रविवार, 13 सितंबर 2009

ब्लॉगर्स मीट में ये भी हुआ...

त्वरित रिपोर्ट पर त्वरित ही प्रतिक्रियाओं के लिए सभी का दिल से आभार...दिनेशराय द्विवेदी सर की पारखी आंखों ने बड़ी सही चीज़ पकड़ी है कि कवि सम्मेलन की रिपोर्ट तो अच्छी रही, लेकिन ब्लॉगर्स मीट की रिपोर्ट का इंतज़ार रहेगा...मैं आपका आशय अच्छी तरह समझ गया हूं, सर...लेकिन दुविधा ये है कि ब्लॉगर्स मीट के नाम पर इतना ही कुछ हुआ जितना कि मैंने रिपोर्ट किया..साहित्य शिल्पी का वार्षिकोत्सव था...इसलिए उस कार्यक्रम के लिए जितना वक्त दिया गया वो वाज़िब भी था...हां, कवि सम्मेलन ज़रूर ज़्यादा समय ले गया...इस वजह से ब्लॉगर्स के परिचय तक आते-आते वक्त बहुत कम रह गया था...मैंने जो रिपोर्ट किया है उसमें सिर्फ उस अंश को जान-बूझ कर छोड़ दिया था जो मैंने ब्लॉगर्स मीट पर अपना परिचय देते हुए कहा ...दरअसल पोस्ट लंबी हो रही थी इसलिए पोस्ट को कतरते हुए कैंची मैंने अपने ऊपर ही चलाई...अब द्विवेदी सर का आदेश है तो जो हिस्सा यानि कि मेरा कथन रिपोर्ट में आने से रह गया था, उसे यहां बता देता हूं..
दरअसल वहां संस्कृति यानि कल्चर की बातें हो रही थी...तो मैंने पहला वाक्य ये ही कहा कि जिस शहर (मेरठ) का मैं मूल निवासी हूं, वहां कल्चर के नाम पर सिर्फ एग्रीकल्चर होती है...समारोह में एक ब्लॉगर भाई ने ये मुद्दा उठाया था कि ब्लॉग के माध्यम को बड़ा सीरियसली लिया जाना चाहिए...सिर्फ टाइम पास या मनोरजंन के नज़रिए से ही नहीं लिया जाना चाहिए...जिन मुद्दों को प्रिंट या इलैक्ट्रॉनिक मीडिया टाइम नहीं देते, ब्लॉग के माध्यम से सब तक पहुंचाना चाहिए...मैं इन ब्लॉगर बंधु की बात से पूरी तरह सहमत हूं...लेकिन मैंने ये निवेदन किया कि इन मुद्दों को ब्लॉग पर रखते हुए सबसे ज़रूरी है कि आप किस अंदाज़ में इन्हें पेश करते हैं...अगर आप सिर्फ उपदेश की शैली में अपनी बात थोपते चले जाएंगे तो कोई भाव देने वाला नहीं मिलेगा...आपको ये भांपने का हुनर आना चाहिए कि पाठक क्या सुनना चाहते हैं...ऐसे में चार बातें वो कहें जो सभी सुनना चाहते हैं, और बीच में दो बातें वो जिन्हें आप उठाने चाहते हैं, रोचक अंदाज़ में पेश कर दें...आपका संदेश भी चला जाएगा और पढ़ने वालों को वो भी मिल जाएगा जो कि उन्हें पसंद है...ये सभी के लिए विन-विन वाली स्थिति रहेगी...शुरू में आपको अपनी शैली में थोड़ा बहुत बदलाव करने में दिक्कत हो सकती है, लेकिन बाद में अनुभव बढ़ते जाने के साथ इसके अच्छे नतीजे आने भी दिखने लगेंगे...
रही बात ब्लॉगर्स मीट जैसे आयोजनों को सार्थकता देने की, तो इस मुद्दे पर मेरी अविनाश वाचस्पति जी और अजय कुमार झा जी के साथ बात हुई...फरीदाबाद में हमने जो थोड़ा-बहुत पाया, उसे शुरुआत मान सकते हैं...ऐसे आयोजनों में जो खामियां रह जाती हैं, उनसे हमें सबक मिलता है कि आगे के कार्यक्रमों में वो खामियां न दिखें...ब्लॉगर्स मीट हो तो विशुद्ध रूप से वो ब्लॉगर मीट ही रहे तो ज़्यादा अच्छी बात है...लेकिन इस सब के लिए वालंटियर और सभी ब्लॉगर बंधुओं का सहयोग बहुत ज़रूरी है...और एक बात कहूंगा कि ब्लॉगिंग जगत के कुछ आइकन्स का ऐसे मौकों पर मौजूद रहना पहले से ही सुनिश्चित कर लिया जाए तो एक कार्यक्रम का कद बढ़ेगा और हम जैसे नए ब्लॉगर्स को उनके साक्षात सानिध्य से कुछ अच्छा करने की प्रेरणा भी मिलेगी...
अरे ब्लॉगर्स मीट की रिपोर्टिंग को विस्तार देने के चक्कर में मैं ये तो भूल ही गया कि कल मैंने आइकन वाली पोस्ट पर गलतफहमी दूर करने के लिए आज फिर से अपनी बात रखने का वादा किया था...लेकिन ये फिर कल के लिए टल गया...

