खुशदीप सहगल
बंदा 18 साल से कलम-कंप्यूटर तोड़ रहा है

कौन कहता है बाल विवाह अपराध है...खुशदीप

  • Tuesday, January 31, 2012
  • by
  • Khushdeep Sehgal
  • गुजरात देश का विकास मॉडल है... यहाँ तक की कांग्रेस के विज्ञापन में भी मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी की तारीफ छप जाती है...अमिताभ बच्चन ब्रांड अम्बेसडर बन कर गुजरात की छवि को प्रोमोट करने में जुटे हैं...लेकिन इसी गुजरात के बारे में एक खबर यह भी पढने को मिली...बाल विवाह से जुडी यह खबर किसी अनपढ़ या पिछड़े समाज की नहीं हैं...यह बात बच्चों के पहनावे से ही समझ आ रही है...मोदी जी और अमिताभ जी ज़रा अमरेली की इस घटना की और भी ध्यान दीजिये....




    ये हैं जय और जिया... उम्र महज दो साल...रिश्ता, भावी पति-पत्नी...यह बात अलग है जय की मां मीना जिया के पिता राम की बहन है...यानी जय और जिया ममेरे-फुफेरे भाई-बहन हैं...रविवार को इन दोनों की सगाई हो गई...ये दोनों गुजरात के लेउवा पटेल समाज के हैं...


    इस समाज में प्रति हजार लड़कों पर महज 750 लड़कियां हैं...समाज में भाई-बहन के बीच सगाई की इस पहली घटना को लिंगानुपात के अंतर से जोड़कर देखा जा रहा है...इस कार्यक्रम में पूर्व सांसद वीरजीभाई ठुमर भी मौजूद थे...उन्होंने लेउवा पटेलों को क्षत्रियों का वंशज बताते हुए कहा, जब क्षत्रियों में आज भी ऐसा चलन है तो इनमें ऐसे संबंध क्यों नहीं किए जा सकते...

    बाबरा तहसील के चमारडी गांव में  रहने वाले लेउवा पटेल समाज के सरपंच जादवभाई वस्तरपरा ने अपनी दो वर्षीय पोती जिया की सगाई अपनी बेटी मीनाबेन के दो वर्षीय पुत्र जय के साथ करवाई... इस बारे में जादवभाई का कहना है कि उन्होंने मामा-बुआ के बच्चों के बीच वैवाहिक संबंध स्थापित कर एक नई प्रथा की शुरुआत की है...

    लेउवा पटेल समाज के अग्रणियों के अनुसार दरअसल लेउवा पटेल मूल क्षत्रियों के वंशज हैं और क्षत्रियों में आज भी यह रिवाज प्रचलन में है...इसलिए लेउवा पटेल समाज में इस परंपरा की शुरुआत कर उन्होंने कुछ गलत नहीं किया...

    इधर दो वर्षीय जिया के बड़े पापा और उद्योगपति गोपालभाई का कहना है कि यह परंपरा क्षत्रिय वंश की परंपरा है और दूसरी मुख्य बात यह कि पारिवारिक विवाह संबंध से लड़कियों को भी भविष्य में किसी तरह की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा...इस प्रसंग पर लेउवा पटेल समाज की कई दिग्गज हस्तियों  के साथ पूर्व सांसद वीरजीभाई ठुमर भी मौजूद थे...

    सरपंच जादवभाई के अनुसार उन्हें मामा-बुआ के बच्चों के वैवाहिक रिश्तों को लेकर किसी तरह की आलोचना का भय नहीं है...उनके अनुसार इस रिश्ते के संबंध में उन्हें लेउवा पटेल समाज का समर्थन प्राप्त है और वे पूरे लेउवा समाज से इस प्रथा को आगे बढ़ाने का भी आह्वान करेंगे...

    (सौजन्य दिव्य भास्कर)
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    ​​काले-गोरे का भेद नहीं, हमने तो दिलों को जीता है...खुशदीप

  • Monday, January 30, 2012
  • by
  • Khushdeep Sehgal




  • मनसा वाचा कर्मणा वाले राकेश कुमार जी की संतान भी उन्हीं की तरह यशस्वी और ज्ञान की धनी है...राकेश जी की बिटिया निधि अग्रवाल के फेसबुक अकाउंट पर आज अंग्रेज़ी में कुछ बड़ा अच्छा पढने को मिला...वही आपसे शेयर कर रहा हूं...​


    टैम एयरलाइंस का एक वाकया​

    ​पचास बरस के आसपास की एक गोरी महिला ​​फ्लाइट के लिए अपनी सीट पर आती है तो देखती है साथ की सीट पर एक काला पुरुष बैठा है...​

    ​ये देखकर महिला का पारा आसमान पर चढ़ जाता है..वो फौरन एयर होस्टेस को बुलाती है...​

