बुधवार, 26 अगस्त 2009

बीजेपी या मंदिर का घंटा

बीजेपी को पहले जसवंत सिंह का जिन्ना झटका और अब अरुण शौरी का 440 वोल्ट शॉक, वैसे टीवी पर एक विज्ञापन सभी ने देखा होगा...शॉक लगा... शॉक लगा...शॉक लगा... जिसमें एक घर के इलैक्ट्रिक स्विच ख़राब होने की वजह से घर के सभी सदस्यों को बिजली के झटके लगते रहते हैं. इसके चलते सब के सिर के बाल भी हमेशा खड़े रहते हैं. कुछ-कुछ वैसी ही हालत इस वक़्त बीजेपी की है. बेचारी पार्टी ना हो गयी, मंदिर का घंटा हो गयी. जिसे देखो मुंह उठा कर चला आ रहा है और बजाये जा रहा है. लोक सभा चुनाव की हार कम थी क्या, जो पार्टी पर रोज अपने ही सितम पर सितम ढहा रहे हैं.
82 पार आडवानी जी क्या-क्या झेलें. चुनाव के वक़्त तो अहमदाबाद में डम्बल (वर्जिश वाले गोले) उठा-उठा कर कांग्रेस को चेताया था- अभी तो में जवान हूँ...अभी तो मैं जवान हूँ ...वो तो वोटर ही बेदर्द निकले जो यूथ फॉर आडवाणी कैम्पेन पर कान तक नहीं धरा. अब बेचारे आडवानी जी संकट के इस दौर में अपनी पार्टी वालों को तो डम्बल भी नहीं दिखा सकते.
खैर जसवंत तो जिन्ना के कसीदे पढने की वजह से पहले ही नाप दिए गए हैं, सुधींदर कुलकर्णी अपने आप ही बाय-बाय बोल गए। शौरी को लेकर पार्टी दो-फाड़ है लेकिन शौरी पर गाज गिरनी तय है। बीजेपी का संकट यही ख़त्म नहीं हो जाता. अपने सभी पदों को छोड़ ज्वालामुखी बने बैठे यशवंत सिन्हा कब बीजेपी की मेट्रो का एक और पिलर गिरा दें, कोई भरोसा नहीं.
बीजेपी की हालत अंधी गली में फंसने जैसी है. संघ ने बीजेपी के फट्टे में हाथ डालने से मना कर दिया है, रही बात अटलजी की तो बीजेपी उनके लिए ये भी नहीं कह सकती - फिर से आओ अटल बिहारी, करा दो नैया पार हमारी. यह अटलजी ही थे जिनकी बात बीजेपी ही नहीं पूरा एनडीए सुनता था. अब तो शरद यादव भी बात-बात पर बीजेपी को आए दिन झिड़कते रहते हैं. बीजेपी को राम तो मिले नहीं, घर के भेदी लंका और ढहाने पर तुल गए हैं. अब ऐसे में बीजेपी में हर शख्स के होंठों पर आतिफ असलम का यह गाना हो तो कोई बड़ी बात नहीं- हम किस गली जा रहें हैं अपना कोई ठिकाना नहीं.

स्लॉग ओवर
सुबह सुबह एक मुर्गी बेकरी वाले की दुकान पर पहुँच गयी. दुकानदार को 30 रुपये दिए और बोली 6 अंडे दे दो. दुकानदार हैरान-परेशान. फिर हिम्मत करके बोला- मुर्गी बहन तुम तो खुद पूरी दुनिया को अंडे देती हो, फिर तुम्हे अंडे खरीदने की नौबत क्यों आ गयी. ये सुनकर मुर्गी थोडा लज्जाई-शर्माई, फिर बोली- वो दरअसल मेरे मुर्गेजी ने कहा है- क्या तीस रुपये के पीछे अपनी फिगर ख़राब करेगी, जा अंडे खरीद ही ला.
 

8 टिप्‍पणियां:

  1. वाह क्या बात है! बहुत बढ़िया लिखा है आपने! आपकी लेखनी को सलाम!

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  2. राज तिलक की करो तैयारी आ रहे है अटल बिहारी

    यह ९५ के बाद की बाद है, यह नारा उफान पर था... आज पुरुषोत्तम का परचम भी काम नहीं आ रहा, किताब रुपी चिराग को रगड़ने पर 'जिन्न' निकल रहे हैं... चक्र 'सुदर्शन' ने भी जिन्ना का गुण गाया है... बी जे पी में अकेले राजनाथ हेड मास्टर भी है और स्टुडेंट भी, तुर्रा यह की क्लर्क भी लगता है वोही बनेंगे... इस युनिवेर्सिटी का अब अयोध्या वाले राम ही मालिक हैं ऐसा भी नहीं लगता...

    रही स्लोग ओवर की बात तो मुर्गियां सर पर जापानी छाता अरसे से लिए घूम रही हैं... नाक-नक्श तीखे भी हैं और रंगीन भी... बस उन्हें एहसास अब हुआ है की .... प्लेट में कप कैसे संभालना है...

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  3. बबलीजी,हौसला अफजाई के लिए शुक्रिया. उम्मीद करता हूँ, आगे भी ऐसी नज़रे-इनायत मिलती रहेगी

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  4. बहुत कसा हुआ व्यंग है. साथ ही व्यंग की सारी कटुता स्लॉग ओवर ने दूर कर दी. बहुत खूब, लिखते रहिये.

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  5. कहीँ से आपका link मिला ...पढ़ रही हूँ ...और कहना चाहती हूँ ,'वाह '! बेहद अभ्यास पूर्ण आलेख हैं..और संजीदगी के साथ लिखा हुआ!

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  6. शब्द नहीं मिल रहे हैं आपकी तरीफ करने के लिए!
    बस यही कहना चाहता हूँ,
    नशा हो, जुनून हो, या कोई आफ़ताब हो तुम....
    सबसे जुदा सा है, ये ‘अंदाज़-ए-बयान’ तुम्हारा....

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