स्लॉग ओवर
एक कवि-सम्मेलन में एक कवि महोदय को बड़े दिनों बाद मंच के ज़रिए क्रांति लाने का मौका मिला था...सो हुजूर आ गए फॉर्म में..दो घंटे तक उन्होंने कविता के नाम पर अपनी थोथी तुकबंदियों से श्रोताओं को अच्छी तरह पका दिया तो एक बुज़ुर्गवार मंच के पास आकर लाठी ठकठकाते हुए इधर से उधर घूमने लगे...मंच से कवि महोदय को ये देखकर बेचैनी हुई...पूछा...बड़े मियां, क्या कोई परेशानी है...बड़े मियां का जवाब था...नहीं जनाब, तुमसे क्या परेशानी...तुम तो हमारे मेहमान हो, इसलिए चालू रहो....मैं तो उसे ढूंढ रहा हूं जिसने तुम्हें यहां आने के लिए न्योता भेजा था...
(साभार दीपक गुप्ता)
 
 
 

25 टिप्‍पणियां:

  1. सही कह रहे हैं..ब्लॉगर मीट विशुद्ध ब्लॉगर मीट रहे तो बेहतर. साहित्य शिल्पि का वार्षिकोतस्व था तो निश्चित ही उसको ही ज्यादा समय दिया जाना जायज भी है.

    स्लॉगओवर पढ़कर मजा आया.

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  2. एक राष्ट्रीय संगोष्ठी हमारे शहर मे भी हुई थी।जितने मंच पर बैठे थे उतने ही ब्लागर वंहा पंहुचे थे,श्रोता एक भी नही।अफ़सोस ये सब हो रहा है जो नही होना चाहिये।

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  3. सत्य वचन..
    ब्लॉग के माध्यम को बड़ा सीरियसली लिया जाना चाहिए...सिर्फ टाइम पास या मनोरजंन के नज़रिए से ही नहीं लिया जाना चाहिए...
    पर अपने हिन्दी ब्लागर तो अभी इसी पर एकमत नहीं हो पा रहे हैं, कि यह चीज एक माध्यम तो है, पर आख़िर है क्या.. टाइमपास, मनोविनोद या जस्ट अ मीन्स आफ़ परगेशन ?
    ब्लाग जनमत को अपने सँग बहा ले जाने में, आम सोच को नयी दिशा देने में और प्रिंट एवँ इलेक्ट्रानिक मीदिया की निगहबानी करने में इस कदर सक्षम है, कि तानाशाही और कम्युनिस्ट सरकारें ब्लागर के नाम पर खौफ़ खाती हैं । देखें वह सुबह यहाँ कब आती है ?
    पर मेरे विद्वान मित्र, ब्लागिंग जगत में कुछ आइकन्स कहाँ से प्रविष्ट हो गये ? इनके आइकनत्व का मानक लैक्टोमीटर कहाँ से आया, यह आश्चर्य बना रहेगा ।
    फिलवक्त तो अपने ब्लागजगत में स्थिति यह है कि,
    उष्ट्राणाम् विवाहेषु गीतम् गायंति गर्दभाः |
    परस्परम् प्रशंसति, अहो रूपम्, अहो ध्वनिः।|

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  4. मीट / सम्मेलन में अक्सर ऐसा हो जाता है ...
    जो आपने ब्लॉगर्स मीट पर अपना परिचय देते हुए कहा उस से अक्षरशः सहमत.....