    ​​क्या समस्या है मैडम...एयर होस्टेस पूछती है..​

    ​​तुम्हें समस्या दिखाई नहीं दे रही क्या...मैं इस काले पुरुष के साथ नहीं बैठ सकती, मेरी सीट फौरन बदली जाए...गोरी महिला ने नाक-मुंह चढ़ाते हुए कहा...​

    ​​कृपया शांत रहिए मैडम. अफसोस है कि सारी सीटें भरी हुई हैं, फिर भी मैं देखती हूं, क्या हो सकता है...एयर होस्टेस ये कह कर चली गई और थोड़ी देर बाद लौटी...​​​

    मैडम, जैसा कि मैंने आपसे कहा था कि इकोनामी क्लास में कोई सीट खाली नहीं है...मैंने कैप्टन से इस बारे में बात की, उन्होंने भी इकोनामी क्लास में कोई सीट न होने की पुष्टि की है...हां, बिज़नेस क्लास में ज़रूर कुछ सीटें खाली हैं...लेकिन जैसी परिस्थिति है, कैप्टन ने भी माना है कि किसी के लिए अप्रिय सह-यात्री के साथ बैठ कर यात्रा करना उचित नहीं होगा...​

    ​​इसके बाद एयर होस्टेस काले पुरुष की ओर मुखातिब होते बोली...​

    ​इसका मतलब है सर, आपको थोड़ी देर के लिए हुई इस असुविधा के लिए हम क्षमाप्रार्थी हैं, आप चल कर बिज़नेस क्लास में सीट ग्रहण कर वर्ल्ड क्लास यात्रा और सुविधाओं का आनंद लीजिए...

    ​​ये सुनकर प्लेन में बाकी सारे यात्री, जो महिला के व्यवहार से चकित थे, अपनी सीटों से उठकर एयरलाइंस स्टाफ के लिए तालियां बजाने लगे...

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    है प्रीत जहां की रीत सदा, ​
    मैं गीत वहां के गाता हूं,​
    ​भारत का रहने वाला हूं,​
    भारत की बात सुनाता हूं...



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    कांपता गणतंत्र, ताली पीटता सत्तातंत्र...खुशदीप​​

  • Sunday, January 29, 2012
  • by
  • Khushdeep Sehgal



  • हमारा गणतंत्र महान है..26 जनवरी क्यों अहम है, ये कोई जानता हो या न हो लेकिन इस दिन दिल्ली में होने वाले मुख्य समारोह में परेड के बारे में सब जानते है...बुलंद भारत की बुलंद तस्वीर दिखाने वाली इस परेड को बचपन में टीवी पर बड़े शौक से देखा करता था..इतने सालों में इंडिया तो बुलंद हो गया लेकिन भारत शायद और भी पिछड़ गया..26 जनवरी को सैन्य शक्ति के प्रदर्शन के साथ तमाम राज्य और बड़े सरकारी विभाग भी झांकियों के ज़रिए विकास की झलक दिखाते हैं...दिल्ली के अलावा राज्यों की राजधानियों और बड़े शहरों में भी गणतंत्र दिवस की रस्म पूरी कर खुद को देशभक्त दिखा दिया जाता है...

    ​मध्य प्रदेश के देवास में इस साल गणतंत्र दिवस पर जो हुआ वो वाकई दर्शाता है कि सत्ता के नशे में चूर हमारे नेता और लाट साहबों की तरह अफसरी झाड़ते हमारे आईएएस-आईपीएस कितने संवेदन-शून्य  हो गए हैं...गणतंत्र दिवस समारोह पर निकाली गई नगर निगम की झांकी में पानी के स्रोत को दिखाने के लिए आठ साल के मासूम को नल के नीचे नहाते हुए दिखाया गया...तन पर सिर्फ एक नेकर पहने ये लड़का कड़ाके की ठंड में नहाते हुए कांपता रहा लेकिन उसकी इस हालत पर न कलेक्टर साहब का ध्यान गया और न ही दूसरे किसी अफ़सर का...ये सब अपनी मेमसाबों और बच्चों के साथ गर्म कपड़ों में लदे हुए तालियां बजा कर गणतंत्र का जश्न मनाते रहे...ऐसी रिपोर्ट है कि जिस वक्त ये सब हो रहा था उस वक्त देवास में तेज़ हवा के साथ तापमान 12.9  डिग्री सेल्सियस पर था...आधे घंटे तक बच्चे के नहाते रहने के बाद एक फोटोजर्नलिस्ट के आपत्ति करने पर बच्चे को हटाया गया...​
    ​​
    ​निर्णायकों ने बच्चे के लिए असंवेदनशील और लगातार पानी की फिजूलखर्ची करती रही इस झांकी को तीसरा स्थान दिया ...देवास की मेयर रेखा  वर्मा ने सफाई दी है कि वो मुख्य समारोह में मौजूद नहीं थी लेकिन उन्हें बच्चे के नहाने की जानकारी मिली है...मेयर के मुताबिक ऐसा कुछ झांकी मे दिखाने के लिए पहले से नहीं सोचा गया था...ये संबंधित कर्मचारी ने अपनी मर्जीं से किया है...मेयर ने कार्रवाई का भी आश्वासन दिया है...​​

