशेष से जोड़ कर कदापि नहीं देखा जाना चाहिए... आशा है आप मेरा प्वाइंट ऑफ व्यू समझ गए होंगे...हो, सकता है मेरे दृष्टिकोण में कोई त्रुटि हो, अगर ऐसा है तो इंगित ज़रूर कीजिएगा...

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  12. ब्लॉग स्लोग , दोनों तर्कसंगत.

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  13. कुछ टिपियाने के पहले हम जानना चाहते हैं कि बबलीजी ने किसका कमेंट यहां पोस्ट किया है।

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  14. क्या खुशदीप जे तीनो ही ब्लोग्गिंग में अभी नहीं आना चाहते....कह रहे थे ..अभी तो हम जापानी भाषा में ब्लोग बना कर लिख रहे हैं...सब लोग जब जुआ पक जायेंगे तभिये हम लोग आयेंगे...हां..नारद जी को भेजा है..अनाम बन के टीपने के लिये..

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  15. खुशदीप अज ताँ बल्ले बल्ले कर दिती् बई पुतर\ की स्लागओवर ए ते की पोस्ट ए बई तुसी ताँ भियो भियो के मारदे हो सिर ही गंजा कर देंदे हो। बई अजे सारे बच्चे ने करन दिओ जो करदे ने जदों वडे हो जनगे तां समझ वी आ जाउ सत सिरी अकाल्

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  16. भाई जी बहुत दिनो से आपके ब्लोग को देख रहा हूँ, आप हर बार हिन्दी ब्लोग जगत को ही मुद्दा बनाते हैं और कुछ आपको शायद मिलता नही। आप कहते है कि राजनीति हो रही है, और मुझे लगता है कि इसका सबसे ज्यादा फायदा आप ही उठा रहे है। और कुछ भी लिखा करिये इस सब के सिवाय या ऐसा कोई एक और ब्लोग बना लिजिए अच्छा रहेगा।

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  17. जयराम रमेश नये जमाने के दार्शनिक हैं... वैसे हिन्दी ब्लोगिंग को ब्रम्हा विष्णु या महेश की जरुरत नहीं बल्कि आप जैसे चिट्ठाकारों की जरुरत है जो पोस्ट के साथ स्लागओवर से भी दिल जीत लें

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  18. भई, आप तो ’सूत जी बो्ले’ वाले भाव से दिव्य दृष्टि देते रहो,
    यह नीलकँठ वाला मसला सुलझ ही जावेगा ।
    बाकी कसर तो श्लाग-ओवर ने पूरी कर दी,
    लेकिन आपको कैसे पता चला कि आजकल मेरी ड्यूटी सबकी टाँग खींच खींच कर ब्लागिंग में रोके रखने की है ?
    फिर क्या किसी ज्योतिषी से पता चला, क्योंकि कुश ने तो नहीं ही बताया होगा ?

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  19. भई मिथिलेश दुबे जी,
    एक सवाल मेरा भी हैं !
    आप की मुफ्त की सलाह / राय है:
    "या ऐसा कोई एक और ब्लोग बना लिजिए अच्छा रहेगा।"
    क्या इस बेशकीमती राय का मतलब साफ करने की कृपा करेंगे?
    क्योंकि हमें तो खुशदीप जी की ब्लॉगिंग में कोई खराबी नज़र नहीं आती !
    लगता है आपका एक ही बार में छक्के का इरादा है...........

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  20. ये निहायत ही ज़रूरी है कि हिन्दी ब्लॉगिंग को नई ऊँचाईयों तक पहुँचाने के लिए विवादों से जितना दूर रहा जाए ...उतना अच्छा है

    आपका स्लॉग ओवर हमेशा की तरह ए-वन रहा

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