    "और एक बात कहूंगा कि ब्लॉगिंग जगत के कुछ आइकन्स का ऐसे मौकों पर मौजूद रहना पहले से ही सुनिश्चित कर लिया जाए तो एक कार्यक्रम का कद बढ़ेगा और हम जैसे नए ब्लॉगर्स को उनके साक्षात सानिध्य से कुछ अच्छा करने की प्रेरणा भी मिलेगी.."

    लगता है "आइकन्स" शब्द से कुछ लोगों को बहुत भ्रम होता जा रहा है जब कि खुशदीप जी ने पहले ही स्पष्टीकरण दे दिया है " मैंने अपने लीडर चुन लिए.." और आधार के बारे में भी बताया है!!

    मेरा विचार है इसको बार-बार इंगित नहीं करें.........

    सिर्फ खामियां न निकालें!!!!!!!!!!!!!!

    शुभकामनायें !

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  5. बढिया लगा ऐसे कार्यक्रम में शिरकत कर के जिसके बारे में पूरे हिन्दी ब्लॉगजगत में चर्चा हो रही है

    रिपोर्ट ब्लॉगर महासम्मेलन की-कुछ अनजाने..अनछुए पहलू

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  6. अगर आप सिर्फ उपदेश की शैली में अपनी बात थोपते चले जाएंगे तो कोई भाव देने वाला नहीं मिलेगा...आपको ये भांपने का हुनर आना चाहिए कि पाठक क्या सुनना चाहते हैं...ऐसे में चार बातें वो कहें जो सभी सुनना चाहते हैं, और बीच में दो बातें वो जिन्हें आप उठाने चाहते हैं, रोचक अंदाज़ में पेश कर दें...
    पूरी तरह सहमत ..
    स्लोग ओवर रोचक है ..हिंदी दिवस के अवसर पर इसका हिंदी अर्थ भी समझाते क्योंकि शब्दकोष से इसका अर्थ मिल नहीं पाया ..!!
    बहुत आभार ..!!

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  7. खुशदीप जी, कवियों ने तो काव्यपाठ का आमंत्रण पाकर कविता पाठ किया...
    मंचीय कवियों को छोड़ कर शेष कवियों ने मौके को भुनाया और असली मजा तो तब आया. जब अंत में ब्लाग या ब्लागिंग पर चर्चा के तहत माइक पर आए ब्लागरों ने भी अपना काव्य पाठ ही सुनाया....

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  8. सही बात है... दिन भर की ब्लागर मीट अलग से हो तो बेहतर... स्ववित्तपोषित हो तो और भी अच्छा, ज़बरदस्ती किसी से नहीं, समझेंगे कि काफी होम हो आए... काहे किसी पर नाहक लदा जाए.

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  9. खामियाँ तो खैर हर जगह कुछ न कुछ रह ही जाती हैं। खुशी की बात तो यह है कि ब्लोगर्स सम्मेलन जैसी एक नई परम्परा की शुरुवात हुई।

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  10. मुझे तो किसी भी तरह से ये ब्लागर्ज़ मीट नहीं लगी ब कुछ ब्लागर्ज़् के कन्धे पर हाथ रख कर किसी के आगे बड्कने भर का प्रयास लगा। दूर दराज़ से आने वालों को कोई उचित समय नहीं दिया गया न ही बलागर्ज़ या ब्लोग्ज़ के बारे मे विस्त्रित चर्चा हुई जब की इसे नाम बलागर्ज़ मीट दिया गया इस से तो अच्छा अपने को आया एक सपना ही था । जिस मे एक बहुत बडा पंडाल था उसके गेट पर ताऊ जी लठ ले कर खदे थे और महमानों का स्वागत करने देवेदी जी ,नारद मुनी जी अजीत जी [शब्दों का सफर वाले।} राज भाटिया जी फुर्सतिया जी अनूप शुक्लाजी नीरज गोस्वामी जी पंकज सुबीर जी ,गौतम राज रिशी जी डाक्टर अनुराग जी संगीता पुरी जी कंचन जी और हमारे सभी के चहेते आशीश खंडेल्वाल जी और भी बहुत से जिनका नाम लेने लगी तो सारा दिन लग जायेगा। आउर पंडाल तो जैसे खचाखच भरा था क्या चर्चा हुई ब्लाग्ज़ की मत पूछो कभी अपने ब्लाग पर विस्त्रित रिपोर्ट दूँगी। हा हा हा आभार इस ्रिपोर्ट के लिये

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  11. बहुत बढ़िया लिखा है आपने! बिल्कुल सच्चाई का बयान किया है बड़े ही सुंदर रूप से! अच्छी प्रस्तुती!