    इस घटना में कार्रवाई जब होगी सो होगी लेकिन मुझे इसमें 62 साल के हमारे गणतंत्र की असलियत से बड़ा साम्य दिखा...ये बच्चा और कोई नहीं देश की जनता है..बच्चे को तमाशे की तरह देखते हुए अफसर ताली पीट कर गणतंत्र के लिए अपनी आस्था प्रकट कर रहे थे...वैसे ही देश की जनता भी तमाशा बनी हुई है...उसकी पीड़ा भी राजनीतिक कर्णधारों और नौकरशाही के प्रतीक लाट साहबों के लिए ताली पीटने लायक तमाशे से ज़्यादा कुछ नहीं है...मुंह पर जनता जनार्दन की बात की जाती है...हक़ीक़त में नीतियां सारी कारपोरेट को फायदा पहुंचाने वाली बनाई जाती है...आखिर उन्हीं के चंदे से महंगी चुनावी राजनीति फलती-फूलती है...​
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    ​लेकिन गणतंत्र दिवस तो गणतंत्र दिवस है, हर साल मनाना ही पड़ेगा...गाना याद आ रहा है दुनिया में अगर आए हैं तो जीना ही पड़ेगा, जीवन है अगर ज़हर तो पीना ही पड़ेगा...
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    लो फिर बसंत आई...खुशदीप

  • Saturday, January 28, 2012
  • by
  • Khushdeep Sehgal


  • बसंत पंचमी की आप सभी को बहुत बहुत शुभकामनायें ...बसंत को महसूस करने के लिए डूबिये मां-बेटी  मलिका पुखराज और ताहिरा सईद की दिलकश आवाज़ में-



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    अन्ना को नहीं दिखाई गई 'छन्नो​​'...खुशदीप

  • Friday, January 27, 2012
  • by
  • Khushdeep Sehgal


  • ​बुधवार को पोस्ट लिखी थी...अन्ना, चमाटा और वीना मलिक...​
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    मंगलवार को अन्ना ने रालेगण सिद्धि में फिल्म गली गली चोर है देखने के बाद मीडिया से बात करते हुए चमाटे वाला बयान दिया था...मुझे ये जानने की बड़ी उत्सुकता थी कि जब अन्ना गांव के सौ लोगों के साथ ये फिल्म देख रहे होंगे तो वीना मलिक का आइटम नंबर आने पर वहां क्या हुआ होगा...मैंने बुधवार की पोस्ट में अपनी उत्सुकता को इस तरह ज़ाहिर किया था... 
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    फिल्म में पाकिस्तान से सेल्फ-एक्सपोर्ट होकर आई और बिग बास से फेम हुई अभिनेत्री वीना मलिक का एक आइटम सान्ग भी है...उम्मीद करता हूं कि रालेगण सिद्धि में फिल्म की स्क्रीनिंग के दौरान इसे नहीं दिखाया होगा...अब दिखाया होगा तो न जाने लोगों ने इसे कैसे लिया होगा...​


    ​अब जाकर साफ़ हुआ है कि फिल्म बनाने वाले बड़े कलाकार निकले...रालेगण सिद्धि में स्पेशल स्क्रीनिंग से पहले वीना मलिक के लटके-झटकों वाले आइटम नंबर​​ छन्नो पर कैंची चला दी गई...ऐसा करने के लिए फिल्म के हीरो अक्षय खन्ना ने बड़ी मासूम दलील भी दी है...​अक्षय के मुताबिक अन्ना की सेहत ठीक नहीं है, इसलिए उन्हें ज़्यादा परेशानी न हो, हमने फिल्म को शार्ट और क्रिस्प रखने की कोशिश की...

    मान गए इस दलील को...अन्ना को रात बारह बजे तक जगाकर फिल्म दिखाई गई तो उनकी सेहत का ख्याल नहीं आया...सेंसर बोर्ड किसी फिल्म को टोटेलटी में देखने के बाद प्रदर्शन के लिए सर्टिफिकेट देता है..अन्ना और रालेगण सिद्धि के लोगों को ये फिल्म दिखाई गई थी तो वहां भी पूरी टोटेलटी में दिखाई जानी चाहिए थी...अन्ना को भी तो पता चलता कि भ्रष्टाचार के नाम पर मार्केटिंग की जाने वाली फिल्म में फ्रंटबैंचर्स के लिए भी मसाले का भरपूर इंतज़ाम किया गया है...​​
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    ​फिल्म बनाने वालों के लिए अन्ना के लिए स्पेशल स्क्रीनिंग भी सुपर मार्केटिंग का फंडा था...जिसमें अन्ना को ज़रिया बनाकर​ मीडिया में फिल्म के मुफ्त इंतज़ाम का जुगाड़ कर लिया गया...कल को फिल्म के ऐसे विज्ञापन भी सामने आ जाएं जिसमें अन्ना को फिल्म देखते हुए दिखा दिया जाए तो कोई बड़ी बात नहीं....या फिल्म की तारीफ़ में अन्ना के बोले गए शब्दों को भुना लिया जाए...
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    यानि एक तरफ़ फिल्म मार्केटिंग का नया फंडा और दूसरी तरफ फिल्म में मसाले का भी इंतज़ाम..लेकिन अन्ना को ये नागवार न गुज़र जाए, इसलिए उनकी आंखों से छन्नो को दूर  ही रखा गया...ये अन्ना की मासूमियत ही है कि कोई भी उनके नाम का अपने फायदे के लिए इस्तेमाल कर लेता है...कहीं टीम अन्ना भी तो यही काम नही कर रही...​
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    ​बहरहांल ये बात वीना मलिक को ज़रूर पसंद नहीं आई होगी कि फिल्म को अन्ना को दिखाते हुए सिर्फ उनके ही परफारमेंस पर कैंची चलाई गई...चलिए वीना मलिक जी, आप यहां निराश हुई हैं तो कोई बात नहीं...आपके मुल्क पाकिस्तान से   आपके लिए अच्छी ख़बर आई है...वहां पूर्व प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ की पार्टी पीएमएल-एन के सांसद मुशाहिदुल्ला ख़ान ने मांग की है कि वीना मलिक को पाकिस्तानी संसद के ऊपरी सदन का सदस्य बना दिया जाए, इससे बाकी सांसदों की ​हाज़िरी बढ़ाई जा सकेगी...
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    अन्ना के दौर में धर्मेंद्र के 'सत्यप्रिय' की याद...खुशदीप​

  • Thursday, January 26, 2012
  • by
  • Khushdeep Sehgal
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    धर्मेंद्र सिंह देओल यानि धर्मेंद्र...बुधवार को धर्म जी को सरकार ने पद्मभूषण देने का ऐलान किया तो मुझे लगा कि इस फौलादी शरीर के अंदर छिपे संवेदनशील इनसान की प्रतिभा के साथ पहली बार न्याय हुआ ..किसी के लिए वो ही-मैन के रूप में दिलों में बसे हैं तो किसी के लिए कभी दुनिया के सौ हैंडसम लोगों में शुमार की वजह से...पहचान कभी मीना कुमारी के लिए साफ्टकार्नर की वजह से.. कभी पहले से शादीशुदा होने के बावजूद हेमा मालिनी से शादी के लिए दिलावर ख़ान बनने की वजह से...ये शख्स सांसद भी बना लेकिन राजनीति की चालों को देखते हुए एक ही कार्यकाल में तौबा कर बैठा...​धर्मेंद्र को शोले के वीरू के तौर पर सब जानते हैं लेकिन मेरे लिए सबसे ऊपर धर्मेंद्र का फिल्म सत्यकाम में निभाया सत्यप्रिय का किरदार है...



    ​​​इसी फिल्म ने मुझे हमेशा के लिए धर्मेंद्र का मुरीद बना दिया...जब बहुत छोटा था जब स्कूल की ओर से ये टैक्स फ्री फिल्म दिखाई गई थी..उसके बाद न जाने कितनी बार ये फिल्म देख चुका हूं...जब भी देखता हूं, अंदर तक हिल जाता हूं...क्या कोई व्यक्ति सच और ईमानदारी के लिए इतना भी समर्पित हो सकता है...आज भ्रष्टाचार मिटाने की उम्मीद को लेकर हम...मैं अण्णा हूं...की टोपी लगाए घूमते हैं...लेकिन भ्रष्टाचार को ईमानदारी के चश्मे से देखना है तो मेरी गुज़ारिश है कि जिन्होंने सत्यकाम नहीं देखी है वो इसे ज़रूर देखें...नारायण सान्याल के बांग्ला उपन्यास सत्यकाम पर बनी ऋषिकेश मुखर्जी की ये कृति 1969 में आई थी, लेकिन इसमें दौर तब से 23 साल पहले यानि देश को आज़ादी मिलने से ठीक पहले का है...