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  12. कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए बधाई. ये जानकार अचम्भित हुआ की ये एक त्रिकोणीय कार्यक्रम था. शुद्ध ब्लोगर्स सम्मलेन का इंतज़ार रहेगा.

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  13. खुशदीप जी आपकी बात सही है। बहुत कुछ समेटने की कोशिश करने में बहुत कुछ छूट भी जाता है। शीघ्र ही योजना बना कर ब्ळॉगर्स मीट की जाये। इस कार्यक्रम में ही मैने पाया कि योजना बद्ध तरीके से दि एसा आयोजन हो तो बहुत सी सार्थक बाते बाहर आ सकती हैं।

    -राजीव रंजन प्रसाद

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  14. बहुत बेहरतीन आँखों देखा हाल सुनाया... आकाशवाणी के संजय बनर्जी याद आ गए.... आप वाकई तेज़ चैनल हैं... यूँ ही नहीं धूम मचा दिया है आपने

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  15. निर्मला कपिला जी के सपने को सच बनाया जायेगा
    जो सपना उन्‍हें आया है वो सच करके सबको दिखाया जायेगा
    और गलतियां तो हमने की हैं जानबूझकर और मानते भी हैं
    गलतियां की हैं तो उन्‍हीं से सुधर कर आगे बढ़ने का रास्‍ता बनाया जायेगा।

    ब्‍लॉगर मिले तो मिलन तो हुआ ही
    प्‍यार से मिले तो स्‍नेह तो पनपा ही
    सम्‍मेलन हुआ दिलों में प्‍यार बढ़ा तो
    महा तो हो ही गया बिग एस की तरह।

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  16. सरजी,ये एक भाई विनीत कुमार के नाम से मौजूद था जिसने उपदेश देने का नहीं बल्कि अपील भर की थी कि आप इसे टाइमपास की चीज न समझें। आपने मुझमें दिलचस्पी नहीं दिखायी,संभवतः इसलिए आप मेरा नाम नहीं ले सकें,याद नहीं रख सके।। कोई बात नहीं,मेरी बात लोगों तक चली गयी,ये किसी भी ब्लॉगर के लिए ज्यादा जरुरी है।

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  17. साहित्यशिल्पी का वार्षिकोत्सव समारोह न होता तो ये पहला ब्लॉगर सम्मलेन भी न होता.
    हमने शिरकत की और यथा संभव प्रचार कर अपना ब्लॉग्गिंग धर्म निभाया.

    काव्य गोष्ठी का आनंद उठाया साथ ही कुछ ब्लोग्गर्स से मिलकर बहुत अच्छा लगा. निर्मला कपिला जी और विनीत कुमार के शब्दों को हलके में न लिया जाये. आगे भी गंभीर मुद्धो के प्रति सतरंगी अपनी जिम्मेदारी निभाने के लिए सदैव तैयार है.

    अपनी अपनी राय रखने के लिए ब्लॉगजगत के सभी सदस्यों का आभार.

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  18. वाह...असली दंगल तो यहां हुआ।
    निर्मला जी की बात में भी दम है और विनीत कुमार की भी।
    अरे विनीत भाई, आप वहां थे और मैने किसी रपट में आपकी कही को विस्तार से देखा है।