    ​​​इसी फिल्म पर नेट पर रिसर्च के दौरान ब्लाग सिने-मंथन पर राकेश जी की लेखनी का कमाल देखने को मिला...पढ़ने के बाद ऐसा लगा कि मेरे ज़ेहन में उमड़ने वाले विचारों को ही राकेश जी पहले ही शब्दों में ढाल चुके हैं...इसे पढ़ने के बाद मुझे फिर वैसा ही झटका लगा जैसा कि सत्यकाम फिल्म को देखने के बाद लगता है...राकेश जी का लिंक यहां दे रहा हूं...एक और विनती...अगर आप अभी जल्दी में हैं तो इसे न पढ़े..जब ज़रा फुर्सत से हो तभी इसे पढ़िएगा..

    सत्यकाम (1969) : भारत में ईमानदारी की हत्या


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    अन्ना, चमाटा और वीना मलिक...खुशदीप​

  • Wednesday, January 25, 2012
  • by
  • Khushdeep Sehgal

  •  रालेगण सिद्धि में मंगलवार रात को निर्देशक रुमी जाफरी की नई फिल्म गली गली चोर है की अन्ना हज़ारे के लिए खास तौर पर स्क्रीनिंग की गई...भ्रष्टाचार पर बनी इस कामेडी फिल्म को गांव वालों के साथ देखने के बाद अन्ना हज़ारे ने मीडिया से भी बात की...



    अन्ना ने भ्रष्टाचार पर पूछे एक सवाल के जवाब में जो कहा, उस पर कल गर्मागर्म प्रतिक्रियाओं के आने की पूरी संभावना है...खास तौर पर कांग्रेस नेताओं से...अन्ना ने कहा..."सहने की कुछ कार्यक्षमता होती है, जब सहन करने की कार्यक्षमता इनसान की ख़त्म होती है तो सामने वालों में कोई भी हो, एक चमाटा मुंह में लग गया तो उनका दिमाग अपनी जगह पर आ जाएगा...अभी वही रास्ता बाकी है...​​"

    ​​​चमाटों से अन्ना का न जाने क्या लगाव है...कृषि मंत्री शरद पवार को हरविंदर सिंह ने चमाटा लगाया था तो अन्ना की पहली प्रतिक्रिया थी...बस एक ही लगाया...हालांकि बाद में अन्ना ने इस तरह के हिंसक बर्ताव की निंदा की थी...

    ​​अन्ना के बयान पर ​​मैं खास तौर पर उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल निशंक (ब्लाग जगत अच्छी तरह परिचित है इनके नाम से) की प्रतिक्रिया सुनना पसंद करुंगा...निशंक सोमवार को टीम अन्ना के सदस्य  अरविंद केजरीवाल पर मानहानि का मुकदमा दर्ज़ करने की धमकी दे चुके हैं...दरअसल पिछले शनिवार को हरिद्वार में अरविंद केजरीवाल ने सीएजी रिपोर्ट का हवाला देते हुए निशंक के कार्यकाल में कुंभ मेले में दो सौ करोड़ के घोटाले का ज़िक्र करते हुए भ्रष्टाचार के आरोपी उम्मीदवार को वोट न देने की अपील की थी...इसी पर तमतमाए निशंक ने कहा, केजरीवाल माफ़ी मांगे अन्यथा अवमानना का मुकदमा भुगतने के लिए तैयार रहें...अभी तक केजरीवाल ने माफ़ी तो नहीं मांगी है, अब देखना है निशंक क्या करते हैं..

    ​​​चलिए अब आते हैं फिल्म गली गली चोर है पर...अक्षय खन्ना, श्रिया सरन और मुग्धा गोडसे की स्टार कास्ट वाली ये फिल्म 3 फरवरी को देश में रिलीज़ होनी है...मार्केटिंग के युग में दाद देनी होगी फिल्म बनाने वालों के दिमाग की...एक ही झटके में अन्ना को फिल्म देखने के लिए मना कर मुफ्त में पूरे देश में प्रचार का जुगाड़ कर लिया...​​



    ​​फिल्म में पाकिस्तान से सेल्फ-एक्सपोर्ट होकर आई और बिग बास से फेम हुई अभिनेत्री वीना मलिक का एक आइटम सान्ग भी है...उम्मीद करता हूं कि रालेगण सिद्धि में फिल्म की स्क्रीनिंग के दौरान ये गाना नहीं दिखाया होगा...अब दिखाया होगा तो न जाने लोगों ने इसे कैसे लिया होगा...चलते चलते एक झलक आप भी देख लीजिए इस गाने की...



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    ​दरबार साहिब पर टिप्पणी हर भारतीय का अपमान...खुशदीप

  • Tuesday, January 24, 2012
  • by
  • Khushdeep Sehgal


  • विदेशों में कुछ ​टीवी-रेडियो प्रेजेंटर्स के लिए भारत और यहां के लोगों के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणियां करना शायद शगल बन गया है...कुछ महीने पहले न्यूज़ीलैंड में एक प्रेजेंटर ने दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित में दीक्षित की स्पैलिंग को तोड़कर बेहद अश्लील तरीके से उच्चारित किया था...अब अमेरिकी एनबीसी चैनल के 19 जनवरी को प्रसारित हुए कार्यक्रम  द टूनाइट शो के होस्ट  जे लेनो की सिखों के धार्मिक स्थल ‘स्वर्ण मंदिर’ के बारे में अपमानजनक टिप्पणी को लेकर विवाद खड़ा हो गया है...

    लेनो के कार्यक्रम के दौरान स्वर्ण मंदिर की दमकती तस्वीर दिखाई गई और इसे रिपब्लिकन पार्टी की ओर से अमेरिकी राष्ट्रपति पद की दौड़ में शामिल मिट रोमनी का संभावित 'समर होम' बताया गया...रोमनी अकूत संपत्ति के मालिक हैं और उन्हें टैक्सो को लेकर कई सवालों का सामना करना पड़ रहा है...शो में दरबार साहिब को एक अमीर की गर्मियों की छुट्टी का घर बताकर की गई इस टिप्पणी से सिखों में आक्रोश है... सिखों ने इसके खिलाफ अमेरिका में बड़ी तादाद में प्रदर्शन भी किया... इसके अलावा टीवी चैनल एनबीसी के न्यूयॉर्क स्थित दफ्तरों पर प्रदर्शन का ऐलान किया गया है... 

    अमेरिका की यात्रा पर गए प्रवासी भारतीय मामलों के मंत्री वायलार रवि ने टिप्पणी पर आपति दर्ज करते हुए कहा कि, “यह दुर्भाग्यपूर्ण और आपत्तिजनक है कि स्वर्ण मंदिर को दिखाने के बाद इस तरह कि टिप्पणी की गयी...” ​​उन्होंने अमरीका में नियुक्त भारत की राजदूत निरुपमा राव को अमरीका विदेश मंत्रालय के समक्ष इस विषय को उठाने का निर्देश दिया है...रवि के मुताबिक उनका मानना है कि जिस व्यक्ति ने इसे दिखाया, वह इसके बारे में अनजान नहीं था कि यह सिखों का सबसे पवित्र धार्मिक स्थल है...अमेरिका सरकार को भी इस तरह की चीज़ पर विचार करना चाहिए.’’ रवि ने कहा कि उन्होंने ये कार्यक्रम नहीं देखा लेकिन सिखों ने इसके बारे में उन्हें बताया...आज़ादी का ये मतलब नहीं होता कि आप दूसरों की भावनाओं को आहत करें और तरह की हरकत क़तई बर्दाश्त नहीं की जा सकती...

    सिख समुदाय ने लेनो के ख़िलाफ़ एक ऑनलाइन याचिका भी दायर की है. साथ ही फ़ेसबुक पर भी अपने ग़ुस्से को प्रदर्शित करने के लिए एक पेज बनाया गया है...फ़िलहाल इस मामले में जे लेनो की कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली है...जे लेनो  ने सिखों के खिलाफ पहली बार आपत्तिजनक टिप्पणी नहीं की है... 2007 में उन्होंने सिखों को 'डायपर हेड्स' कह डाला था... इसके बाद 2010 में उन्होंने यह कहकर विवाद खड़ा कर दिया था कि ओबामा को अपने भारत दौरे के दौरान दरबार साहिब नहीं जाना चाहिए, क्योंकि वहां उनको पगड़ी पहननी पड़ेगी...

    जे लेनो और अमेरिका को ये नहीं भूलना चाहिए कि ये सिर्फ सिख ही नहीं बल्कि दुनिया के किसी भी कोने में रहने वाले हर भारतीय का अपमान है...अगर अमेरिका स्थित भारतीय दूतावास के आपत्ति जताने पर भी जे लेनो की ओर से माफ़ी नहीं मांगी जाती और अमेरिका की ओर से आधिकारिक तौर पर खेद नहीं जताया जाता तो प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को खुद अमेरिकी राष्ट्रपति ओबामा से बात कर इस मुद्दे को उठाना चाहिए...
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    साहित्यकार ऐसे होते हैं तो हम ब्लॉगर ही भले...खुशदीप

  • Sunday, January 22, 2012
  • by
  • Khushdeep Sehgal


  • बॉलीवुड का एक बात के लिए मैं बहुत सम्मान करता हूं कि यहां एक दूसरे को कभी मज़हब के चश्मे से नहीं देखा जाता...सब एक दूसरे से घी-शक्कर की तरह ऐसे घुले-मिले हैं कि कोई एक दूसरे को अलग कर देखने की सोच भी नहीं सकता...बल्कि जब भी देश की एकता या सामाजिक सौहार्द के लिए कोई संदेश देने की ज़रूरत पड़ी तो बॉलीवुड पीछे नहीं हटा....लेकिन समाज को दिशा देने का दावा करने वाले साहित्यकारों का एक वर्ग किस तरह की मिसाल पेश करना चाहता है....जयपुर साहित्य सम्मेलन में विवादित लेखक सलमान रूश्दी के नाम पर जो कुछ हुआ वो किसी भी लिहाज़ से देश के माहौल के लिए अच्छा नहीं कहा जा सकता..वो भी ऐसे वक्त में जब पांच राज्यों में चुनाव सिर पर हैं...हर मुद्दे से राजनीतिक लाभ कैसे उठाया जा सकता है, इसका सबूत दो नेताओं के बयानों से साफ़ भी हो गया...