    खुशदीप भाई आपकी रिपोर्ट इस कड़ी की तीसरी रपट है जो मुझे पसंद आई।
    जैजै

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  19. अजित जी, आपने विनीत कुमार जी की ब्लॉगर्स मीट में शिरकत के बारे जो में पढ़ा, वो मेरी पिछली पोस्ट...ब्लॉगर्स मीट से लौट कर...ही में पढ़ा था...वो रिपोर्ट शायद विनीत कुमार जी से भी मिस हो गई ...विनीत जी, उस रिपोर्ट में मैंने क्या लिखा था...उसे एक बार फिर यहां अक्षरक्ष दोहरा रहा हूं...
    सबसे पहले गाहे-बगाहे के विनीत कुमार ने मंच संभाला...विनीत कुमार के मुताबिक ब्लॉग सिर्फ टाइम पास या मनोरंजन के लिए ही नहीं लिखा जा रहा...धीरे-धीरे अब इसमें मैच्युरिटी आ रही है...बेशक अभी संख्या कम है लेकिन आने वाले वक्त में ब्लॉगिंग जन-संप्रेषण का सबसे सशक्त माध्यम बनकर उबरेगा...
    विनीत जी मैं कल आपका पूरा उल्लेख कर चुका था, आज सिर्फ उस बात को दोहरा रहा था जो कल छूट गई थी...लेकिन फिर भी मैंने आपकी दो लाइनें दोहराईं...क्योंकि यहां मैं अपनी बात कह रहा था, जो आपकी लीक से थोड़ी अलग थी, इसलिए शिष्टाचार के नाते मैंने आपका नाम लेना उचित नही समझा...आप इसे अन्यथा न ले...आपके विचारों और भावनाओं की मैं कद्र करता हूं..आशा है पढ़ना-कहना आगे भी चलता रहेगा.

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  20. खुशदीपजी,आपने मेरी बातों का जबाब दिया इसके लिए शुक्रिया। मैंने आपकी इससे पहली वाली भी पोस्ट पढ़ी है इसलिए यहां दोबारा एक भाई पढ़कर ताज्जुब हुआ। सच कहूं तो मुझे ये शैली थोड़ी देर के लिए परेशान कर गयी और बाकी कुछ भी नहीं है। जाहिर तौर पर आगे पढ़ना-कहना आगे भी चलता रहेगा।

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  21. सम्मेलन के एक प्रतिभागी की प्रतिक्रिया काबिले गौर है:-
    प्रमोद जी,
    नमस्कार....सम्मेलन तो ठीक ही रहा ....हाँ इस बहाने प्रेम जी से मुलाक़ात हो गयी ,यह एकमात्र अच्छी बात रही ...बाकी कार्यक्रम तो आप जानते ही होंगे ,,,,ब्लोग्गर्स का कम ,साहित्य शिल्पी का अधिक रहा ,बचा -खुचा समय कवि लोग खींच ले गए ,अनुभव कुछ ठीक नहीं रहा , अगली बार जाने के लिए बहुत बार सोचना पड़ेगा , एक तो स्थान भी बहुत दूर हो गया था ,ढूँढने में ही एक घंटा लग गया था , और फिर जो मंच पर आ रहा था ,चिपक ही जा रहा था ....
    जैसा कि कवियों का जन्मजात स्वभाव होता है ....अब ऐसे विवरण की पोस्ट लगाउं तो क्या होगा बताइए ?
    (ब्लॉगर का नाम छुपाया जा रहा है)

    प्रमोद ताम्बट
    भोपाल

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  22. श्री प्रेम जनमेजय की उपस्थिति से कार्यक्रम की गरिमा बढ़ी । सभी का उत्साह काबिले-तारीफ़ है।शेफाली पाण्डे की हिम्मत कि हलद्वानी से पहुँची ।मंच पर चढ़ने में सफल रहने वाले को निर्धारित समय पर नीचे उतारना हर आयोजक के बस का नहीं।कवि हो तो और भी कठिन ।
    काम्बोज

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  24. साहित्य शिल्पी उन सभी मित्रों का आभारी है जिन्होंने समारोह में उपस्थित हो कर हमें अनुग्रहित किया. साथ ही उन सभी का भी जिन्होंने रिपोर्ट पढ कर अपनी प्रतिक्रियायें दी और हमारा मार्गदर्शन कर हमारा उत्साह बढाया. मैने अपने समापन वक्तव्य में सभी से अनुरोध किया था कि समय, धन और सुविधाओं के आभाव में हो सकता है इस समारोह में कुछ त्रुटियां रह गई हों .. जिन्हें हम आगे सुधारने का प्रयत्न करेंगे.
    जैसा कि श्री राजीव रंजन जी ने अपनी टिप्पणी में कहा है... जल्द ही एक ब्लागर्स महासम्मेलन की योजना बनाई जा सकती है जिसके लिये सभी ब्लागर्स बंधुओं से उनकी उपस्थिति के साथ साथ आर्थिक सहायता की भी आवश्यकता होगी ताकि उस सम्मेलन को एक यादगार सम्मेलन बनाया जा सके..

    मोहिन्दर कुमार
    साहित्य शिल्पी के लिये

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