    मध्य प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री और बीजेपी की फायर ब्रैंड नेता उमा भारती ने विवादास्पद साहित्यकार सलमान रुश्दी का बचाव किया है...उनका कहना है कि सलमान रुश्दी की प्रतिबंधित किताब 'सटैनिक वर्सेज' पर प्रतिबंध लगे लंबा समय गुजर गया है...इसकी वजह से रुश्दी को काफी परेशानी हुई है... उस पुस्तक में हनुमान जी का मजाक उड़ाया गया है...उनका अपमान किया गया है... लेकिन हमने कभी इस मुद्दे को नहीं उठाया.... किसी भी लेखक या साहित्यकार को अभिव्यक्ति की आज़ादी तब तक है जब तक वह सामने वाले का अपमान न करे...रुश्दी के मुद्दे के राजनीतिक इस्तेमाल पर उमा ने कहा, 'अभी उत्तर प्रदेश के चुनाव में रुश्दी को लेकर तरह-तरह की डिश बनाई जाएगी...कभी नमक के साथ तो कभी चीनी के साथ इसे पेश किया जाएगा'...

    उधर, हैदराबाद.के संसद सदस्‍य और मजलिस-ए-इत्‍तेहादुल मसलिमीन (एमआईएम) के अध्‍यक्ष असदउद्दीन ओवैसी ने 'सैटेनिक वर्सेस' पढ़ने वाले लेखकों की तल्‍काल गिरफ्तारी की मांग की है...ओवैसी ने शनिवार को कहा कि प्रतिबंधित किताब को पढ़ना जान-बूझ कर उकसाने वाली कार्रवाई है और इससे यह भी पता चलता है कि जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल इस्‍लाम पर आक्रमण करने का मंच बन गया है... उन्‍होंने कहा कि इस समारोह के आयोजकों और लेखकों ने गंभीर अपराध किया है... इसलिए उनके खिलाफ तत्‍काल कार्रवाई करनी चाहिए...

    शुक्रवार को जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल में हरि कुंज़रू, अमिताव कुमार,जीत थायिल और रूचिर जोशी ने सलमान रुश्‍दी की विवादित और प्रतिबंधित 'सैटेनिक वर्सेस' के कुछ पन्‍ने पढ़े थे....हालांकि उन्‍हें बाद में रोक दिया गया था...हरि कुंज़रू और अमिताव कुमार की पहले से ही ऐसी योजना थी... ...इन्‍होंने ट्विट कर इसकी जानकारी दी...रुश्‍दी ने ट्विट कर अमिताव और कुंजरू को शुक्रिया कहा है...

    वहीं भारत में अंग्रेजी उपन्यासों के मामले में इनदिनों सबसे ज़्यादा पढ़े जा रहे चेतन भगत ने सलमान रुश्दी पर अप्रत्यक्ष तौर पर हमला किया है...जयपुर साहित्य सम्मेलन में शनिवार को शिरकत कर रहे चेतन भगत ने सलमान रुश्दी का समर्थन कर रहे लोगों की आलोचना करते हुए कहा कि प्रतिबंधित किताबों के लेखकों को हीरो नहीं बनाना चाहिए...चेतन ने कहा, '(प्रतिबंधित किताबों) ने लोगों को दुख पहुंचाया है, मुसलमानों का दिल दुखाया है... मुझे नहीं लगता है कि किसी किताब को बैन करना चाहिए... लेकिन हमें किसी को हीरो भी नहीं बनाना चाहिए...' भगत ने कहा, 'हर किसी के पास दूसरे को दुख पहुंचाने का अधिकार है, लेकिन लोग ऐसा करें, यह जरूरी नहीं...

    साहित्यिक सम्मेलन के आयोजकों ने शुक्रवार देर रात जारी एक बयान जारी कर कहा कि सम्मेलन में कुछ डेलीगेट्स ने बिना आयोजकों की पूर्व जानकारी और बिना अनुमति लिए जो आचरण दिखाया उसे जयपुर साहित्य सम्मेलन किसी तरह से भी अनुमोदित नहीं करता...उन्होंने जो कुछ भी किया या कहा, वो निजी हैसियत से कहा, इसके लिए वो खुद ज़िम्मेदार हैं...इसका आयोजकों से कोई लेना-देना नहीं है....किसी डेलीगेट या किसी और का कोई भी आचरण अगर क़ानून के उल्लंघन के दायरे में आता है तो उसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा...और जो भी ज़रूरी कार्रवाई होगी, वो की जाएगी...हमारा उद्देश्य हमेशा से ऐसा मंच देने का रहा है जो विचारों के आदान-प्रदान और साहित्य के लिए प्रेम को क़ानून के दायरे मे रह कर बढ़ावा दे...

    जयपुर के अतिरिक्त पुलिस कमिश्नर बीजू जॉर्ज जोसेफ़ ने आयोजकों से कार्यक्रम के उस हिस्से की रिकॉर्डिंग देने के लिए कहा है जिसमें विवादित किताब के अंशों को पढ़ा गया...जोसेफ़ के अनुसार जांच के बाद जो भी क़ानून के हिसाब से कार्रवाई होगी, वो की जाएगी...हालांकि आयोजकों ने ये रिकॉर्डिंग देने से इनकार किया है...आयोजक अपने इस रुख पर कायम है कि रूश्दी की किताब का भारत में 14 साल पहले प्रतिबंधित किए जाना दुर्भाग्यपूर्ण था और अभिव्यक्ति की आज़ादी पर पहरा लगाने वाले इस कदम का कानून के दायरे में रह कर विरोध किया जाता रहेगा...

    मुझे इस पूरे प्रकरण में आयोजको की मंशा समझ नहीं आई आखिर वो करना क्या चाहते थे...एक तरफ वो कानून के पालन की बात करते हैं, दूसरी तरफ रुश्दी जैसे विवादित लेखक को न्योता देकर पूरे आयोजन को ही हाशिये पर डाल देते हैं...रुश्दी के भारत आने या ना आने का सवाल ही सुर्ख़ियों में छाया रहता है...विवादित किताब के अंशों को पहले मंच से पढने का मौका दिया जाता है, फिर कानून की दुहाई दी जाती है...बहस इस पर हो सकती है कि किसी किताब पर प्रतिबन्ध लगाना सही है या नहीं...बहस इस पर हो सकती है कि किसी लेखक का विचारों कि आज़ादी के नाम पर कहाँ तक लिबर्टी लेना सही है...बहस इस बात पर हो सकती है कि कोई पेंटर देवी-देवताओं की नग्न पेंटिंग बना कर कला का कौन सा उद्देश्य पूरा करता है...लेकिन सब से पहले देश है....यहाँ के कानून को मानना हर नागरिक का फ़र्ज़ है...अगर कोई सोच-समझ कर कानून को तोड़ता है तो फिर उसे नतीजे भुगतने के लिए भी तैयार रहना चाहिए...

    अगर साहित्यकारों का ऐसा चेहरा हैं तो फिर हम ब्लॉगर ही भले हैं जो सांपला जैसी जगह पर मिलते हैं तो बिना किसी भेदभाव सिर्फ प्यार और शांति का सन्देश फ़ैलाने के लिए...
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    चेतन भगत-रिवोल्यूशन 2020 विद सेक्स...खुशदीप ​

  • Thursday, January 19, 2012
  • by
  • Khushdeep Sehgal



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    ​देश में आज के ज़माने के सबसे लोकप्रिय लेखक चेतन भगत हैं...ये पूर्व आईआईटीयन युवा वर्ग की नब्ज़ को अच्छी तरह समझते हैं, यही वजह है कि इनकी​ लिखी किताबों को हाथो-हाथ लिया जाता है...इन्हीं की किताब पर बनी फिल्म थ्री इडियट्स ने कामयाबी के सारे रिकार्ड तोड़ दिए थे...लेकिन चेतन अच्छे लेखक होने के साथ मार्केटिंग के फंडों को भी खूब समझते हैं..इनकी नई किताब रिवोल्यूशन 2020 को हिट कराने के लिए बाकायदा एक एड फिल्म बनाई गई है...फिल्म में यही दिखाया गया है कि चेतन की किताब को पढने में डूबे एक युवक एक युवती की ओर से सिड्यूस किए जाने पर भी उसकी तरफ़ कोई ध्यान नहीं देता...थक हार कर युवती भी युवक के साथ किताब पढ़ने में लीन हो जाती है...​

    ​​​आजकल फिल्मों की भी इसी तरह मार्केंटिंग की जाती है कि पहले दो-तीन दिन में ही फिल्म की लागत के साथ मुनाफ़ा बटोर लिया जाए...चेतन लेखन में भी इसी प्रयोग को आजमा रहे हैं...अब भले ही उन्हें अपनी किताब बेचने के लिए नारी की देह का सहारा लेना पड़ रहा है...वाकई ज़माना बदल गया है...मुंशी प्रेमचंद नहीं ये चेतन भगत का ज़माना है...नीचे किताब के विज्ञापन के वीडियो को अपने रिस्क पर ही देखिए...

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